Search

प्रवीण नारायण चौधरी

महिला सशक्तीकरण आ दहेज प्रताड़ना सँ निजात विषय पर अहमदाबाद मे मैथिलानी संग वार्ता आइ

अहमदाबाद, ९ सितम्बर, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! मिथिला मिरर आ शाश्वत मिथिलाक संयुक्त तत्वावधान मे अहमदाबादक ऐतिहासिक साबरमती रीवर फ्रंट पर आइ रवि दिन ९ सितम्बर केँ साँझ ६ बजे सँ मैथिलानी संग संवाद कार्यक्रम आयोजित अछि। आजुक वार्ताक विषय अछि महिला सशक्तीकरण एवं दहेज प्रताड़ना सँ निजात जाहि मे अहमदाबाद केर प्रवासी मैथिल समाज आमंत्रित महिला सशक्तीकरण आ दहेज प्रताड़ना सँ निजात विषय पर अहमदाबाद मे मैथिलानी संग वार्ता आइ

दरभंगा मे सम्पन्न भेल कजरी महोत्सव, कजरी गीत-संगीत सँ वातावरण बनल सुरम्य

दरभंगा, ८ सितम्बर, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! सद्भावना यात्रा समिति दरभंगाक तत्वावधान मे काल्हि ७ सितम्बर स्थानीय एमएमटीएम कालेज केर सभागार मे भव्य कजरी महोत्सव केर आयोजन कयल गेल । एहि आयोजनक संयोजक आकाशवाणी दरभंगाक संवाददाता एवं मैथिली भाषाक चर्चित ‘मणि’ मणिकान्त झा द्वारा भेल । मिथिलाक गायन परम्परा मे ‘कजरी गीत’ केर अपन अलग स्थान दरभंगा मे सम्पन्न भेल कजरी महोत्सव, कजरी गीत-संगीत सँ वातावरण बनल सुरम्य

चीनक बन्दरगाह नेपाल लेल कतेक उपयोगी आ कतेक आवश्यक

नेपाल केँ भेटल चीनी बन्दरगाह प्रयोग करबाक अनुमति   नेपाल लेल चीन सँ वैकल्पिक समुद्री मार्ग भेटबाक समाचार पढलहुँ। भारत पर पूर्ण निर्भरताक विकल्प ताकब नेपालक सार्वभौमिक अधिकार मे पड़ैत अछि। भारत-नेपाल बीच मे जाहि तरहक जनस्तरीय सम्बन्ध अछि ताहि मे राजनयिक सम्बन्ध वा दुइ देशक राजनीतिक सम्बन्ध कहियो बाधा बनत ई सोचनाय हमरा हिसाबे चीनक बन्दरगाह नेपाल लेल कतेक उपयोगी आ कतेक आवश्यक

मैथिली कथा गोष्ठीक आयोजन आइ २ बजे सँ दरभंगा मेः संयोजक अशोक मेहता

दरभंगा, ८ सितम्बर, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! आइ २ बजे सँ रातिक १२ बजे धरि महेश ठाकुर महाविद्यालय – दरभंगा मे मैथिली कथाकार लोकनिक जमघट लागत । आजुक सम्मेलन मैथिली लोकसाहित्यक पुरोधा डा. ब्रजकिशोर वर्मा ‘मणिपद्म’ केर विशेष रूप सँ समर्पित रहत। सब तुरक कथाकार लोकनि अपन कथाक पाठ करता आ ताहि पर समीक्षा सेहो कयल मैथिली कथा गोष्ठीक आयोजन आइ २ बजे सँ दरभंगा मेः संयोजक अशोक मेहता

मिथिलाक समग्र विकास मे प्रवासी मैथिलक योगदानः नव विकसित धारा सँ बढल अछि आशा

शाश्वत मिथिला – अहमदाबाद केर अभियन्ता आ प्रबुद्धजन श्री राजकिशोर झा केर विशेष प्रेरणा सँ वर्तमान प्रवासी मिथिला समाज लेल एक विचार – ई लेख विशेष रूप सँ प्रवासी मैथिल व हुनका लोकनिक महत्वपूर्ण योगदानक मद्देनजरि लिखल गेल अछि। श्री राजकिशोर झा संग वार्ता आ सुझावक संग-संग स्थिति-परिस्थितिक नीक समीक्षा एहि लेख केर रचनात्मकता मे मिथिलाक समग्र विकास मे प्रवासी मैथिलक योगदानः नव विकसित धारा सँ बढल अछि आशा

कृष्ण मे १६ कला कि-कि छलन्हि (हिन्दी लेख)

– अनिरुद्ध जोशी ‘शतायू’ (साभारः वेबदुनिया डट कम) राम 12 कलाओं के ज्ञाता थे तो भगवान श्रीकृष्ण सभी 16 कलाओं के ज्ञाता हैं। चंद्रमा की सोलह कलाएं होती हैं। सोलह श्रृंगार के बारे में भी आपने सुना होगा। आखिर ये 16 कलाएं क्या है? उपनिषदों अनुसार 16 कलाओं से युक्त व्यक्ति ईश्‍वरतुल्य होता है। आपने कृष्ण मे १६ कला कि-कि छलन्हि (हिन्दी लेख)

मिथिला – इतिहास सँ वर्तमान धरि

मिथिला – इतिहास सँ वर्तमान धरि हे मिथिला – बेर-बेर प्रणाम – मातृभूमि स्तवन ईश्वर प्रति सम्पूर्ण आस्थावान् रहैत अपन जन्म एहि मिथिला नामक तीर्थभूमि – तंत्रभूमि -सिद्धभूमि मे होयबाक लेल पुनः-पुनः आभार प्रकट करैत छी। मिथिलाक स्तवन करब केहेन कल्याणकारी अछि से त देखू – म सँ मकार ब्रह्मा आर ताहि मे इकारान्त स्त्री यानि ब्रह्माणी (सरस्वती विराजित मिथिला – इतिहास सँ वर्तमान धरि

पुराण प्रमाणित मिथिला – रोचक जनतब सहित

लेख – संकलितः संजय सागर द्वारा ‘हम सब मैथिल छी’ फेसबुक ग्रुप सँ साभार मूल लेखकः कृष्ण कुमार झा ‘अन्वेषक’ – जनवरी २२, २०१२ – अपन ब्लौग पेज पर  पुराण प्रमाणित मिथिला…. देशेषु मिथिला श्रेष्ठा गङ्गादि भूषिता भुविः । द्विजेषु मैथिलः श्रेष्ठः मैथिलेषु च श्रोत्रियः ॥ (संशोधित श्लोकः देशेषु मिथिला श्रेष्ठा गंगादि भूषिता भुवि:। जनेषु मैथिल: पुराण प्रमाणित मिथिला – रोचक जनतब सहित

मानव जीवन आ चारि आश्रमः ज्ञान सँ भरल पठनीय आ मननीय आलेख

आश्रम चतुष्टयपर एक विहंगम दृष्टि   – स्वामी श्रीविज्ञानानन्दजी सरस्वती   (मूल आलेखः हिन्दी, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   चारि वर्ण आ चारि आश्रम प्राचीनकालिक अछि अर्थात् वैदिक कालीन अछि। एहि लेल मनुस्मृति मे कहलो गेल छैक जे ‍-   चातुर्वर्ण्यं त्रयो लोकाश्चत्वारश्चाश्रमाः पृथक्। भूतं भव्यं भविष्यं च सर्वं वेदात्प्रसिध्यति॥   – मनुस्मृति १२/९७   मानव जीवन आ चारि आश्रमः ज्ञान सँ भरल पठनीय आ मननीय आलेख

मिथिलाक्षर केर सही रूप कोन – सुझाव व विचार संकलन

मिथिलाक्षर केर औचित्य आ रूप पर चर्चा मिथिलाक्षर केर प्रयोग-प्रचलन आब लगभग १३५ वर्ष सँ ऊपर सँ व्यवहार बन्द होयबाक आ जनसामान्य केर सहजता आ संस्कृत एवं हिन्दी पर्यन्त केर सुगम पाठ्य-लेखन आदिक वास्ते देवनागरी केर स्वीकृति आ प्रचलन बढि गेलाक बाद धीरे-धीरे ‘मिथिलालिपि’ (तिरहुताक्षर) उठाव जेकाँ भऽ गेल। लेकिन लिपि कोनो पहिचान आ सभ्यताक मिथिलाक्षर केर सही रूप कोन – सुझाव व विचार संकलन