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प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिली बालकथा – बुधियार डाक्टर

मैथिली बालकथा – बुधियार डाक्टर – सुजीत कुमार झा, जनकपुर ‘दाई एकरा खिस्सा नहि कहिए ?’ ‘किए रे !’ ‘ई हमरा मारलक अए ।’ ‘हँ गै मुन्नी, भैयाके मारलिहए ? ’ ‘भैया हमर फित्ता तानि देलन्हि अछि ।’ ‘अएँ रे टिंकु तो बहिनके फित्ता तानि देलिहए, आ उल्टे कहैत छए मारलकौए ?’ दाई कनि तमसाईत मैथिली बालकथा – बुधियार डाक्टर

सुरुजक छाहरि कृति लेल कवि मनोज शाण्डिल्यकेँ भेटतनि कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान

किसलय कृष्ण, समाचार सम्पादक, मैथिली जिन्दाबाद । अक्टूबर २५, २०१८ ।  मैथिली साहित्यक क्षेत्रमे कविता विधाक लेल विशेष रूपसँ देल जायवला किर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान एहि बेर युवा कवि मनोज शाण्डिल्यकेँ प्रदान कयल जेतन्हि । चेतना समिति पटना द्वारा ई सम्मान प्रतिवर्ष आयोजित विद्यापति स्मृति पर्वक अवसर पर प्रदान कएल जाइत अछि । साहित्य अकादमी सुरुजक छाहरि कृति लेल कवि मनोज शाण्डिल्यकेँ भेटतनि कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान

दरभंगा मे झिलमिल झिझियाः झिझिया केर झंकार सँ मिथिला मे बहार

दरभंगा, २५ अक्टूबर २०१८ । मैथिली जिन्दाबाद!! शरद पूर्णिमा, पोखरीक महार, जगमगाइत इजोरिया, संस्कृति प्रेमी लोकनिक उमड़ल भीड़ और लोक संस्कृति प्रति हृदय सँ छलकैत अपनत्व भरल सिनेह …. एहेन दृश्य जँ कतहु देखा जाय तँ बुझू जे सोन मे सोहाग अछि । ओना तँ ई कोनो काव्य-कल्पना समान बुझय मे अबैत अछि, मुदा एहि कल्पना दरभंगा मे झिलमिल झिझियाः झिझिया केर झंकार सँ मिथिला मे बहार

दरभंगा नामकरणक अनुपम रहस्य

अनुवादित लेख संकलन एवं अनुवाद – प्रवीण नारायण चौधरी साभारः अपन घरदौर – न्यूज़ मिथिला दरभंगा संस्कृत केर दारू-भंग (लकडी केँ काटिकय बनल शहर) सँ उदभूत भेल शब्द थिक। फारसी मे एकरा लेल दर-ए-बंग लिखल जाइत अछि। लेकिन बंगाल केर साहित्यिक, सामाजिक, ज्योतिषीय रचना में दरभंगा केँ आइयो धरि द्वार-बंग टा सँ संबोधित कयल जाइत अछि। दरभंगा नामकरणक अनुपम रहस्य

भगवान् आ बच्चाक बीच समानता – मीमांसक पं. रुद्रधर झा केर अत्यन्त प्रेरणास्पद लेख

स्वाध्याय आलेख ‘गूढ तत्त्व समीक्षा’ नामक महत्वपूर्ण पोथी मे पंडित रुद्रधर झा केर अनेकों मननीय लेख मे सँ एक मूल्यवान् लेख आइ एतय राखि रहल छी। भगवान् केर स्वभाव बच्चा जेकाँ होइत छन्हि, एहि पंक्ति केँ मीमांसक पं. रुद्रधर झा कोना सिद्ध करैत छथि, आर एकरा पढला-मनन केला सँ हमरा लोकनि कोन तरहक शिक्षा ग्रहण भगवान् आ बच्चाक बीच समानता – मीमांसक पं. रुद्रधर झा केर अत्यन्त प्रेरणास्पद लेख

मैथिली-मिथिलाक जीवन्तता-अमरताक एकमात्र सूत्र – व्यक्तिगत योगदान आ स्वयंसेवा

व्यक्तिगत योगदान आ स्वयंसेवा हमर मूल पूँजी व्यक्तिगत योगदान सँ बेसी जिबैत अछि मैथिली। स्वयंसेवा केर कर्म-सिद्धान्त मिथिलाक लोक केर मूल धर्म आ मुख्य पूँजी रहल अछि। राज्य केर तरफ सँ पोखरि आ इनार आ कि सार्वजनिक हित केर काज एखन धरि ओतेक नहि देखाइछ जतेक कि स्वयं अपन लोक आ ओकर हित लेल गाम-समाज मैथिली-मिथिलाक जीवन्तता-अमरताक एकमात्र सूत्र – व्यक्तिगत योगदान आ स्वयंसेवा

राष्ट्रीय लोक उत्सव जे मधुबनीक भटसिमैर गाम मे पसारलक सांस्कृतिक छवि-छटा – रिपोर्ट

सुदूर गाम धरि देशव्यापी सांस्कृतिक चेतना जगा रहल अछि ‘अछिञ्जल’ बिहार केर विरासत तथा कला-संस्कृति केर अलख जगाकय राखय लेल प्रयासरत अछिञ्जल राष्ट्रीय स्तर केर एक गोट अग्रणी संस्था थिक। अछिञ्जल अनेकों महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम यथा अन्य-अन्य राज्य संग सांस्कृतिक आदान-प्रदानक संग अन्तर्राज्यीय संबंध स्थापित करबाक विभिन्न गतिविधि, कला-प्रदर्शन, कला-शिक्षण, गोष्ठी आदि केर आयोजन कयलक राष्ट्रीय लोक उत्सव जे मधुबनीक भटसिमैर गाम मे पसारलक सांस्कृतिक छवि-छटा – रिपोर्ट

मैथिली-मिथिलाक परिदृश्य सहित रंगकर्म-थियेटर-फिल्म लेल समर्पित अभिनेता-निर्देशक सागर सिंह

विशिष्ट व्यक्तित्व परिचयः रंगकर्मी एवं निर्देशक सागर सिंह   हिनका संग पहिल भेंट भेल जुलाई २०१६ केर मैथिली नाट्य समारोह जनकपुर मे। महेन्द्र मलंगिया जी केर लिखल नाटक ‘काठक लोक’ केर मंचन ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालयक स्नातकोत्तर नाट्य समूह द्वारा मंचन कयल गेल छल। सागर सिंह एकर निर्देशक तथा स्वयं मुख्य अभिनेताक भूमिका मे देखेलाह। मैथिली-मिथिलाक परिदृश्य सहित रंगकर्म-थियेटर-फिल्म लेल समर्पित अभिनेता-निर्देशक सागर सिंह

दुर्गा पूजा आ भगवतीक विदाह होयबाक उदासी

माँ केर विदाह होबक समय, सगर मिथिला उदास भऽ जाइत अछि दुर्गा पूजाक प्रतीक्षा लोक सालो भरि करैत अछि   साल भरिक प्रतीक्षा उपरान्त अबैत अछि महापर्व दुर्गा पूजाक समय आर अपना-अपना तरहें प्रचलित विधान केर अनुकरण करैत जगह-जगह होइत अछि आदिशक्ति जगदम्बाक पूजा-पाठ। समूचा भारतवर्षीय विभिन्न राष्ट्र केर संग-संग आब विदेशहु केर धरती पर दुर्गा पूजा आ भगवतीक विदाह होयबाक उदासी

श्रीमद्देवीभागवत कथा आधारित ‘सीताहरण, राम केर शोक तथा लक्ष्मण द्वारा सान्त्वना’

श्रीमद्देवीभागवत – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २९   सीताहरण, राम केर शोक तथा लक्ष्मण द्वारा हुनका सान्त्वना देनाय   व्यासजी बजलाह – रावणक कुविचारपूर्ण वचन सुनिकय सीता भय सँ व्याकुल भऽ काँपि गेलीह। पुनः मोन केँ स्थिर कय ओ कहलखिन, “हे पुलस्त्यक वंशज! काम केर वशीभूत भऽ अहाँ एहेन अनर्गल वचन कियैक कहि रहल छी। श्रीमद्देवीभागवत कथा आधारित ‘सीताहरण, राम केर शोक तथा लक्ष्मण द्वारा सान्त्वना’