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प्रवीण नारायण चौधरी

राम सोगारथ यादव केर ५ गोट मैथिली काव्य रचना

विराटनगर, ५ जनवरी २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! नेपाल मे मैथिली लेखन मे युवा तुर केर कवि सब काफी अग्रसर छथि। जखन कि विद्यालय स्तर मे पढाई वास्ते ई विषय केर विकल्प रहितो शिक्षकक अभाव मे पढबाक अवस्था ओतेक नीक नहि अछि, तथापि मातृभाषा प्रति निजी स्नेह केर कारण लेखनी मे ई लोकनि काफी आगू रहैत छथि। राम सोगारथ यादव केर ५ गोट मैथिली काव्य रचना

सखी-बहिनपा लोकनिक आनलाइन मैथिली लघुकथा प्रतियोगिता

विराटनगर, ५ जनवरी २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! सखी-बहिनपा फेसबुक ग्रुप द्वारा मिथिलाक सजग नारी समाज साहित्यिक जागरण मे सेहो आगू बढि रहली अछि। एहि ग्रुप केर संस्थापक एवं संचालक श्रीमती आरती झा द्वारा सब सखी-बहिन सँ लघुकथा लिखिकय #लघुकथासखीबहिनपा केर मुख्य प्रतियोगितात्मक शीर्षक अन्तर्गत पठेबाक अनुरोध कयलीह अछि। एखन धरि दर्जनों सखी-बहिन लोकनि अपन-अपन लघुकथा पोस्ट सखी-बहिनपा लोकनिक आनलाइन मैथिली लघुकथा प्रतियोगिता

नव वर्ष २०१९ केर नव संकल्प – अष्टावक्र संहिता स्वाध्यायक सुन्दर विकल्प

स्वाध्याय नव वर्ष २०१९ मे ‘अष्टावक्र संहिता’ केर स्वाध्यायक संकल्प संग आइ श्रीगणेश कय रहल छी –   प्रथम अध्याय – आत्मज्ञान केर उपदेश (Instruction of Self-Realization) जनक उवाच। कथं ज्ञानमवाप्नोति कथं मुक्तिर्भविष्यति। वैराग्यं च कथं प्राप्तमेतद् ब्रुहि मम प्रभो॥१॥ जनक पूछलखिन – ज्ञानक प्राप्ति कोना होयत? मुक्ति केना भेटत? वैराग्य प्राप्ति केना संभव होयत? नव वर्ष २०१९ केर नव संकल्प – अष्टावक्र संहिता स्वाध्यायक सुन्दर विकल्प

गायक प्रभाष झा केर भक्ति-भजन यू-ट्युब पर रिलीज

विशेष व्यक्ति परिचयः गायक प्रभाष झा हमर लिखल एवं गायल गीत, नैना म्यूजिक केँ आभार। – गायक प्रभाष झा हिनकर गीत एतय सुनल जा सकैत अछिः https://youtu.be/at5aObte9nc नैना म्युजिक व निर्माता विक्की चौधरी प्रस्तुत करैत छथि मिथिलांचलक उदीयमान गायक ” प्रभाष झा ” केर आवाजमे देवो केर देव महादेव केर बहुते मीठ आ भावपूर्ण भजन गायक प्रभाष झा केर भक्ति-भजन यू-ट्युब पर रिलीज

बाघ पकड़यवला मनुक्खः सुजीत झा केर नवका बालकथा

मैथिली बालकथा बाघ पकड़एवला मनुष्य – सुजीत कुमार झा एक गाममे एकटा जियालाल नामक हजाम छल । ओ गाममे ओकरा बहुत बड़का समझवाला बुधियार लोक बुझल जाइत छल । एकबेर जियालाल कोनो काजसँ दोसर गाम जाएके लेल घरसँ निकलल । सँगमे दाढ़ी काटएवला पेटी सेहो रखने छल । बाटमे बहुत बड़का आ घना जंगल छल, ओकरा बाघ पकड़यवला मनुक्खः सुजीत झा केर नवका बालकथा

ओर्कुट-फेसबुक सँ जानकीभाव प्राप्ति तक

जानकीभाव – Janaki-Consciousness   हमर फेसबुक केर यात्रा आ जानकीभावक अनुभूति – प्रवीण नारायण चौधरी, विराटनगर   फेसबुक पर लेखन सँ हमरा लाखों पाठक भेटल, ई हमर असल आमदनी थिक। आइ करीब ९ वर्षक कालक्रम मे फेसबुक एतेक रास उपलब्धि देलक जेकरा लेल हम कृतज्ञता ज्ञापन करैत छी। एहि सँ पहिने ‘ओर्कुट’ पर सक्रिय रही। ओर्कुट-फेसबुक सँ जानकीभाव प्राप्ति तक

मिथिला कला साहित्य आ फिल्म महोत्सव पर प्रवीण विचार

माल्फ – सहरसा   मिथिला कला साहित्य आ फिल्म महोत्सव   २८, २९ आ ३० दिसम्बर – त्रिदिवसीय आयोजन आखिरकार २०१८ ई. केर अन्त मे भव्यताक संग संपन्न भेल। मैथिली भाषा-साहित्य, कला-संस्कृति, फिल्म, पुस्तक प्रदर्शनी लेल जहिना २०१८ केर आरम्भ भारतक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सँ भेल, तहिना सुन्दर समापन मिथिलाक मूल धरती सहरसा मे आबिकय मिथिला कला साहित्य आ फिल्म महोत्सव पर प्रवीण विचार

विदापत नाच मे विद्यापतिक पद्य संग मानवीय सरोकारक नाटकीय प्रदर्शनः रमेश रंजन झा

विराटनगर, ३ जनवरी २०१८। मैथिली जिन्दाबाद!! विराटनगर स्थित गनगाईं सामुदायिक भवन मे आयोजित एक विचार गोष्ठी केँ संबोधित करैत नेपाल संगीत तथा नाट्य प्रज्ञा प्रतिष्ठानक नाट्य विभागक पूर्व प्रमुख एवं प्राज्ञ रमेश रंजन झा विदापत नाच केर ऐतिहासिकता पर प्रकाश दैत कहलनि जे एहि नाच मे कृष्ण लीलाक वर्णन महाकवि विद्यापतिक रचना अनुसार जनभाषा मे विदापत नाच मे विद्यापतिक पद्य संग मानवीय सरोकारक नाटकीय प्रदर्शनः रमेश रंजन झा

मिथिलाक महान मनीषीगण: डा. सुभद्र झा केर जीवन-वृत्ति पर डा. रामदेव झा केर लेख

डा. सुभद्र झा: जीवन वृत्त   – डा. रामदेव झा   डा. सुभद्र झाक जीवन-वृत्त व्यवस्थित रूपमे कहियो लिखल गेल नहि। अपन परिवार ओ आरम्भिक जीवनक सम्बन्धमे विकीर्ण ओ प्रासंगिक रूपमे किछु-किछु सूचना स्वयं ओ अपन निबन्धात्मक संस्मरण सभमे देने छथि। ‘जीवनवृत्त: पिता-माता’ निबन्धमे ओ सूचित कयने छथि जे हुनक जन्म आषाढ वदि पञ्चमी मंगल, मिथिलाक महान मनीषीगण: डा. सुभद्र झा केर जीवन-वृत्ति पर डा. रामदेव झा केर लेख

काशीकान्त मिश्र ‘मधुप’ जी केर पुण्यतिथि पर डा. रमण संस्मरण

पटना, २० दिसम्बर २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! मोन पड़ै छथि कविचूडामणि मधुप (०२.१०.१९०६ – २०.१२.१९८९) “पुष्पित पुञ्जक पुञ्ज कुसुम सँ, मण्डित निभृत निकुञ्जक माझ, गुञ्जित-मधुकर-निकर बनौने- छल जै ठाँ दिन रहितहुँ साँझ। नयनक आधाहुक आधासँ राधा! बाधा देखह आबि, तै निकेत सँ वंशीसँ संकेत करथि मोहन खन गाबि। – राधाविरह ‘राधाविरह’ महाकाव्य पर साहित्य अकादेमीक पुरस्कारक काशीकान्त मिश्र ‘मधुप’ जी केर पुण्यतिथि पर डा. रमण संस्मरण