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प्रवीण नारायण चौधरी

कहू जे भगवान् कियैक कनता – कृष्ण केर कनबाक विलक्षण रहस्य

स्वाध्याय श्री कृष्ण केर कनबाक रहस्य   (संकलन स्रोतः कल्याण, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी, मूल संवादः कालाचाँद गीता)   एक बेर श्रीकृष्ण केँ कनैत देखिकय एक गोपी कनबाक कारण पुछलखिन। हुनका उत्तर मे श्रीकृष्ण कहैत छथिन –   ‘सुनू सखि! जतय प्रेम अछि, ओतय निश्चय टा आँखि मे नोरक धारा बहैत रहत। प्रेमीक हृदय पसीझिकय कहू जे भगवान् कियैक कनता – कृष्ण केर कनबाक विलक्षण रहस्य

मैथिलीक श्रेष्ठ साहित्यकार एवं नेपालक प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता रमेश रंजन झा केँ नेशनल अवार्ड

१४ जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषाक वरिष्ठ साहित्यकार – रंगकर्मी तथा नेपालदेशक प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता रमेश रंजन झा केँ नेपाली फिल्म शत्रुगते मे उत्कृष्ट अभिनय हेतु राष्ट्रीय पुरस्कार (अवार्ड) नेपालक राष्ट्रपति विद्या भंडारी केर हाथ सँ भेटलनि अछि। लोकसंचार द्वारा सम्प्रेषित समाचार जे सामाजिक संजाल मे देल गेल छल ताहि मे कहल गेल अछि मैथिलीक श्रेष्ठ साहित्यकार एवं नेपालक प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता रमेश रंजन झा केँ नेशनल अवार्ड

मिथिला अभियन्ता राजकिशोर बाबूक २५म वैवाहिक वर्षगाँठ पर मिथिला समारोह अहमदाबाद मे

१४ जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषा आ मिथिला संस्कृति संग-संग मिथिलाक ऐतिहासिक धरोहर केर संरक्षण, संवर्धन आ प्रवर्धनक दिशा मे सदिखन चिन्तनशील, कार्यक्रम योजना विकास मे संलग्न आर २०१९ केर आरम्भहि मे पश्चिम भारतीय महानगर ‘अहमदाबाद’ मे आयोजित “अन्तर्राष्ट्रीय मिथिला महोत्सव” केर संयोजक-परिकल्पक राजकिशोर झा केर २५म वैवाहिक वर्षगाँठ शाश्वत मिथिला अहमदाबाद परिवार मिथिला मिथिला अभियन्ता राजकिशोर बाबूक २५म वैवाहिक वर्षगाँठ पर मिथिला समारोह अहमदाबाद मे

आइ सँ शुरू भेल निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर पटना मे, चेतना समितिक नव क्रान्तिकारी प्रयास

१४ जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! भाषा, साहित्य आ संस्कृति केर सेवा सँ ऊपर आब चेतना समिति पटना किछु एहेन प्रयास सेहो आरम्भ कयलक अछि जाहि अन्तर्गत सीधा जन-जन सँ जुड़ाव बढत। आर एहि तरहें सेवाग्राही मैथिलीभाषी जनसमुदाय केँ अपन भाषा-संस्कृति आ सभ्यता संग सामाजिक-राजनीतिक अन्य सरोकार दिश सेहो झुकाव बनत। किछु एहि तरहक परिकल्पनाक संग आइ सँ शुरू भेल निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर पटना मे, चेतना समितिक नव क्रान्तिकारी प्रयास

धनरोपनी सँ जुड़ल मिथिलाक साहित्य-संस्कारः गभ लेनाइ आ धनखेती लेल डाक-वचन

आलेख – प्रवीण नारायण चौधरी धनरोपनी सँ जुड़ल मिथिलाक साहित्य-संस्कार   के नहि जनैत छी जे बिना अन्न-पानि मानव जीवन किंवा सम्पूर्ण पर्यावरणीय संतुलन, हर जीव-जन्तु आ जीवन पद्धति स्वयं असंभव अछि। हम-अहाँ जे मिथिलाक लोक थिकहुँ एतय सेहो खेती-पाती आ घर-गृहस्थी संग जीवनचर्याक अपन एक अलग विशिष्ट परम्परा सुस्थापित अछि। हालांकि ई परम्परा आजुक धनरोपनी सँ जुड़ल मिथिलाक साहित्य-संस्कारः गभ लेनाइ आ धनखेती लेल डाक-वचन

पहिने बेटी बेचल जाइत छल, आब बेटा बेचल जाइत अछि – मिथिला समाज सँ गम्भीर सवाल

लेख – रूबी झा हम जहन छोट रही, करीब पन्द्रह साल केर, त एकटा टोल के दीदी (बुआ) बुलैय लेल अंगना एलीह, माँ कहलक दीदी छथिन गोर लगहुन। हम गोर त लागि लेलियनि लेकिन जहन दीदी चैल गेलखिन्ह त माँ केँ हम सवाल पर सवाल पूछैय लगलियैक। हम छोटे सँ बहुत जिज्ञासु छलहुँ। हरेक चीज पहिने बेटी बेचल जाइत छल, आब बेटा बेचल जाइत अछि – मिथिला समाज सँ गम्भीर सवाल

फेसबुक पर फेसक लफड़ा, बातक रगड़ा बातक झगड़ा

अहाँ सँ किछु विशेष बात करक छल   सभक सिनेह अहाँ केँ नसीब नहि होयत सहजहि, एहि लेल अहाँ कनिकबो सोच मे नहि पड़ू। सच छैक जे अहाँ केँ ई खराब लागत, मोन अन्दर सऽ तड़पैत रहत, लेकिन तैयो वांछित प्रेमक परिमाण अपेक्षा अनुरूप नहि भऽ सकैत छैक। ताहि सँ एतेक मानिकय चलल करू जे फेसबुक पर फेसक लफड़ा, बातक रगड़ा बातक झगड़ा

मिथिलाक लोकसाहित्य मे डाक वचन अनुसार व्रत-उपवास लेल प्रसिद्ध उक्तिक व्याख्या

मैथिली लोकसाहित्य – डाक वचन  – स्रोतः पंडित महेन्द्र ठाकुर – संकलनः प्रवीण नारायण चौधरी मिथिलाक गृहस्थ परिवार लेल विशेष पूजा-पाठ पर डाकक वचन सुतब-उठब टांग मोरा ताहि बीच मे जन्मल छौड़ा राजा बेटा रामलाल आठ-नौ मे डाक नेहाल बतहाक चौदह बतहीक आठ अन्न त्यागी सब जीवन काठ ई थिक डाक वचन। पंडित महेन्द्र ठाकुर मिथिलाक लोकसाहित्य मे डाक वचन अनुसार व्रत-उपवास लेल प्रसिद्ध उक्तिक व्याख्या

राधाक कृष्ण-विरह केर दुइ गोट विशिष्ट रचना – कि थिक राधाभाव से स्पष्ट करैत मूल्यवान् साहित्य

स्वाध्याय माधव-विरहिणी राधाक उद्गार   – श्रीजसवंतजी रघुवंशी (भावानुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   भगवान् कृष्ण जहिया सँ मथुरा गेला, तहिये सँ सब गोप-गोपियन विरहाग्नि सँ व्याकुल भेलाह, शोक-सन्तप्त रहैत विलाप करैत छलाह। एहि क्रम मे हुनक प्रिय सखा मनसुख केर विरह-पीड़ा केँ कवि द्वारा ‘मनसुख-विरह-शतक’ केर रूप मे निबद्ध कयल गेल अछि। एकर जाहि अंश राधाक कृष्ण-विरह केर दुइ गोट विशिष्ट रचना – कि थिक राधाभाव से स्पष्ट करैत मूल्यवान् साहित्य

ईन्दूक बाबू फ्रीज कियैक नहि कीनलनि

लघुकथा – रूबी झा “बाबू यौ फ्रीज खरीद लिय ने, ओहि में सँ ठंडा-ठंडा पैन पिब आ दूध कहियो फटबो नहि करत, दही सेहो नहि खट्टा होयत” ईन्दू अपन पिता सँ बारम्बार आग्रह क रहल छलखिन्ह। पिता बात केँ हमेशा टाइर दैत छलखिन्ह। एक दिन ईन्दू अपन जिद्द पर अड़ि गेली। पिता रिटायर्ड शिक्षक रहथिन्ह, ओ पेंशन ईन्दूक बाबू फ्रीज कियैक नहि कीनलनि