स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः – स्वत्व सँ दूर सन्तोष नहि
विचार – प्रवीण नारायण चौधरी स्वत्व सँ दूर सन्तोष नहि मयूर केर नाच देखि कौआ लोभा गेल। मयूर सभ चलि गेलाक बाद ओहो ओकर पाँखि पहिरि नाचय लागल। दोसर कौआ सब देखलकैक त हँसय लागल सब। लेकिन ओहि कौआ केँ मयूर एतेक बेसी प्रभावित कय देने छलैक जे ओ मगन भऽ स्वजातिक हँसीक बरखिलाफ … स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः – स्वत्व सँ दूर सन्तोष नहि









