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प्रवीण नारायण चौधरी

भक्तिभाव आ भावुकता सँ भरल दर्जनों प्रस्तुति दैत श्रोता-दर्शकक मन मोहि लेलीह कुमकुम मिश्रा

विराटनगर, २१ जुलाई २०२१ । मैथिली जिन्दाबाद!! भक्तिभाव आ भावुकता सँ भरल दर्जनों प्रस्तुति दैत श्रोता-दर्शकक मन मोहि लेलीह कुमकुम मिश्रा   रवि दिन सन्ध्याकाल ८ बजे सँ ११ बजे लगातार ३ घन्टा धरिक लाइव सत्र मे मिथिलाक सुप्रसिद्ध गायिका कुमकुम मिश्रा द्वारा दहेज मुक्त मिथिला समूह पर लाइव प्रस्तुति देल गेल। सावन मासक पहिल भक्तिभाव आ भावुकता सँ भरल दर्जनों प्रस्तुति दैत श्रोता-दर्शकक मन मोहि लेलीह कुमकुम मिश्रा

शिवपूजन विधि – शिवपुराण अनुसार (ब्रह्माजीके शब्दमें)

आध्यात्मः स्वाध्याय सँ प्राप्त अद्भुत शिव पूजन पद्धति शिवपूजनके सर्वोत्तम विधिक वर्णन (अध्याय १३ – संक्षिप्त शिवपुराण – रुद्रसंहिता) ब्रह्माजी कहैत छथि – आब हम पूजाके सर्वोत्तम विधि बता रहल छी, जे समस्त अभीष्ट तथा सुखकेर सुलभ कराबयवाला अछि। देवता एवं ऋषिगण! अहाँ सभ ध्यान दऽ के सुनू। उपासकके चाही कि ओ ब्राह्म मुहूर्तमें सुइत शिवपूजन विधि – शिवपुराण अनुसार (ब्रह्माजीके शब्दमें)

बाबू कृष्णनन्दन सिंह – एक विरल व्यक्तित्व

लेख – डा. रामानन्द झा ‘रमण’ बाबू कृष्णनन्दन सिंह: एक विरल व्यक्तित्व: (20.07.1918-16.01.2001) मैथिली भाषा-साहित्यक क्षेत्रमे बाबू कृष्णनन्दन सिंहक अवदानक चर्चाक सन्दर्भमे अपन बात रखबाक पूर्व हम कविचूड़ामणि काशीकान्त मिश्र ‘मधुप’क उक्तिक, जे ‘राधा-विरह’मे अछि, तकर उल्लेख करब। कविचूड़ामणि मधुप लिखैत छथि – ‘राघोपुर पुबारि-ड्यौढ़ी स्थित- वारिज-पात-गात साक्षात, सत्साहित्य-सुधा-रुचि शुचि-रुचि- रुचिर-सुधाकर-यश-अवदात-। खण्डवलाकुल-कुञ्ज-मुकुल-कुल- रवि मैथिलीक प्राणाधार, बाबू कृष्णनन्दन सिंह – एक विरल व्यक्तित्व

मिथिला सनातन रहल आ रहत

सम्पादकीय मिथिला सनातन रहल आ रहत   मिथिला सदा-सनातन आ हिन्दू धर्मक इतिहास-पुराण मे उद्धृत होयबाक कारण स्वतः परिचित छैक। विगत कतेको सदी सँ मिथिलाक भौगोलिक पहिचान छहोंछित अवस्था मे छैक सेहो सर्वविदिते अछि, तथापि अपन ऐतिहासिक-सांस्कृतिक आ आध्यात्मिक-धार्मिक पहिचानक कारण ई स्वतः जीवित सेहो अछि। जखनहि मर्यादा पुरुषोत्तम राम जेना महानायक केर चर्चा होइछ मिथिला सनातन रहल आ रहत

हिन्दू संस्कृतिक स्वरूपः अवतारवाद

मूल लेखकः श्री जयदयाल गोयन्दका अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी अवतारवाद भगवान् श्रीराम, श्रीकृष्ण साक्षात् पूर्णब्रह्म परमात्मा थिकाह, ई विश्वास हिन्दू जातिक लोक मे प्रायः हमेशा सँ चलैत आबि रहल अछि। ई युक्तियुक्त आ उचितो अछि। निर्गुण-निराकार रूप सच्चिदानन्दघन परमात्मा अपने सगुण-साकाररूप मे प्रकट होइत छथि, जेना आकाश मे परमाणुरूप सँ स्थित जल पहिने बादल केर हिन्दू संस्कृतिक स्वरूपः अवतारवाद

अंग्रेजी भाषाक अनिवार्यता – वर्तमान पीढीक आवश्यकता विषय पर परिचर्चा

४ जुलाई २०२१ – मैथिली जिन्दाबाद!! दहेज मुक्त मिथिला फेसबुक समूह पर वेबिनार – अंग्रेजी भाषाक आवश्यकता  काल्हि शनि दिन ३ जुलाई २०२१ दहेज मुक्त मिथिलाक फेसबुक समूह पर ‘अंग्रेजी भाषाक अनिवार्यता – वर्तमान पीढीक आवश्यकता’ विषय पर एकटा अंग्रेजी परिचर्चा कार्यक्रमक आयोजन कयल गेल। एहि मे युवा पीढी सँ अभिभावक वर्ग केर वक्ता लोकनि अंग्रेजी भाषाक अनिवार्यता – वर्तमान पीढीक आवश्यकता विषय पर परिचर्चा

मैथिली आशुकवि दयानन्द दिक्पाल यदुवंशी केँ जनकपुर मे श्रद्धाञ्जलि अर्पित

३ जुलाई २०२१ – मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली साहित्यकार सभा जनकपुर द्वारा विज्ञप्ति जारी करैत मैथिली भाषाक आशुकवि रूप मे सुपरिचित स्रष्टा बुधनगरा मोरंग निवासी दयानन्द दिक्पाल यदुवंशी प्रति श्रद्धाञ्जलि अर्पण कयल गेल अछि। महासभाक सभापाल प्रेम विदेह एहि बातक जानकारी देलनि अछि। महासभा द्वारा जारी विज्ञप्ति मे दयानन्द दिक्पाल यदुवंशीक निधन सँ मैथिली भाषा-साहित्यक अपूरणीय मैथिली आशुकवि दयानन्द दिक्पाल यदुवंशी केँ जनकपुर मे श्रद्धाञ्जलि अर्पित

जितेन्द्र जीतूक कविता “लाज”

कविता – जितेन्द्र जीतू लाज चंदा मामा क, आरे पारे नदिया किनारे बजेवाक जिद्द कहाँ करैत छै ओ ? सोनाक कटोरिया मे दूधो भातक लालसा, नहि छै ओकरा । ओ त भैया-बाबू क आइँठे स’ चुपचाप पेट भरि लैत छै अपन ।   ओ जिद्द कहां करैत छै खेलौनाक लेल आ खेलेबाको जिद्द कहाँ ? जितेन्द्र जीतूक कविता “लाज”

अपन विशेष कला आ विद्या सँ दोसरहु केँ प्रशिक्षित करबाक अनुपम प्रयास

मिथिलाक जानकीस्वरूपा बेटी मंजूषा बहिन जेकाँ आगू आबथि – एक अपील   दहेज मुक्त मिथिला समूह पर सक्रिय दाय-माय केँ स्वरोजगार सँ सम्पन्न करबाक पुनीत उद्देश्य सँ ‘सिलाई-कढाई’ सिखेबाक लेल सामाजिक अभियन्ता मंजूषा झा आगू एलीह अछि। हुनकर कहब छन्हि जे अपनहि टा लेल आयार्जन करब त जनसामान्यक गुण भेल, यदि अपन कला सँ दोसर अपन विशेष कला आ विद्या सँ दोसरहु केँ प्रशिक्षित करबाक अनुपम प्रयास

एहि दुइ पाप सँ स्वयं केँ बचाउ

स्वाध्याय-विचार – प्रवीण नारायण चौधरी आजुक प्रसाद   आइ जुलाई १ तारीख, तदनुसार वृहस्पति दिन – ईस्वी संवत् २०२१ !! काल्हि एकटा बड महत्वपूर्ण श्लोक सोझाँ आयल छल जाहि मे कहल गेल छलैक कि दस टा बेटा के पोसनाय बराबर एकटा बेटी के पोसब होइत छैक। ताहि बेटी केँ हमर-अहाँक सामाजिक दस्तूर मुताबिक कन्यादान करैत एहि दुइ पाप सँ स्वयं केँ बचाउ