सन्ध्या-तर्पण केर सम्पूर्ण मिथिला पद्धति
सन्ध्या-तर्पण आउ, आइ संध्या-तर्पण करब शिक्षा ग्रहण करी। प्रत्येक द्विज लेल अनिवार्य कहल गेल अछि जे कम सँ कम एक संध्या यानि भोर, दुपहर आ साँझ तीन बेरुक संध्या मे सँ अनिवार्यतः एक संध्या अवश्यक करबाक चाही। तहिना, अपन पितर सभ केँ हुनक गोत्र व नामक संग जलार्घ्य यानि कि तर्पण आवश्यक कहल गेल अछि। … सन्ध्या-तर्पण केर सम्पूर्ण मिथिला पद्धति









