जँ अहाँ विद्यापति स्मृति पर्व समारोह वा मिथिला महोत्सव करैत छी तऽ एतेक बातक ध्यान राखू

कि सब जरूरी अछि मिथिला समारोह मे

आइ लोकपलायनक पीड़ा सँ आहत मैथिल समुदाय जतय-कतहु छथि, अपन संस्कृति, आस्था, परम्परा, व्यवहार, समाजिकता, आदि केँ बचेबाक लेल कोनो-न-कोनो सामूहिक उत्सव मनेबाक काज करय लगला अछि। हमहुँ सब जाहि ठाम रहि रहल छी ओतय अपन समाज, अपन भाषाभाषी आ समान विचारधाराक लोक संग एकटा सार्थक-सकारात्मक वातावरण लेल संघर्षरत छी। आर एहि क्रम मे गोटेक अनुभव सँ आइ किछु सारगर्भित सन्देश देमय चाहि रहल छी।
 
विद्यापति स्मृति पर्व समारोह मे निम्न कार्य सेहो जँ करब तऽ एकर दूरगामी प्रभाव समाज केँ लाभ जरूर देत, ई विचार अनुभवक आधार पर कहि रहल छी।
 
*सामाजिक सौहार्द्रता लेल समाजक उत्थान मे नीक योगदान कयनिहार विभिन्न जाति-समुदाय-धर्मादिक व्यक्तित्व लोकनिक व्यक्ति केँ सम्मान अवश्य करू। आजीवन योगदान लेल सम्मान – एहि सँ बाकी लोकमानस मे समाज प्रति अपन कर्तव्यपरायणताक बोध होइत छैक आर आगामी समय मे सब कियो निश्चित चाहैत अछि जे हमरो एहि तरहक सम्मान आ सहभागिता गरिमामय मंच सँ भेटत। ई सम्मान देबाक लेल सेहो आयोजक समिति द्वारा ३ वा ५ वा सुविधानुकूल संख्याक सम्मानित व्यक्ति केर चयन समिति बनाकय एकटा ‘सम्मान प्रशस्ति पत्र’ जाहि मे सम्मानित व्यक्ति केर आजीवन योगदानक सुन्दर चर्चा हो आर ताहि संग पाग, माला, दोपटा, ५-टुक वस्त्र, वा आरो जतेक संभव हो ततेक समर्पण संग एहि तरहक सम्मान प्रदान कयल जेबाक चाही।
 
*महिला समाज केँ आगू अनबाक लेल महिलावर्ग केन्द्रित कार्यक्रम केर एकटा विशेष सत्र जरूर राखू। एहि सत्रक संयोजन, व्यवस्थापन, संचालन, प्रस्तुति, सब बात लेल महिला सदस्य पर जिम्मेदारी दियौन। हुनका लोकनि सँ कार्यक्रम पूर्वहि सहकार्य करैत ई तय कय लेल जाउ जे एहि वर्षक समारोह मे ओ सब कोन तरहक आयोजन करती आर तेकरा लेल मूल आयोजन समिति पर कि भार तय करैत छथि। मंच हुनका सभक लेल कम सँ १ घंटा अवश्य देल जेबाक चाही। जेना, गीतनादक कार्यक्रम, विचार गोष्ठी मे महिला हिंसा आ घरेलू झगडा-झंझटि मे महिलाक भूमिका, पुरुषवर्ग सँ २१म शताब्दीक मैथिल महिलाक अपेक्षा… आदि विभिन्न विषय संभव छैक। एकर अतिरिक्त आजुक प्रोफेशनल महिला सँ हुनकर अनुभव शेयर करब आ तेकर प्रेरणा आम समाज मे बाँटब – एहि सब बातक आइ बड पैघ आवश्यकता छैक।
 
*बालबच्चा आ किशोर लेल सेहो हर महोत्सव मे कम सँ कम १ घंटाक एकटा सत्र राखब परम अनिवार्य अछि। एहि १ घंटा बाल बच्चा सब गीत, नृत्य, चुटकुला, चित्रकला, नाटक, आदि जे करय चाहय…. लेकिन ओकरा महोत्सव मे जोड़िकय ई अनुभूति करौनाय जे भविष्य मे तोरा सब केँ हमरा लोकनि जेकाँ आयोजनक भार उठबय पड़तौक, अपन भाषा-संस्कृति-समाज आदिक प्रति सेहो जिम्मेदार नागरिक जेकाँ चलय पड़तौक आर समग्र मे ‘नेतृत्व’ कोना करमे जाहि सँ अपन सभ्यताक रक्षा होयत से अनुभूति प्रदान करय पड़त। बालबच्चा सभक काव्य गोष्ठी सेहो बड़ा प्रासंगिक होएत अछि। टैलेन्ट शो मे गायन, नृत्य, मनोरंजन आदिक विभिन्न विधा मे ओकरा सब केँ समेटबाक चेष्टा हेबाके टा चाही। आर, ध्यान रहय जे एहि प्रस्तुति लेल सेहो बालबच्चा सब पर संयोजन, तैयारी आदिक भार दैत ओकरा मे नेतृत्व क्षमताक अभिवृद्धि करी।
 
*कालेज स्तरक छात्र व युवा सँ जुड़ल कार्यक्रम – सब सँ बेसी आइ यैह युवा वर्ग कटल-कटल रहैत अछि, ताहि हेतु एहि वर्ग केँ अपन पारम्परिक मूल्य ओ मान्यता सँ लगाव-जुड़ाव स्थापित करबाक उद्देश्य सँ किछु बेसी सान्दर्भिक जिम्मेवारी दैत एकटा विशेष सत्र एकरा सभक दिश सँ होयबाक जरूरत अछि। हालांकि, हमर अनुभव कहैत अछि जे ई वर्ग केँ जोड़य लेल मैथिली मे मेटेरियल केर अभाव अछि, ई सब बड बेसी तऽ स्वयंसेवक बनिकय भीड़ नियंत्रण आ दौड़-बरहा कय सकैत अछि…. लेकिन जखन युवा प्रतिभा सम्मान, ओकरा भीतरक प्रतिभा केँ बाहर आनबाक काज हम-अहाँ करब आर ओकरे सभक सम्बन्धित विषय पर सेमिनार, प्रशिक्षण, आदि समेटब तऽ ई वर्ग स्वस्फूर्त अपन जिम्मेदारी बुझत।
 
ई तीन-चारि टा बात अपन टेस्टेड प्रयोग सँ अपने लोकनि केँ कहल अछि। एकर अतिरिक्त मनोरंजन मे मिथिलाक कइएक तरहक झाँकी, यथा बैलगाड़ी, माफा मे राम-जानकी, होली-सौहार्द्रता, कमला स्नान, सल्हेश नाच, भाव-भगैत, लोरिकायन, विदापत नाच, आदिक समावेश करैत समस्त मैथिलीभाषी जनमानस केर संग लय एकटा भव्य नगर-परिक्रमा आर हस्तकला-शिल्पकला-चित्रकला प्रदर्शनी, पुस्तक प्रदर्शनी, घरेलू उत्पादक बिक्री-वितरण संग विभिन्न सामूहिक उपक्रम केर सङ्गोर करैत कतहु २-दिवसीय वा एको-दिवसक विद्यापति स्मृति समारोह वा मिथिला विभूति स्मृति महोत्सव आदिक आयोजन करैत छी तऽ एकर दूरगामी प्रभाव अहाँक समाज आ सन्तति पर बहुत सकारात्मक ढंग सँ पड़त।
 
हरिः हरः!!