मैथिली मे मनोरंजनक विकल्प बढेबाक आवश्यकता, धार्मिक-सांस्कृतिक झाँकीक प्रयोग आरम्भ

मधुबनी, २५ सितम्बर, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!!

अश्लीलता-फूहड़ता सँ मिथिला समाज केँ बचेबाक लेल मैथिली मे विकल्प चाही – उद्घोषक प्रवीण सोनू

जतय एक दिश सामाजिक संजाल सँ धरातलीय विभिन्न अभियान मार्फत मिथिला समाज आ बाजार सँ अश्लील-फूहड़ भोजपुरी, हिन्दी, मैथिली गीत सभक विरोध निरन्तरता मे अछि ताहि ठाम गीतकार-कलाकार लोकनि सेहो विकल्प बढेबाक दिशा मे राति-दिन एक कएने छथि। एहने एक गोट नव अभियान लय केँ मनमोहक आर्ट ग्रुप दिल्ली सँ मिथिला आबि रहला अछि।
 
सचिन कुमार केर नेतृत्व मे दिल्ली सँ विशेष प्रशिक्षण लय केँ मिथिलाक्षेत्र मे धार्मिक झाँकी आदिक प्रस्तुति दैत लोकमनोरंजनक नव विधा आरम्भ होयबाक समाचार मैथिली मंच उद्घोषक प्रवीण सोनू करौलनि अछि। ओ कहलनि अछि जे एहि बेर दुर्गा पूजाक सुअवसर पर अश्लीलता-फूहड़ताक विरुद्ध मिथिलाक गायक-कलाकार लोकनि सेहो यथासंभव प्रयास करता जे आयोजनकर्ताक जिद्द केँ धार्मिक झाँकी आदि सँ प्रतिस्थापित करैत मनोरंजन, हास्य, व्यंग्य, नृत्य, गीत आदि प्रस्तुत कयल जाय।
 
देवहर (बाबूबरही) मे पहिल पूजा सँ सप्तमी धरि नित्य संध्या साढे पाँच बजे सँ साढे सात बजे धरि एहि तरहक प्रस्तुति देखायल जेबाक जनतब करबैत श्री सोनू कहलनि जे दिल्लीक कलाकार लोकनि द्वारा एहि तरहक शुरुआत सँ आगामी समय मे मिथिलाक्षेत्रक विद्यालय व कलाकार लोकनि केँ सेहो नृत्य-झाँकी आदि तैयार करबाक प्रेरणा भेटतनि। एहि तरहें मिथिलाक बाजार पर हावी भऽ रहल अश्लील-फूहड़ गीत आ नृत्यक मात्रा मे कमी आओत। मनमोहक आर्ट ग्रुप केर संचालक सचिन कुमार केर भावना ईहो छन्हि जे भविष्य मे एहि तरहक प्रशिक्षण देबाक जरूरत होयत तँ ताहू लेल समय देल जा सकत।
 
कुल ८ गोटा कलाकारक समूह द्वारा श्री राधा-कृष्ण रासलीला, बसहा-भूतक संग शिवजीक विवाह लेल बरियाती, महाकाल अघोरी बाबाक झाँकी, माँ कालीक लीला, राम दरबार, सुदामा-कृष्ण मिलन आदि विभिन्न तरहक झाँकी देखाओल जाइत अछि। एहि तरहक झाँकी सँ जतबा मनोरंजन होएत छैक ओतबा आध्यात्मिक ज्ञान सेहो होइत छैक। एकर सकारात्मक प्रभाव समाज केँ आगू बढायत।
 
उद्घोषक सोनू मैथिली गीतकार, कलाकार सब सँ सेहो आग्रह करैत कहलनि अछि जे एहि तरहक झाँकी लेल पार्श्व ध्वनि आ नृत्य आदिक लायक गीत-संगीतक निर्माण मे बेसी सँ बेसी ध्यान लगेला सँ मंचीय प्रस्तुति मे विकल्प बढत आर पब्लिक केँ मैथिली मनोरंजन मे पर्याप्त आयटम भेटला सँ अवश्यंभावी अश्लीलता-फूहड़ता सँ समाज केँ जोगायल जा सकैत अछि। सिर्फ फेसबुक पर आह्वान कय लेला सँ यथार्थ धरातलीय परिवर्तन होयब संभव नहि, तखन तऽ दुनिया छैक सेल्फी खींचाकय पोस्ट कय लेला सँ अपन मोन प्रसन्न, किछु लाइक्स आ कमेन्ट्स भेटि गेला सँ आरो आनन्द-आनन्द… तेकरा के रोकत। लेकिन धरातलीय परिवर्तन लेल ई आवश्यक अछि जे दुनियाक बढैत डेग संग मैथिली भाषा-साहित्य, कला, गीत-संगीत-नृत्य-नाटक आदि बढत तऽ एकर समुचित विकास हेब्बे करत।
 
हरिः हरः!!