रामचरितमानस मोतीः श्री रामजी आगू चललाह, विराध वध और शरभंग प्रसंग
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री रामजी आगू चललाह, विराध वध और शरभंग प्रसंग १. अत्रि मुनिक चरणकमल मे प्रणाम करैत देवता, मनुष्य आ मुनि लोकनिक स्वामी श्री रामजी दोसर वन लेल चलि पड़लाह। आगू श्री रामजी छथि आर हुनका पाछू छोट भाइ लक्ष्मणजी छथि। दुनू गोटे मुनि समान सुन्दर वेष बनौने अत्यन्त … रामचरितमानस मोतीः श्री रामजी आगू चललाह, विराध वध और शरभंग प्रसंग






