रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक लक्ष्मणजी केँ बुझेनाय आ भरतजीक महिमा कहनाय
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री रामजीक लक्ष्मणजी केँ बुझेनाय आ भरतजीक महिमा कहनाय १. देववाणी सुनिकय लक्ष्मणजी सकुचा गेलाह। श्री रामचंद्रजी आर सीताजी हुनकर आदर सँ सम्मान कयलनि आर कहलनि – “हे तात! अहाँ बहुत सुन्दर नीति कहलहुँ। हे भाइ! राज्यक मद सब सँ कठिन मद थिक। जे साधु लोकनिक सभाक सेवन … रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक लक्ष्मणजी केँ बुझेनाय आ भरतजीक महिमा कहनाय

