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प्रवीण नारायण चौधरी

हँसनाय मना नहि अछि, लेकिन बातो बुझब जरूरी छैक: व्यंग्य प्रसंग संग्रह

एक दर्जन व्यंग्य प्रसंग  – प्रवीण नारायण चौधरी १. व्यंग्य प्रसंग – १  “मैख गेलहुँ! मैख गेलहुँ!! तिनू ठाँ मैख गेलहुँ!!” घूरन झा चिकरैत-भोकरैत अचानक मिलन विहार चौक पर दिल्ली मे लोक सब केँ सोर करय लगलाह। बगले मे फूदन मोची जे हुनकर जुत्ता डेली चमकाबैत छल ओ बाजि उठल, “यौ घूरन बाबु! अहाँक जुत्ता हँसनाय मना नहि अछि, लेकिन बातो बुझब जरूरी छैक: व्यंग्य प्रसंग संग्रह

कि मिथिलाक कोनो विद्वान् शोधकर्ताकेँ राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान भेटल छन्हिः जिज्ञासा

एक आर जिज्ञासा….   डाक्टरेट करबाक हिम्मत कोनो नव विन्दु पर अन्वेषण – शोध सँ बुझल जाएत अछि। कोर्स केर किताब मे पढायल गेल बहुत रास प्रसिद्ध वैज्ञानिक लोकनिक महत्वपूर्ण शोध मोन पड़ि रहल अछि। तहिना वर्तमान समय सेहो अपने कतेको रास मित्र द्वारा शोध पूरा कयला उत्तर थेसिस लिखिकय प्रस्तुत केला उत्तर हुनका पीएचडी कि मिथिलाक कोनो विद्वान् शोधकर्ताकेँ राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान भेटल छन्हिः जिज्ञासा

संस्कृत नीति श्लोक भाग १ – अर्थ सहित – अत्यन्त पठनीय आ मननीय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी बाल्यकाल मे संस्कृत पाठ सँ बहुत रास जीवनोपयोगी नैतिक शिक्षा भेटैत रहल अछि। प्राचीन परंपरा मे शिक्षाक अवधारणा संस्कृत केर समुचित ज्ञान होएत छल। कालान्तर मे देशक राजनीतिक स्थिति-परिस्थिति जेहेन बनैत गेल – तहिना आधुनिक शिक्षा प्रणालीक प्रवेश भेल ताहि मे संस्कृतक महत्व कतहु न कतहु पाछू छूटल अछि। एकर संस्कृत नीति श्लोक भाग १ – अर्थ सहित – अत्यन्त पठनीय आ मननीय

युवा प्रतिभा एस. के. मैथिल आर मातृभाषा मैथिली प्रति समर्पण ओ सेवाक अनुपम दृष्टान्त

व्यक्तित्व परिचयः युवा सर्जक एस. के. मैथिल मातृभाषा मैथिली लेल जैड़ पटेबाक काज मे नेपालक मिथिलाक योगदान भारतक मिथिला सँ बहुतो मामिला मे भिन्न आ श्रेष्ठ छैक। भिन्न एहि लेल जे भारत मे जातिवादी नेतागिरी मे लागल कुटिचालि कयनिहार अगुआ द्वारा मैथिली केँ सेहो उच्च जातिक भाषा कहिकय दुष्प्रचार कयल गेलैक जाहि सँ बहुल्यजन मैथिल युवा प्रतिभा एस. के. मैथिल आर मातृभाषा मैथिली प्रति समर्पण ओ सेवाक अनुपम दृष्टान्त

नवकी कनियाँक नवका बात

गीतः – प्रवीण नारायण चौधरी   एक घर के कथा यौ भैया – लड़ैत दुइ दियादिनीक बात नहि विस्मय जे घर-घरके – टटका एहने हाल!! बड़की बुझाबथि छोटकी दियादिनी, पर्दा प्रथा आ लाज छोटकी मचैककय देथि जबाब जे, ई नहि लागत पार!!   आर छोटकी केना सम्हरल जबाब देली से सुनियौ…   साड़ी भारी नहि नवकी कनियाँक नवका बात

मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल मार्च १६ सँ १८ धरि दिल्ली मे आयोजन करबाक संभावना

जनवरी २०, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली लेखक संघ केर अध्यक्ष विनोद कुमार झा जनतब दैत कहलनि जे पैछला वर्ष आकस्मिक दुर्घटना मे पड़ि जेबाक कारण छूटल आयोजन “मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल” एहि वर्ष बिहारक राजधानी पटनाक बदला देशक राजधानी दिल्ली मे संभावित तिथि १६ सँ १८ मार्च धरि आयोजित कयल जायत। विदित हो जे विशुद्ध भाषिक मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल मार्च १६ सँ १८ धरि दिल्ली मे आयोजन करबाक संभावना

मैथिली मातृभाषा प्रशिक्षण अभियान, मिथिलाक लोकक कल्याणक विशुद्ध सूत्र

विशेष सम्पादकीय अपन भाषाक महीन बात – तकनीक सिखेबाक संग-संग मिथिलाक अपन इतिहास पर छात्र समूह केँ प्रशिक्षण – मैथिली-मिथिला विकासक विशुद्ध सूत्र अनेकों षड्यन्त्र आ इतिहास केँ कलंकित करयवला राजनीतिक दाँव-पेंच मे फँसल जनकक मिथिला आइ भूगोल सँ मेटायल अवस्था मे अछि – एतुका भाषा आ लिपि सेहो मेटेबाक लेल कतेको रास कूचक्र स्वयं मैथिली मातृभाषा प्रशिक्षण अभियान, मिथिलाक लोकक कल्याणक विशुद्ध सूत्र

मिथिला मे ज्वालामुखी भगवती एबाक कथाः जिज्ञासा

एकटा आरो जिज्ञासा….. मिथिला मे ज्वालामुखी भगवतीक आगमन लखतराज पाण्डे समान अगाध भक्तक कारण भेल। तहिना मिथिला मे ज्वाला माई केर पूजा विधान मे ‘पीर बाबा’ कहिकय एकटा मुसलमान फकीर केँ सेहो मायक असीम भक्त मानिकय इस्लामिक परंपरा सँ बलि-प्रदान दैत देखलहुँ। ज्वाला माई जाहि कोनो मैथिल ब्राह्मण परिवारक कुलदेवी छथि हुनका सब केँ ई मिथिला मे ज्वालामुखी भगवती एबाक कथाः जिज्ञासा

विद्वान् आ शोधकर्ताक खोज, एक आम अपील

अपील   समस्त मैथिल जनमानस!   मिथिलाक समग्र विकास आ समाजक प्रगतिक संग एहि अत्यन्त प्राचीन सभ्यताक दूरगामी संरक्षण लेल कार्यरत जाग्रत मैथिल अभियानी लोकनिक अगुवाई मे हम सब दरभंगा मे सेमिनार राखि रहल छी। विद्वान् चाही १० गो जे मिथिलाक आर्थिक उपेक्षा आ लोकपलायन रोकबाक उपाय पर कार्यपत्र राखि विमर्श केँ आरम्भ करैथ। १० विद्वान् आ शोधकर्ताक खोज, एक आम अपील

फेसबुक चमत्कारः गंगासागर मेला मे हेरायल माय भेट गेली, काफी संघर्षक बाद पहुँचि सकलीह घर

कोलकाता/जनकपुर – जनवरी १८, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! सामाजिक संजालक उपयोगिता एक बेर फेर अपन उत्कृष्ट मानव सेवा करबाक नियति सिद्ध कय सकल, जखन गंगासागर केर मेला मे अपन संगी-साथी ग्रामीण तीर्थयात्री सबसँ संग छूटल लगभग ६८ वर्षीया मिथिलानी केर परिजन धरि समाद पहुँचि सकल। बहुत संघर्ष केला उपरान्त ओ पीड़िता आइ चारिम दिन अपन जेठ फेसबुक चमत्कारः गंगासागर मेला मे हेरायल माय भेट गेली, काफी संघर्षक बाद पहुँचि सकलीह घर