हँसनाय मना नहि अछि, लेकिन बातो बुझब जरूरी छैक: व्यंग्य प्रसंग संग्रह
एक दर्जन व्यंग्य प्रसंग – प्रवीण नारायण चौधरी १. व्यंग्य प्रसंग – १ “मैख गेलहुँ! मैख गेलहुँ!! तिनू ठाँ मैख गेलहुँ!!” घूरन झा चिकरैत-भोकरैत अचानक मिलन विहार चौक पर दिल्ली मे लोक सब केँ सोर करय लगलाह। बगले मे फूदन मोची जे हुनकर जुत्ता डेली चमकाबैत छल ओ बाजि उठल, “यौ घूरन बाबु! अहाँक जुत्ता … हँसनाय मना नहि अछि, लेकिन बातो बुझब जरूरी छैक: व्यंग्य प्रसंग संग्रह









