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प्रवीण नारायण चौधरी

लव मैरिज कियै बढि गेल – दहेज लेबाक दुष्परिणाम एहि लोक सँ परलोक धरि की

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी स्वर्णलता दीदीक समाद   आइ मैसेन्जर चेक करबाक क्रम मे भोरे-भोर जे सन्देश देखलहुँ ताहि पर केन्द्रित छी। स्वर्णलता दीदी लिखली अछि, “आइ लव-अरेंज विवाह बहुत भय रहल अछि अहि के परिप्रेक्ष्य में किछु विचार दियौ और झुठे लोक दहेज के रोना क रहल छैथ ई कोना अहि लोक और लव मैरिज कियै बढि गेल – दहेज लेबाक दुष्परिणाम एहि लोक सँ परलोक धरि की

ओ प्रदूषण जे शहर सँ गाम धरि पहुँचि गेल

ओ प्रदूषण जे शहर सँ गाम तक पहुँचि गेल   हिन्दी मे एकटा कहावत बड़ा लोकप्रिय – घर की मुर्गी दाल बराबर… मिथिलावासी लेल अपनहि भाषा तुच्छ-नीच होइत छन्हि तेँ ई कहावत केँ ई सब बाकायदा अपन जीवन मे अपना लेने छथि। हमरो ई कहावत के बदला ‘बारीक पटुआ तीत’ प्रयोग करबाक चाहैत छल, लेकिन ओ प्रदूषण जे शहर सँ गाम धरि पहुँचि गेल

रामचरितमानस मोतीः श्री सीताराम-धाम-परिकर वन्दना

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती   ९. श्री सीताराम-धाम-परिकर वन्दना रामायणरूपी महाकाव्य केर रचना करबाक अगम-अथाह कार्य केँ शुरू करबा सँ पहिने महाकवि तुलसीदास द्वारा वन्दना करबाक क्रम जारी अछि। आइ श्रीसीताराम-धाम परिकर केर वन्दना प्रस्तुत अछि।   १. हम अति पवित्र श्री अयोध्यापुरी और कलियुग केर पाप सब केँ नाश करयवाली श्री रामचरितमानस मोतीः श्री सीताराम-धाम-परिकर वन्दना

रामचरितमानस मोतीः वाल्मीकि, ब्रह्मा आ शिव-पार्वतीक विशेष वन्दना

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती ८. वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, देवता, शिव, पार्वती आदिक वंदना   अध्याय ७म केँ निरन्तरता दैत महाकवि तुलसीदासजी ‘रामायण’ रूपी अद्भुत-उपयोगी ज्ञान आ सम्मत लेल सम्बन्धित विभिन्न स्रष्टा आ सृजनकर्मी लोकनि केँ विशेष प्रणाम करैत किछु विशेष सन्देश दय रहला अछि। जेना रामायण मे खरदुषण रहितो ई खर आ रामचरितमानस मोतीः वाल्मीकि, ब्रह्मा आ शिव-पार्वतीक विशेष वन्दना

शाश्वत मिथिला अहमदाबाद द्वारा १ मई केँ होयत गुजरात मिथिला महोत्सव

अहमदाबाद, २८ मार्च २०२२ । मैथिली जिन्दाबाद!! शाश्वत मिथिला फाउन्डेशन अहमदाबाद केर अध्यक्ष ललित झा जानकारी दैत कहलनि अछि जे १ मई २०२२ केँ फाउंडेशन तथा माँ जानकी सेवा समिति केर संयुक्त संयोजन मे ‘गुजरात मिथिला महोत्सव’क आयोजन कयल जायत। एहि लेल काल्हि २७ मार्च २०२२ अहमदाबाद मे एक बैसार सम्पन्न भेल अछि। बैसार द्वारा शाश्वत मिथिला अहमदाबाद द्वारा १ मई केँ होयत गुजरात मिथिला महोत्सव

रामचरितमानस मोतीः कवि वंदना

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती ७. कवि वंदना   तुलसीकृत रामचरितमानस सँ मोती चुनबाक क्रम मे आइ सातम पायदान पर आबि गेल छी। देवता लोकनि केँ प्रणाम करबाक प्रथम पायदान केर गिनती हम एहि मे नहि समेटलहुँ कारण ओ परम अनिवार्य रहितो केवल आस्थावान् लेल होइत अछि। जेना तुलसीदासजी सरस्वती, गणेशजी आ स्वयं रामचरितमानस मोतीः कवि वंदना

६ सँ ८ अप्रैल जनकपुरधाम साहित्य, कला तथा नाट्य महोत्सव २०७८ केर आयोजन

जनकपुरधाम, २८ मार्च २०२२। मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली विकास कोष जनकपुर द्वारा आगामी ६ सँ ८ अप्रैल २०२२ (२३ सँ २५ गते २०७८) तीन दिवसीय जनकपुरधाम साहित्य, कला तथा नाट्य महोत्सव २०७८ केर आयोजन कयल जायत। ई जानकारी मैथिली विकास कोष केर अध्यक्ष जीवनाथ चौधरी करौलनि अछि। ओ कहलनि जे राजा जनकक विमर्श स्थल प्राचीन मिथिलाक ६ सँ ८ अप्रैल जनकपुरधाम साहित्य, कला तथा नाट्य महोत्सव २०७८ केर आयोजन

मनायल गेल मनोरंजन झा स्मृति दिवस सहरसा मे

सहरसा, २८ मार्च २०२२ । सुभाषचंद्र झा, सहरसा। मनायल गेल मनोरंजन झा स्मृति दिवस सहरसा मे मैथिली आ हिन्दी साहित्यक ओजस्वी प्रखर वक्ता जनकवि छलाह डाॅ मनोरंजन झा, हुनक नाम सँ विश्वविद्यालय मे चेयर केर स्थापना कयल जायः प्रो. केष्कर ठाकुर   सहरसाक पीजी सेंटर पश्चिम परिसर मे रवि दिन मैथिली सहित अन्यान्य भाषाक प्रकांड मनायल गेल मनोरंजन झा स्मृति दिवस सहरसा मे

हाइ के जवाब बाइ?

‘हाइ’ के जवाब ‘बाइ’ (निजी विचार) – प्रवीण नारायण चौधरी सच बात ई छैक जे हमरो कियो ‘हाइ’ कहिते ओकरा तुरन्त हम ‘बाइ’ कहि देल करी, आइयो कहि दैत छी। कियैक? कारण पता अछि? ‘हाइ’ शब्द आधुनिक युग मे वार्तारम्भक अभिवादन थिकैक, लेकिन एहि शब्दक छाप हमर मन-मस्तिष्क मे फिल्मी अभिवादन जेकाँ पड़ि गेल। एहेन हाइ के जवाब बाइ?

रामचरितमानस मोतीः तुलसीदासजी केर दीनता और राम भक्तिमयी कविताक महिमा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती ६. तुलसीदासजी केर दीनता और राम भक्तिमयी कविताक महिमा   एहि सँ पूर्व केर कुल ५ अलग-अलग शीर्षक अन्तर्गत आ प्रथम दिवसक ईश-वन्दना करैत महाकवि तुलसीदास स्वयं केँ सभक दास होयबाक भाव सँ हुनका सब केँ कृपाक खान अपने सब कियो मिलिकय छल छोड़िकय हमरा पर कृपा करू, रामचरितमानस मोतीः तुलसीदासजी केर दीनता और राम भक्तिमयी कविताक महिमा