एक विशुद्ध मैथिली कथा जेकर भाव शायद सब बुझि सकी!!
कथा – प्रवीण नारायण चौधरी हूलन तहिया आ आइ (कथा) भोरे-भोरे भरि देह माटि-गर्दा सँ लेटायल, मात्र एकटा विष्ठी पहिरने हुलना केँ बेर-बेर उठैत, बरबराइत आ ओंघराइत देखि लोक सब क्षुब्ध अवस्था मे छल। हुलना या त भगता के भगल कय रहल छल, या ओ कोनो नशा मे पागल भ’ गेल छल, या फेर आरे … एक विशुद्ध मैथिली कथा जेकर भाव शायद सब बुझि सकी!!





