हिन्दू संस्कृतिक स्वरूपः अवतारवाद
मूल लेखकः श्री जयदयाल गोयन्दका अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी अवतारवाद भगवान् श्रीराम, श्रीकृष्ण साक्षात् पूर्णब्रह्म परमात्मा थिकाह, ई विश्वास हिन्दू जातिक लोक मे प्रायः हमेशा सँ चलैत आबि रहल अछि। ई युक्तियुक्त आ उचितो अछि। निर्गुण-निराकार रूप सच्चिदानन्दघन परमात्मा अपने सगुण-साकाररूप मे प्रकट होइत छथि, जेना आकाश मे परमाणुरूप सँ स्थित जल पहिने बादल केर … हिन्दू संस्कृतिक स्वरूपः अवतारवाद








