रामचरितमानस मोतीः भरत-कौसल्या संवाद और दशरथजीक अन्त्येष्टि क्रिया
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरत-कौसल्या संवाद और दशरथजीक अन्त्येष्टि क्रिया १. कौसल्याजी मैल वस्त्र पहिरने छथि, चेहराक रंग बदलल छन्हि, व्याकुल भ’ रहल छथि, दुःखक बोझ सँ शरीर सुखा गेल छन्हि। एना देखाइत छथि जेना सोनाक सुन्दर कल्पलताक वन मे पाला मारि देने होइक। भरत केँ देखिते माता कौसल्याजी उठि दौड़लीह। लेकिन … रामचरितमानस मोतीः भरत-कौसल्या संवाद और दशरथजीक अन्त्येष्टि क्रिया



