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प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्‌जी केर लंका केँ प्रस्थान, सुरसा सँ भेंट, छाया पकड़यवाली राक्षसी केर वध

मैथिली सुन्दरकाण्ड – श्री तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद हनुमान्‌जी केर लंका केँ प्रस्थान, सुरसा सँ भेंट, छाया पकड़यवाली राक्षसी केर वध चौपाई : जामवंत के वचन सोहेलनि। सुनि हनुमंतक चित्त रमेलनि॥ ता धरि तूँ सब रुकिहें भाइ। रहिहें दुःखे कंद मूल फल खाइ॥१॥ भावार्थ : जाम्बवान्‌ केर सुंदर वचन सुनिकय हनुमान्‌जी केर हृदय मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्‌जी केर लंका केँ प्रस्थान, सुरसा सँ भेंट, छाया पकड़यवाली राक्षसी केर वध

मैथिली सुन्दरकाण्ड – मंगलाचरण

श्री तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्ड केर मैथिली अनुवाद अनुवादकः प्रवीण नारायण चौधरी प्रेरकः मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकार ‘लेखक रमेश’  शेष सम्पूर्ण कृपा श्री सीताराम व श्री गौरीशंकर संग स्वयं पवनसुत हनुमानजी छथि। महाकवि तुलसीदास प्रति पूर्ण श्रद्धा आ समर्पण संग हुनक गुण-धर्मक अंश मात्र भेटि जाय अपने पाठक लोकनि केँ, यैह सोचि ई ‘मैथिली सुन्दरकाण्ड’ मैथिली सुन्दरकाण्ड – मंगलाचरण

मैथिली सुन्दरकाण्ड – समुद्र पर श्री रामजीक क्रोध आर समुद्रक विनती – श्री राम गुणगानक महिमा

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद समुद्र पर श्री रामजी केर क्रोध और समुद्र केर विनती, श्री राम गुणगान केर महिमा दोहा : विनय नै मानय जलधि जड़ गेल तीनि दिन बीति। बजला राम सकोप तखन भय बिनु होय न प्रीति॥५७॥ भावार्थ:- एम्हर तीन दिन बीत गेल, मुदा जड़ समुद्र विनय मैथिली सुन्दरकाण्ड – समुद्र पर श्री रामजीक क्रोध आर समुद्रक विनती – श्री राम गुणगानक महिमा

कि अहाँ सेहो मैथिली पत्रकार बनय चाहि रहल छी?

“मैथिली जिन्दाबाद पर सीधा लेखन लेल आफर”   दहेज मुक्त मिथिला समूह पर एक सँ बढिकय एक लेखिका आ लेखक सब केँ देखि मैथिली भाषा-साहित्य जगत मे काफी उत्साह अछि। फेसबुक पर लिखल लेख सब छिड़िया जेबाक खतरा अछि, बहुत लोक अपनहि पुरान लेख केँ ताकियो नहि पबैत छथि। एहि समस्याक समाधान लेल वेबसाइट पर कि अहाँ सेहो मैथिली पत्रकार बनय चाहि रहल छी?

मैथिली सुन्दरकाण्डः दूत शुक द्वारा रावण केँ समझेनाय तथा लक्ष्मणजीक सन्देश देनाय

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद दूत शुक द्वारा रावण केँ समझेनाय तथा लक्ष्मणजीक सन्देश देनाय दोहा : कि भेल भेंट कि फिरि गेला श्रवण सुयश सुनि मोर। कहे न रिपु दल तेज बल बहुत चकित चित तोर ॥५३॥ भावार्थ:- हुनका सँ तोहर भेंटो भेलौक या ओ सब हमर सुयश सुनिकय मैथिली सुन्दरकाण्डः दूत शुक द्वारा रावण केँ समझेनाय तथा लक्ष्मणजीक सन्देश देनाय

कवि प्रणव नार्मदेय केँ श्रद्धांजलि अर्पित करबाक लेल दरभंगा में सभा

19 जनवरी 2021, मैथिली जिन्दाबाद!! कवि प्रणव नार्मदेय केर काल्हि भेल असामयिक निधन सँ आहत मैथिलीप्रेमी व साहित्य जगत द्वारा लगातार शोक संवेदना प्रकट कयल जा रहल अछि। एहि क्रम में लेखक रमेश द्वारा फेसबुक सँ देल गेल जानकारी निम्न अछि। *मैथिली सृजन, दरभंगा* आइ दिनांक 19 जनवरी 2021 केँ मैथिली सृजन, दरभंगा द्वारा मैथिलीक कवि प्रणव नार्मदेय केँ श्रद्धांजलि अर्पित करबाक लेल दरभंगा में सभा

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्रीरामजी द्वारा समुद्र सँ रास्ता देबाक लेल प्रार्थना – लक्ष्मणजी द्वारा रावण लेल शुक मार्फत सन्देश

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद समुद्र पार करबाक लेल विचार, रावणदूत शुक केर एनाय और लक्ष्मणजी केर पत्र केँ लैत वापस जेनाय सुनु कपीश लंकापति वीर। कुन विधि तरब जलधि गंभीर॥ संकुल मगर साँप मत्स जाति। अति अगाध दुस्तर सब भाँति॥३॥ भावार्थ:- हे वीर वानरराज सुग्रीव और लंकापति विभीषण! सुनू, मैथिली सुन्दरकाण्डः श्रीरामजी द्वारा समुद्र सँ रास्ता देबाक लेल प्रार्थना – लक्ष्मणजी द्वारा रावण लेल शुक मार्फत सन्देश

मैथिलीक चर्चित युवा कवि प्रणव नार्मदेय केर दुखद निधन पर प्रवीण श्रद्धाञ्जलि सुमन अर्पित

१९ जनवरी २०२१ – मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हि १८ जनवरी २०२१ सन्ध्या साढे ५ बजे करीब काशी मे उपचाररत कवि प्रणव नार्मदेय केर दुखद निधन भऽ गेलनि। सोशल मीडिया मे ई खबरि समस्त मैथिली साहित्य जगत केँ मर्माहत कय देलक आ देर राति धरि लोक अपन-अपन स्मृति आ कवि नार्मदेय केर मार्मिक रचना सभ शेयर करैत मैथिलीक चर्चित युवा कवि प्रणव नार्मदेय केर दुखद निधन पर प्रवीण श्रद्धाञ्जलि सुमन अर्पित

एनआरएनए केर आयोजन प्रवासी प्रवाह – 33म भाग मैथिली पर भव्यता सँ सम्पन्न

18 जनवरी 2021, मैथिली जिन्दाबाद!! प्रवासी प्रवाह केर 33म श्रृंखला में मैथिली कवि सम्मेलन गैर आवासीय नेपाली संघ केर भाषा, साहित्य, संस्कृति तथा सम्पदा प्रबन्धन समिति द्वारा ‘प्रवासी प्रवाह’ बहुचर्चित धारावाहिक कार्यक्रम केर 33म श्रृंखला में नेपालक दोसर सर्वाधिक बाजल जायवला राष्ट्रीय भाषा मैथिली पर केन्द्रित रहल। संघक संस्थापक अध्यक्ष डॉ उपेन्द्र महतो (रूस) केर एनआरएनए केर आयोजन प्रवासी प्रवाह – 33म भाग मैथिली पर भव्यता सँ सम्पन्न

तेज काकी (हास्य कथा)

कथा – दीपिका झा एकटा काकी छली। ओ स्वभाव स कनी तेज छलखिन। एक दिन हुनकर घरक बगल में एकटा दुल्हा बाली काकी रहै छलखिन। ओ अंगना एलखिन आ कहलखिन – “बहिन यै! यै बड़ सुन्दर रमलिला होइ छै, फल्ला चिल्ला जाइ छै। ईहो चलती?” “गे माय, हम कोना जैब? हम सैं-बेटा तर में छी। तेज काकी (हास्य कथा)