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प्रवीण नारायण चौधरी

कहीं हमहुँ-अहाँ एहि रोग केर शिकार त नहि?

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी #वाणीसूल_बीमारी काफी समय अध्ययन सँ एक विशेष तरहक रोग केर पता चलल, एहि रोग केर नाम छी ‘वाणीसूल’। जेना सूलवाइह (डिसेन्ट्री) पेट के रोग छी तहिना निज भाषा छोड़ि आन भाषा अपनेनिहार मे वाणी बदलबाक कारण वाणीसूल नामक रोग होइत छैक। एहि रोग मे अपनहि वाणी सँ आत्मीयता समाप्तिक दोष कहीं हमहुँ-अहाँ एहि रोग केर शिकार त नहि?

सोहन बाबूक दुइ पीढीक यथार्थ – तेसर पीढी मे कि होयत से कल्पनातीत अछि

दहेज प्रथा के साइड ईफेक्ट्स – प्रवीण नारायण चौधरी (ई एक काल्पनिक कथा थिक। प्रतिनिधित्व सच्चाई केर करैत अछि। यदि किनको सँ मेल खाय त केवल संयोग बुझब।) मोहन बाबू चारि भैयारी छलाह। चारू भाइ एक सँ बढिकय एक पढल लिखल। चारू गोटे नौकरी मे, चारूक धियापुता बहुत संस्कारी आ पढाई-लिखाई मे बढनमा। ई लोकनि सोहन बाबूक दुइ पीढीक यथार्थ – तेसर पीढी मे कि होयत से कल्पनातीत अछि

किछु महत्वपूर्ण मंत्र – जीवनोपयोगी साधना मंत्र जाप सँ सिद्धि लेल सर्वोपयोगी

विभिन्न शास्त्र आ धर्म (यथा हिन्दू, जैन, बौद्ध आदि) मे उपयोग मे रहल व्यवहारिक मंत्रक संकलन १. गणपति स्तुति सरागिलोकदुर्लभं विरागिलोकपूजितं सुरासुरैर्नमस्कृतं जरापमृत्युनाशकम् । गिरा गुरुं श्रिया हरिं जयन्ति यत्पदार्चकाः नमामि तं गणाधिपं कृपापयः पयोनिधिम् ॥ १॥ गिरीन्द्रजामुखाम्बुज प्रमोददान भास्करं करीन्द्रवक्त्रमानताघसङ्घवारणोद्यतम् । सरीसृपेश बद्धकुक्षिमाश्रयामि सन्ततं शरीरकान्ति निर्जिताब्जबन्धुबालसन्ततिम् ॥ २॥ शुकादिमौनिवन्दितं गकारवाच्यमक्षरं प्रकाममिष्टदायिनं सकामनम्रपङ्क्तये । चकासतं किछु महत्वपूर्ण मंत्र – जीवनोपयोगी साधना मंत्र जाप सँ सिद्धि लेल सर्वोपयोगी

मैथिलीभाषी जनमानस मे भाषिक जनजागरण अत्यावश्यक – समेकित अभियान शीघ्र संचालित होयत

विशेष सम्पादकीय सन्दर्भ नेपालक जनगणना २०७८ आ मैथिली भाषाक स्थिति पर सामाजिक चिन्तन विदिते अछि जे नेपालदेश मे एहि वर्ष २०२१ (विक्रम संवत साल २०७८) मे जनगणना होमय जा रहल अछि। भाषिक पहिचान केर आधार पर नेपालदेश मे नेपाली भाषाक बाद दोसर सर्वाधिक बाजल जायवला भाषा मैथिली केर छैक। पिछला जनगणनाक तथ्यांक सेहो एहि बातक मैथिलीभाषी जनमानस मे भाषिक जनजागरण अत्यावश्यक – समेकित अभियान शीघ्र संचालित होयत

एन्टा अमेरिका द्वारा सफल वेबिनार (पूर्ण प्रतिवेदन) – मैथिली केर वर्तमान अवस्था आ जनगणना-२०७८

२४ जनवरी २०२१ – मैथिली जिन्दाबाद!! एसोसिएशन औफ नेपाली तराईयन्स इन अमेरिका – एन्टा द्वारा काल्हि २३ जनवरी २०२१ नेपालक समय रात्रि ८ बजे सँ ११ः३० बजे धरिक समय मे अत्यन्त महत्वपूर्ण विषय पर उत्कृष्ट विमर्शक आयोजन कयल गेल। एन्टा एहि तरहक कार्य निरन्तर करैत आबि रहल अछि आर एहि मे मैथिली भाषा केन्द्रित विमर्श एन्टा अमेरिका द्वारा सफल वेबिनार (पूर्ण प्रतिवेदन) – मैथिली केर वर्तमान अवस्था आ जनगणना-२०७८

नेपाल आ भारत केर मैथिली लेखक-साहित्यकार बीच समन्वयक प्रयास

21 जनवरी 2021, मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली साहित्यकार सभा जनकपुर द्वारा नेपाल व भारत केर मैथिली लेखक-साहित्यकार बीच अंतरसंबंध केँ सबलता देबाक संग भाषा, साहित्य आ संस्थाक विकास में सहयोग प्राप्ति लेल भारत दिश सँ साहित्यकार डॉ धनाकर ठाकुर, डॉ शेफालिका वर्मा, डॉ जयनारायण यादव, डॉ रमानन्द झा रमण, डॉ महेन्द्र नारायण राम, मैथिल सदरे गौहर नेपाल आ भारत केर मैथिली लेखक-साहित्यकार बीच समन्वयक प्रयास

सुन्दरकाण्ड मैथिली मे – तुलसीकृत रामचरितमानस केर मैथिली स्वरूप

सुंदरकाण्ड सुंदरकाण्ड मे हनुमानजी लंका लेल प्रस्थान, लंका दहन सँ लंका सँ वापसी तक केर घटनाक्रम अबैत अछि। नीचाँ सुंदरकाण्ड सँ जुड़ल घटनाक्रम केर विषय सूची देल गेल अछि। अहाँ जाहि घटनाक्रमक सम्बन्ध मे पढ़य चाहैत छी ओकर लिंक पर क्लिक करू। मंगलाचरण हनुमान्‌जी केर लंका केँ प्रस्थान, सुरसा सँ भेंट, छाया पकड़यवाली राक्षसी केर सुन्दरकाण्ड मैथिली मे – तुलसीकृत रामचरितमानस केर मैथिली स्वरूप

मैथिली सुन्दरकाण्डः रावण केँ विभीषण केर बुझेनाय और विभीषणक अपमान

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद रावण केँ विभीषण केर बुझेनाय और विभीषणक अपमान दोहा : सचिव बैद गुरु तीनि जौं प्रिय बाजथि भय आश राज धर्म तन तीनि केर होय बेगिहीं नाश॥३७॥ भावार्थ:- मंत्री, वैद्य और गुरु – ई तीन यदि (अप्रसन्नता केर) भय या (लाभ केर) आशा सँ (हित मैथिली सुन्दरकाण्डः रावण केँ विभीषण केर बुझेनाय और विभीषणक अपमान

मैथिली सुन्दरकाण्डः मंदोदरी-रावण संवाद

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद मंदोदरी-रावण संवाद चौपाई : ओम्हर निशाचर रहय सशंका। जहिया सँ जरा गेला कपि लंका॥ निज निज गृह सब करय विचारा। नहि निशिचर कुल केर उबारा।१॥ भावार्थ:- ओम्हर (लंका मे) जहिया सँ हनुमान्‌जी लंका केँ जराकय गेलाह, तहिया सँ राक्षस सब भयभीत रहय लागल। अपना-अपना घर मैथिली सुन्दरकाण्डः मंदोदरी-रावण संवाद

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री रामजीक वानर सेना संग चलिकय समुद्र तट पर पहुँचब

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद श्री रामजीक वानर सेना संग चलिकय समुद्र तट पर पहुँचब दोहा : कपिपति बेगि बजेला आयल मुख्यक झुंड। नाना वर्ण अतुल बल बानर भालु बहुत॥३४॥ भावार्थ:- वानरराज सुग्रीव शीघ्रहि वानर सभकेँ बजौलनि, सेनापति लोकनिक समूह आ गए। वानर-भालु केर झुंड अनेको रंग केर अछि और मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री रामजीक वानर सेना संग चलिकय समुद्र तट पर पहुँचब