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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः शिवजी द्वारा सतीक त्याग आ समाधि

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १६. शिवजी द्वारा सतीक त्याग, शिवजीक समाधि   रामायणक आरम्भ याज्ञवल्क्यजी द्वारा भरद्वाजजीक प्रश्न आ ताहि मे रहल किछु आशंका केँ सती माताक सन्देह आ भगवानक परीक्षा लेबाक प्रकरण सँ आरम्भ भेल अछि। सती माता द्वारा परीक्षाक स्वरूप एहेन भेल जे आब शिवजी बड़ा घोर दुविधा मे पड़ि रामचरितमानस मोतीः शिवजी द्वारा सतीक त्याग आ समाधि

मैथिली कथा “मड़ौसी”

कथा – प्रवीण नारायण चौधरी मड़ौसी   गामपर भैर गामक लोक जुटि गेल छल। कारण छलैक जे धर्बेन्द्रा ११ वर्षक अवस्था सँ जे गाम छोड़ि भागि गेल छल से केना न केना आइ गाम घुरि आयल छल। बीच अंगना मे खटिया पर ओ बैसल आ दियाद-बाद सँ लैत टोल-पड़ोसक सब लोक ओतय जमा। कियो कहय, मैथिली कथा “मड़ौसी”

रामचरितमानस मोतीः सतीक भ्रम, रामक ऐश्वर्य तथा सतीक पछताबा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १५. सतीक भ्रम, श्री रामजीक ऐश्वर्य और सतीक पछताबा आब मुनि याज्ञवल्क्य जी द्वारा भरद्वाज जी केँ हुनक प्रश्न (जिज्ञासा) जे कि श्री रामचन्द्र जी के सम्बन्ध मे सब बात फरिछाकय कहबाक लेल छल तेकर जवाब देल जा रहल अछि।   रामकथा ससि किरन समाना। संत चकोर करहिं रामचरितमानस मोतीः सतीक भ्रम, रामक ऐश्वर्य तथा सतीक पछताबा

अद्भुत गणितज्ञ रामानुजन

गणितमे भारतीय गणितज्ञक योगदान अद्भुत आ अविस्मरणीय अछि। प्राचीनकालसँ संख्या पद्धति, शून्य आ दशमलव आदि महत्वपूर्ण खोज यैहसब कयलथि। एक महान भारतीय गणितज्ञ भेलाह रामानुजन। ‘गणितज्ञहुके गणितज्ञ’ तथा ‘संख्याके जादूगर’ आदि कतेको लोकचर्चित उपाधि हिनका भेटलन्हि। ३३ वर्षक जीवनकालमे हिनकाद्वारा लगभग ५००० प्रमेयक सूत्रपात भेल अछि। हिनक शोधकाजकेँ पूर्ण व्याख्यामे पैघ-पैघ गणितज्ञ लोकनि एखनधरि जुटल अद्भुत गणितज्ञ रामानुजन

रामचरितमानस मोतीः भरद्वाज-याज्ञवल्क्य संवाद एवं प्रयाग माहात्म्य

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १४. याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद आ प्रयाग माहात्म्य   तुलसीकृत् रामचरितमानस मे रामायणक परिचय आ महत्व केर शुरुआती भाग पूरा कयलाक बाद आब श्री रामचन्द्र जीक लीला स्वरूप रामायण कथाक अवतरण दुइ महान ऋषिक आपसी संवाद सँ उतारबाक कार्य आरम्भ कयल जा रहल अछि।   १. भरद्वाज मुनि प्रयाग मे रामचरितमानस मोतीः भरद्वाज-याज्ञवल्क्य संवाद एवं प्रयाग माहात्म्य

रामचरितमानस मोतीः मानस केर रूप आर माहात्म्य

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १३. मानस केर रूप और माहात्म्य   ई रामचरितमानस जेहेन अछि, जाहि प्रकारे बनल अछि और जाहि हेतु सँ जग भरि मे एकर प्रचार भेल, ओ सब कथा हम (तुलसीदास) श्री उमा-महेश्वर केँ स्मरण कय केँ कहैत छी। श्री शिवजीक कृपा सँ हुनकहि हृदय मे सुन्दर बुद्धि केर रामचरितमानस मोतीः मानस केर रूप आर माहात्म्य

कि भारतीय राज्य केँ भाषाई आधार पर विभाजित कयल जेबाक चाही?

लेख – इन्दिरा बसु (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) स्रोतः https://www.thequint.com/news/india/linguistic-division-of-states-in-india-history कि भारतीय राज्य केँ भाषाई आधार पर विभाजित कयल जेबाक चाही? भाषाई राज्य केर मांग जारी अछि जेना कि गोरखालैंड के मांग, मिथिला राज्य केर मांग उभरय सँ स्पष्ट अछि….. वर्ष 1947 छल। भारत अधरतियाक बच्चा छल, जे हजारों क्रांतिकारी और आम लोकक संघर्ष सँ कि भारतीय राज्य केँ भाषाई आधार पर विभाजित कयल जेबाक चाही?

रामचरितमानस मोतीः मानस निर्माण केर तिथि

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १२. मानस निर्माण केर तिथि सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा॥ संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा॥२॥ आब हम आदरपूर्वक श्री शिवजी केँ माथ झुकाकय श्री रामचन्द्रजीक गुण केर निर्मल कथा कहैत छी। श्री हरिक चरणपर माथ रखिकय संवत्‌ १६३१ रामचरितमानस मोतीः मानस निर्माण केर तिथि

रामचरितमानस मोतीः श्री रामगुण और श्री रामचरित् केर महिमा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती ११. श्री रामगुण और श्री रामचरित्‌ केर महिमा रामचरितमानस मोती अन्तर्गत विगत केर १० अध्याय आ ताहि के अन्तिम मे राम केर नाम के महिमा – नाम वंदना उपरान्त आइ श्री रामचन्द्र जीक गुण आ हुनक कथा (रामचरित्) केर महिमा पर महाकवि तुलसीदास जी केर ई विलक्षण सन्देश रामचरितमानस मोतीः श्री रामगुण और श्री रामचरित् केर महिमा

रामचरितमानस मोतीः श्री नाम वन्दना तथा नाम महिमा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती रामचरितमानस मोतीः नाम वन्दना आ नाम महिमा १. श्री रघुनाथजीक नाम ‘राम’ केर वंदना करैत छी जे कृशानु (अग्नि), भानु (सूर्य) और हिमकर (चन्द्रमा) केर हेतु अर्थात्‌ ‘र’ ‘आ’ और ‘म’ रूप सँ बीज छथि। २. ओ ‘राम’ नाम ब्रह्मा, विष्णु और शिवरूप छथि। ३. ओ वेद केर रामचरितमानस मोतीः श्री नाम वन्दना तथा नाम महिमा