रामचरितमानस मोतीः कैकेइ केर कोपभवन मे प्रवेश
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती कैकेइ केर कोपभवन मे जायब १. पापिनी मन्थरा खुब नीक सँ घात लगाकय बाजल – हे रानी! अहाँ कोपभवन मे चलि जाउ। सब बात अत्यन्त सावधानी सँ बनाउ, राजा पर तुरन्ते विश्वास नहि कय लेब, हुनकर बहलायब-फुसलायब मे नहि आबि जायब। २. कुबरी केँ रानी प्राणक समान प्रिय … रामचरितमानस मोतीः कैकेइ केर कोपभवन मे प्रवेश





