सम-सामयिक मिथिला – चिन्तन
भोलबा हँसा देलक!! – प्रवीण नारायण चौधरी ओ कहैत छल जे यौ सर, मिथिला-मैथिली मे खाली बड़का-बड़का कार्यक्रमे सब होइत छैक…. कतय सँ अबैत छैक एतेक रास पैसा….. हम कहलियैक जे रौ! बच्चा!! तोरा कियैक बिसरा गेलौक जे मिथिला मे साक्षात् अयलीह सब ऋद्धि-सिद्धि केर दाता – आदिशक्ति जगदम्बा – जगज्जननी मैथिली यानि ‘सीता’; … सम-सामयिक मिथिला – चिन्तन









