रामचरितमानस मोतीः नारदजीक आयब आ स्तुति कयकेँ ब्रह्मलोक प्रस्थान
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती नारदजीक आयब आ स्तुति कयकेँ ब्रह्मलोक प्रस्थान १. ताहि अवसर पर नारदमुनि हाथ मे वीणा लेने आबि गेलाह। ओ श्री रामजीक सुन्दर आर नित्य नवीन रहयवला कीर्ति गाबय लगलाह। “कृपापूर्वक देख टा लेला सँ शोक दूर करनिहार कमलनयन! हमरहु पर कृपादृष्टि सँ देखू हे हरि! अपने नीलकमल समान … रामचरितमानस मोतीः नारदजीक आयब आ स्तुति कयकेँ ब्रह्मलोक प्रस्थान



