Search

प्रवीण नारायण चौधरी

रधिया आ शुगनी – मैथिली लघुकथा

लघुकथा – वन्दना चौधरी शुगनी दुए महीना के छेलै जखन ओकर पिता के देहांत भ गेलै अचानक। शुगनी के माय रधिया पर जेना पहाड़ टुइट पड़लै। कोना के अपना और अपना बच्चा के देखभाल करत आब अहि चिंता में छल, मुदा जीवन के ई कठोर सत्य छै और कहबी सेहो छै जे बड्ड दुःख में रधिया आ शुगनी – मैथिली लघुकथा

मालिकक खेत पर लालझंडा आ समझौता

कथा – डा. लीना चौधरी जमींदारी त खत्म भ गेल छल पर ओ अपने अपन आ बड़का भाई के हिस्सा जमींदारी अखनो बचा क रखने छला। बड़का भाई सब किछ हुनके पर छोड़ने छलखिन्ह। ओहो एक एक पाई के हिसाब क के भाई के हिस्सा देब में देर नइ करथीन। दुटा बेटा सपरिवार संग रहई मालिकक खेत पर लालझंडा आ समझौता

मिथिलाक ब्राह्मण समुदाय मत्स्य-मांस भक्षण कियैक करैत छथि?

दर्शन-विचार (पंडित महेन्द्र ठाकुर संग वार्ता पर आधारित) मिथिलाक द्विजवर्ग पर एकटा आरोप लगबैत छथि अन्यत्रक विद्वान् जे ई लोकनि मत्स्य-मांस कियैक भक्षण करैत छथि।   एहि सन्दर्भ आइ प्रखर पंडित श्री महेन्द्र ठाकुर सँ किछु शिक्षा ग्रहण करबाक अवसर भेटल। ओ कहलनिः   द्विजा: शाक्ताः सर्वेप्रोक्ताः न च शैव न वैष्णवा: गायत्री उपासन्ते च मिथिलाक ब्राह्मण समुदाय मत्स्य-मांस भक्षण कियैक करैत छथि?

सौराठ सभाक बारे गलत भ्रान्ति आ भ्रम पसारब कतेक उचितः सवाल मैथिली साहित्यकार सँ

सौराठ सभा पर ई लेख पढू….  – प्रवीण नारायण चौधरी लेख पढबाक लेल ई फोटो-शौट देखल जाउः   एहि लेख मे लेखक कुणाल सर सौराठ सभाक सिस्टम पर सवाल उठौलनि अछि। पंजी प्रथा द्वारा ब्राह्मण जाति केर अन्तर्विभाजनक बात कहलनि अछि। ताहि अन्तर्विभाजन सँ भाषाक विभाजन हेबाक तर्क सेहो देलनि अछि। आर, अपना तरहें ओकरा सौराठ सभाक बारे गलत भ्रान्ति आ भ्रम पसारब कतेक उचितः सवाल मैथिली साहित्यकार सँ

इतिहास केँ कथमपि नकारिकय आगू नहि बढी हमरा लोकनि

विश्वक एक प्राचीनतम सभ्यताक नाम थिक मिथिला। एतुका वासिन्दा केँ मैथिल राजा सँ मैथिल पहिचान भेटल। एहि ठामक समस्त परम्परा मे आध्यात्मिकताक रस बोरल भेटैछ। जीवन प्रणाली, घर-गृहस्थी, पूजा-पाठ, जन्म सँ मृत्युक बीच केर विभिन्न संस्कार – हर बात मे वेद अनुसार वर्णन कयल सिद्धान्त पर जीवन संचालित भेटैत अछि। लेकिन शनैः-शनैः एतय सेहो आध्यात्मिकताक इतिहास केँ कथमपि नकारिकय आगू नहि बढी हमरा लोकनि

कि अन्तर अछि ताहि दिन आर आइ मे – वैचारिक मंथन

तिलबिखनी, फुलिया आ सुशिलिया – प्रवीण नारायण चौधरी   “धोंछी! निरासी! गय अरगासनवाली, टाटिये पर दय एबौ।” – तिलबिखनी तामसे बिलबिलाइत एक चोत गोबर जेकरा पर आंगूर देखाकय ओ छेकि लेने रहय से जे दोसर अपन पथिया मे उठा लेलक ताहि पर बाजि उठल। गाम-समाज मे यैह अनुशासन चलैत छैक जे गोबर बिछय लेल एकटा कि अन्तर अछि ताहि दिन आर आइ मे – वैचारिक मंथन

एहेन एलै रामराज बाजब गुनाह भेल – गुमनाम फरिश्ताक मैथिली गजल

मैथिली गजल – पवन झा ‘अग्निवाण’ ऊर्फ ‘गुमनाम फरिश्ता’ एहेन एलै रामराज बाजब गुनाह भेल मूक बनल परजा के नेता घताह भेल ककरा पर दोष धरब के पतियायत जकरे पर आश धेलौं सैह मरखाह भेल एक रहित तैयो हम मोन के भुलवितौं देवता-पितर सहस्त्र पूजन अथाह भेल सत्य लगै ओल जेना झूठ लगै मिसरी जे एहेन एलै रामराज बाजब गुनाह भेल – गुमनाम फरिश्ताक मैथिली गजल

घरक औजार भोथे नीक – रूबी झा रचित लघुकथा

लघुकथा – रूबी झा कहल गेल छै “घरक औजार भोथे नीक” और ई कहावत बहुत जगह सच होइत सेहो अपना सब देखने हेबै। लाल काकी के जाउत पुतोहु सँ बराबर कहा-कही होइत रहैत छलैन। “किछु लोहो के दोख किछु लोहारो के दोख” गोटेके दिन बितैत हेतै जै दिन पितिया सासु और जाउत पुतोहु में एक घरक औजार भोथे नीक – रूबी झा रचित लघुकथा

मैथिल छात्र-छात्रा लेल मुम्बई मे उच्च शिक्षा अध्ययनार्थ परामर्श सभा, उत्कृष्ट विद्यार्थीक भेलनि सम्मान

रवि कुमार मंडल, मुम्बई। २३ जून २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिल समाज सेवा संस्था द्वारा काल्हि २२ जून २०१९ तदनुसार शनि दिन आयोजित तेसर १०वीं ओ १२वीं कक्षाक छात्र‍-छात्रा सभक वास्ते उच्च शिक्षा सम्बन्धी परामर्श सभा राखल गेल छल। जाहि मे विज्ञ शिक्षाविद् लोकनि उपस्थित छात्र-छात्रा ओ अभिभावक लोकनि सँ १०वीं आ १२वीं कक्षाक बाद कोन मैथिल छात्र-छात्रा लेल मुम्बई मे उच्च शिक्षा अध्ययनार्थ परामर्श सभा, उत्कृष्ट विद्यार्थीक भेलनि सम्मान

प्रातःस्मरणीय लक्ष्मीनाथ गोसाईं केँ विशेष स्मरण करैत – मिथिला मे समरस समाज निर्माणार्थ

बाबाजीक विचारोपदेश केर अनुकरण सँ बनि सकैत अछि समरस समाज – विचार – पारस कुमार झा, बनगाँव, सहरसा उत्तरभारत के महान संत प्रातःस्मरणीय संत शिरोमणि बाबा लक्ष्मीनाथ गोसाईं गृहस्थ जीवन मे मोक्ष हेतु कलिकाल मे स्वस्थ तन मे शुद्ध मोन सँ भगवद्कीर्त्तन, परोपकार आ दयाभाव सँ आनन्दित जीवन व्यतीत करवाक उपदेश देलनि। मलेच्छक शासन सँ प्रातःस्मरणीय लक्ष्मीनाथ गोसाईं केँ विशेष स्मरण करैत – मिथिला मे समरस समाज निर्माणार्थ