कि खाय आर कि नहि खाय: मनुस्मृति उपदेश
आध्यात्मिक आलेख: हिन्दू संस्कृतिक प्रथम संवैधानिक उपदेश मनुस्मृतिक स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी (संकलन एवं अनुवाद) मनुस्मृति: पंचम अध्याय: कि खाय आर कि नहि खाय श्रुत्वैतानृषयो धर्मान्स्नातकस्य यथोदितान्॥ दममूचुर्महात्मानमनलप्रभवं भृगुम्॥१॥महर्षि भृगु द्वारा स्नातकक लेल निक जेकाँ निरूपित आचरण योग्य धर्म केँ सुनि ऋषिगण अग्निक समान प्रकाशमान महात्मा भृगु सँ कहलनि – एवं यथोक्तं विप्राणां स्वधर्ममनुतिष्ठताम्॥ कथं मृत्युः … कि खाय आर कि नहि खाय: मनुस्मृति उपदेश









