– विमल जी मिश्र
झुन झुना रे झुन झुना,
झुन झुना रे झुन झुना!
आठ नबम्बर बाद मे देखब,
कतेक गेलै जहल थाना!
झुन झुना रे झुन झुना……
कतेक कटोरा लऽ कें बैसत,
कतेक बेचत राम दाना,
झुन झुना रे झुन झुना….
कतेक बेचलक खेत पथारी,
कतेक बेचलक गहना,
कतेक कर्जा बर्जा लऽ कें,
कतेक लेलक लहना!!
कतेक नाँक रगैड़ कें आयल,
कतेक जहिना तहिना,
झुन झुना रे झुन झुना……
कतेक बैस कें झाइल बजेता,
कतेक घंटी टन टना !
झुन झुना रे झुन झुना…
कतेक मोंछ पिजा कें एतै,
कतेक बेलगोबना,
किनको छाती बज्जर खसत,
किनको टुटत सपना!
कतेक पार वैतरणी हेतै,
कतेक बनतै भिखमंगना
झुन झुना रे झुन झुना,
झुन झुना रे झुन झुना………


2 Comments
धन्यबाद अपने कें ! हमरा नजर किछु परेशान कन्डिडेट पर पड़ल त लिख देलौं । परेशानी कथीक,माय बापक क्रिया कर्म त करबाक नहि अछि,त फेर नेता बनबाक लेल अहूछिया कियैक काटै छी । जनैम कें ठाढ भेल ओहो नेते बनता । लालच छैक जे सात पुस्त तक नाम दाम चमकत । सेवा सँ कोनो सरोकार नहि । कतेक एहे व्यक्ति छैक जे आए तक समाज मे कामक नाम पर जीरो,.बनै चलला हिरो । रहल नहि गेल त अनचोके कलम चला देलौं । निंदो आबैत छल, खेतीक खाका तैयार छल । बाउग टटका करै पड़ल । हर हर महादेव ।
बहुत नीक लिखलौं – आ अहिना लिखैते रहब, कारण ….
काटि लेलकय काटि लेलकय काटि लेलकय भैया हौ….
मैथिली के कीड़ा देखहक काटि लेलकय भैया हौ!!
🙂
हरि: हर:!!