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प्रवीण नारायण चौधरी

कन्हा कुकुर माँड़े तिरपितः नीति कथा

नीति कथा – राम बाबु सिंह, मधेपुर (कलुआही), मधुबनी किस्सा पिहानी सेहो हेबाक चाहि, आइ चलु एकटा किस्सा स्मृति में आबि रहल अछि, सोचलहुँ जल्दी सँ कलमबद्ध करबाक चाहि। लीय अहूँ सब सुनु:- प्राचीन काल में एकटा भरल पुरल गाम में सोझे सोझ दूटा पड़ोसी रहैत छलाह। दुनु अपन अपन विशिष्ट काज के लेल प्रसिद्ध कन्हा कुकुर माँड़े तिरपितः नीति कथा

मिथिलाक वैवाहिक पंजी व्यवस्था आ पंजीकार

मिथिला मे पंजीबद्ध विवाह केर मूल्यवान् परंपरा – प्रभाकर झा मिथिलादेशक १४म शताब्दीक आरम्भकालक राजा हरसिंह देव द्वारा शुरू कैल गैल पंजी प्रथा आजुक भोजपत्र आओर कागज केर रूप मे धुरा फाँकि रहल अछि । कि‍छु दस्तावेज सब तऽ एतेक पुरान भए गेल अछि जे ओकरा आब पढ़लो नहि‍ जा सकैत छैक, जे बचल छल मिथिलाक वैवाहिक पंजी व्यवस्था आ पंजीकार

ब्राह्मण-संत केर वंदनाः शुभकार्य पूर्व केर शिष्टाचार

तुलसीदास जी सँ नव सर्जक – स्रष्टा केँ सीख लेबाक क्रम मे एखन हमरा लोकनि रामचरितमानस समान उच्चकोटिक सर्वस्वीकार्य महाशास्त्र – महाकाव्य केर रचना सँ पूर्व महाकवि द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण केर विभिन्न चरण केर स्वाध्याय मे छी। भगवान् केँ अपन प्रणाम अर्पित कएला उपरान्त महाकवि गुरुदेव केर चरणकमल – हुनक नखज्योति व चरणधूलि मे सब ब्राह्मण-संत केर वंदनाः शुभकार्य पूर्व केर शिष्टाचार

कि चाहीः भगवान् कि भोग?

नैतिक कथा – प्रवीण नारायण चौधरी   अस्त-व्यस्त बाजार – दुपहरियाक बाद बेसीकाल एतुका एहने हाल होएत छैक, लोक सब अपन पसार तऽ भोरे सँ दुपहर धरि लगबैत रहैत अछि… मुदा आब खरीददार सबहक भीड़ बाजारक चारूकातक क्षेत्र सँ पूर्ण रूप मे आबि जेबाक कारणे कोनो पसारी केँ फुर्सत नहि रहैत छैक। सब पसार पर कि चाहीः भगवान् कि भोग?

जातीय पहिचान आ जातिवादी राजनीति

विशेष संपादकीयः सन्दर्भ बिहारक पंचायती चुनाव आ मतदानक आधार बिहार मे पंचायतक चुनाव समाप्त भेलाक बाद बहुतो ठामक परिणाम सेहो लगभग घोषित कैल जा चुकल अछि। किछु ठाम गणना जारी रहबाक कारण घोषणा होयबा मे कतहु-कतहु बाकिये अछि। भारतीय लोकतंत्र मे मतगणनाक आधार हरेक योग्य मतदाताक मतसंख्या सँ होयबाक कारण उम्मीदवार अपना पक्ष मे संख्या बढेबाक जातीय पहिचान आ जातिवादी राजनीति

मिथिला राज्य पर चिन्तन शिविर आ जमीनी आन्दोलन

मिथिला राज्य केर आवश्यकता आ प्रयासः एक नजरिया – राम बाबु सिंह, मधेपुर (कलुआही), मधुबनी। हालः दिल्ली “जननी-जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” अर्थात जननी (माता) आउर जन्मभूमि केर स्थान स्वर्गों सँ श्रेष्ट आ महान मानल गेल अछि। वेद पुराण आ धर्मग्रन्थ में दुनु के ममता दुलार प्यार वात्सल्य के वखान अतुलनीय कयने अछि। अतः जनिका अपन जन्मभूमि मिथिला राज्य पर चिन्तन शिविर आ जमीनी आन्दोलन

भगवान् के छथि – कोना जानब भगवान् केँः गीता

गीताक तेसर बेरुक स्वाध्याय   (निरंतरता मे….. योग, योगी, भगवान् केर दर्शनक क्षमता होयब, भगवान् सेहो केकरा पर दृष्टि रखैत छथि, अर्जुनक प्रश्न जे मन चंचल रहत तऽ योग कोना संभव होयत, भगवानक जबाब जे मन बिना स्थिर केने योग संभव नहि, पुनः मन स्थिर करबाक लेल निरंतर अभ्यास आर वैराग्य केर उपाय बतेनाय…. आउ भगवान् के छथि – कोना जानब भगवान् केँः गीता

समय सन्दर्भमो मिथिला राज्यक औचित्य: अधिकार लेल जंग

– किसलय कृष्ण, समाचार संपादक कनाट प्लेस मेटरो सँ विदा भ गेल छी पटेलनगर लेल, मोन विभिन्न उहापोहमे औना रहल अछि, परिवार, कैरियर सम्बन्धी सोच मे ओझरायल छी कि मानसपटल पर एकटा कीड़ा आबिके कटैत अछि आ बिस्सबिस्सी शुरु भ जाइत अछि……. ई कीड़ा आइ कोनो पहिल दिन नइ अपितु विगत डेढ दशकसँ जखन तखन समय सन्दर्भमो मिथिला राज्यक औचित्य: अधिकार लेल जंग

गुरु वंदनाः महाकवि तुलसीदास केर रचना रामचरितमानस

आध्यात्मिक चिन्तन तथा जीवनशैली: गुरु वंदना सँ सीख रामचरितमानस केर लोकप्रियता सँ सब कियो परिचित छीहे। एतय हम महाकवि तुलसीदास द्वारा एहि रचनाक पूर्व मे जाहि शालीनता सँ भूमिका बान्हल गेल अछि तेकर किछु दृष्टान्त राखि रहल छी।  हमर मान्यता अछि जे मिथिला मे सृजनशील लेखकक कमी नहि। एहि वर्ष हम सब १०० लेखक द्वारा गुरु वंदनाः महाकवि तुलसीदास केर रचना रामचरितमानस

अमेरिकामे श्रद्धाभावक संग मैथिलानी मनओलनि बरसाइत

एटलांटा, जॉर्जिया, अमेरिका। जुन ६, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! अमेरिकाक एटलांटा शहरमे मिथिलाक विवाहिता मैथिलानी सबहक आजुक दिन बिशेष रहल। अप्पन पतिक दीर्घायु लेल मिथिलाक बेटी सब इश्वर सं कामना करैत वट सावित्री अर्थात बरसाइतक पर्व हर्षोल्लासपूर्वक मनौलनि। “श्री मंदिर“ स्थित बरकऽ गाछमे एटलांटा आर आसपासक क्षेत्रकें सम्पूर्ण महिला लाल-पीयर डोरा बान्हि कऽ अप्पन अप्पन पतिक अमेरिकामे श्रद्धाभावक संग मैथिलानी मनओलनि बरसाइत