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प्रवीण नारायण चौधरी

जंगलराजः कथा या यथार्थ

पौकेट के लोक – प्रवीण नारायण चौधरी, कथाकार  भोरे-भोर राजाधानीक साफ-सुथरा आ हरा-भरा सड़कपर विधायक श्रीनारायण मंडल मार्निंग-वाकिंग मे अपन आदतिक मुताबिक दौड़ लगेलाक बाद थकावट केँ दूर करबाक लेल आब धीरे-धीरे चलैत वापसी अपन कोठी (घर)क दिशा मे आबि रहल छलाह। अचानक दु गोट नकाबधारी व्यक्ति ‘हय रुक! रुकि जो नहि तऽ गोली मारि जंगलराजः कथा या यथार्थ

नओ साल – नओ सवालः अजित आजाद केर २०१२ केर विचार

नओ साल, नओ सवाल – अजित कुमार आजाद – ८ जनबरी, २०१२ केर लेख मैथिलीकेँ अष्टम अनुसूचीमे स्थान भेटलाक आइ नौ साल पुरि गेल। वर्ष 2003मे अझुके दिन पाँच करोड़सँ बेसी मैथिलीभाषीक सपना साकार भेल छल। सपना छल अपन भाषामे सांवैधानिक अधिकार भेटब, से भेटल। आइ हमरा समक भाषा 23 गोट अन्य भारतीय भाषाक संग नओ साल – नओ सवालः अजित आजाद केर २०१२ केर विचार

पाग केँ अपनौलक अंग्रेजी शब्दकोशः मिथिलाक वैश्वीकरण

विशेष संपादकीय सामाजिक संजाल पर ई विषय बहुतो बेर बहस मे आयल जे आखिर मिथिलाक पहिचानक प्रतीक ‘पाग’ केँ कोना सर्वमान्य मानल जाय। गोटेक कूतर्की आ दंभी विद्वान् ‘पाग’ केर वृहत् अर्थ केँ अपने सँ संकुचित कय किछु जातिक धार्मिक कर्मकाण्ड मे उपयोग सँ जोड़ि पागहु पर ताहि जातिक एकाधिकार स्थापित करबाक कूकार्य करैत आबि पाग केँ अपनौलक अंग्रेजी शब्दकोशः मिथिलाक वैश्वीकरण

Finding Mithila Between India’s Centre And Periphery

FINDING MITHILA BETWEEN INDIA’S CENTRE AND PERIPHERY ALAKH NIRANJAN SINGH* & PRABHAKAR SINGH** The linguistic region of Mithila in north Bihar has been one of India’s many cultural ‘Others’. Part of the erstwhile Presidency of Bengal, Mithila’s intellectual identity was largely subsumed by larger cultural region of Bengal. Before the Indian independence in 1947, Mithila’s Finding Mithila Between India’s Centre And Periphery

भोजपुरी सिनेमा मे अश्लीलता बेचनाय बन्द करूः नितीन नीरा चन्द्रा

विचार – नितीन नीरा चन्द्रा, निर्देशक, मिथिला मखान व विभिन्न अन्य फिल्म (अपन फेसबुक पर) वर्तमान “भोजपुरी सिनेमा” केर रक्षक लोकनि! हमर inbox मे फेक प्रोफाइल बनाकय लिखनाय बंद करू। एखन धरि कतेको रास प्रोफाइल्स block कय चुकलहुँ अछि। अश्लीलता बेचिकय कमाय करनिहार ओहि भोजपुरी फ़िल्म केर बारे मे बहुतो बात भऽ चुकल अछि। नकली प्रोफाइल बनाकय हमरा बारे मे भोजपुरी सिनेमा मे अश्लीलता बेचनाय बन्द करूः नितीन नीरा चन्द्रा

जनकपुर मे साहित्यिक कार्यक्रम ‘साँझक चौपाड़ि’क चारिम मास

जनकपुरमें चारिम मासिक सांझक चौपाडि सम्पन्न भेल – मनीष कर्ण, जनकपुरधाम। १९ जून, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! जनकपुरमें नबतूरिया मैथिली स्रष्टा सबहक चारिम मासक साहित्यिक कार्यक्रम ‘साँझक चौपाडि’ सफलतापूर्वक सम्पन्न भेल अछि। जनकपुरक पवित्र सरोवर गंगासागरक दक्षिणबाड़ि महार पर स्थित बाबा भूतनाथ मन्दिरक प्राङ्गणमे चारिम मासक साँझ चौपाडि साहित्यिक कार्यक्रम काल्हि शनि दिन आयोजित कैल गेल छल। एहि मे मुख्य रुपसँ मैथिली गीत, कविता, गजल, जनकपुर मे साहित्यिक कार्यक्रम ‘साँझक चौपाड़ि’क चारिम मास

मधेस मिडिया मिशनद्वारा संचार कानून प्रशिक्षण

गौर, रौतहट, असार ५ गत्ते, २०७२ वि.सं.। मैथिली जिन्दाबाद!! मधेश मिडिया मिशनद्धारा संचार कानुन तालिम सम्पन्न संचार कानुन सम्बन्धित दुइ दिवसीय तालिम रौतहटमे सम्पन्न भेल अछि । मधेस मिडिया मिसन नेपालक आयोजनामे शुक्रबारसँ शुरु भेल दुइ दिनक तालिम शनि दिन सम्पन्न भेल । एहि तालिममे विभिन्न जिल्लाक दुइ दर्जन पत्रकार सहभागी भेलाह । मिसन रौतहटक अध्यक्ष शैलेन्द्र झाक सभाध्यक्षतामे मधेस मिडिया मिशनद्वारा संचार कानून प्रशिक्षण

वैचारिक क्रान्ति लेल काज करैत बढैत रहब जरुरीः प्रवीण

विचार काजक लेलः खाली फूकास्टिंग नहि चलत! – प्रवीण नारायण चौधरी सच छैक जे मिथिला हरेक मैथिल केर हृदय मे जीवित अछि। एतुका भाषा, संस्कृति आ साहित्य सेहो एकरा ओतबे जीवन्त रखैत अछि। माटि-पानि केर शक्ति आ प्रकृति केर विलक्षण स्वरूप एहि ठामक प्रखरता केँ विश्व केर हरेक समुदाय सँ भिन्न आ बेहतर छैक। कतहु वैचारिक क्रान्ति लेल काज करैत बढैत रहब जरुरीः प्रवीण

सड़ल-गन्हायल वैचारिकता सँ कतहु मिथिलाक समाधान होयत?

छीटखोपड़ी सँ रहय जाउ सावधान, केवल सीखू करब अपन योगदान!! सन्दर्भ अछि हालहि संपन्न पटनाक चिन्तन शिविर जाहि मे मिथिला राज्य निर्माण सेनाक संस्थापक पक्ष – कार्यकारिणी पक्ष व विभिन्न पक्षक संङोर करैत आगाँ कोना-कि करबाक चाही तेकर आयोजन आर ताहि पर सामाजिक संजाल मार्फत ‘छीटखोपड़ी’ चर्चा। विदिते अछि जे छीटखोपड़ी ओकरा कहल जाएत अछि सड़ल-गन्हायल वैचारिकता सँ कतहु मिथिलाक समाधान होयत?

मिथिला पर्यटन विकास व प्रवर्धन लेल काठमांडु मे आयोजन

काठमांडु, नेपाल। जून १८, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! मिथिला क्षेत्रक सांस्कृतिक तथा पर्यटकीय सम्भावना आर महत्वकेँ आरो बढेबाक वास्ते आइसँ दुइ वर्ष पहिले जनकपुरधामक  गंगासागरमे महागंगा आरतीक शुभारम्भ भेल छलैक, जे नित्य-निरन्तर प्रत्येक दिनकेँ सांझ मे हजारों श्रदालु आर पर्यटक सबहकक उपस्थितीमे भेल करैत अछि । जल संरक्षण, सरसफाई ( स्वच्छता, संस्कृती प्रवर्धन, सामाजिक परोपकार तथा दीर्घ विकासक मिथिला पर्यटन विकास व प्रवर्धन लेल काठमांडु मे आयोजन