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प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिली विभागाध्यक्ष डा. रामनरेश सिंह भारी उद्योगक निदेशक नियुक्त

सुभाषचन्द्र झा, सहरसा। जुलाई १, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! पी जी सेन्टर सहरसा केर मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. रामनरेश सिंह केँ आइ भारी उद्योग एवं लोक उपक्रम केर निदेशक बनाओल गेल अछि। हुनक निदेशक बनला सँ सहरसा मे हर्षक माहौल अछि । वर्तमान मे श्री सिंह भाजपा केर प्रदेश उपाध्यक्ष सेहो छथि । हुनकर निदेशक बनला सँ सम्पूर्ण मिथिला छेत्र मे मैथिली विभागाध्यक्ष डा. रामनरेश सिंह भारी उद्योगक निदेशक नियुक्त

यात्री पर किछु हमरो कहबाक अछिः युवा सर्जक विकास

आलेख – विकास झा, हरिणे, मधुबनी (हालः हैदराबाद सँ) मैथिली कविताक समकालीन परिपेक्ष बाबा यात्रीक सृजनताक इजोत बिनु नहि फरिछ भ’ सकैत अछि । विद्यापति कालीन मैथिली जे एकाधिक भाषा कें भठ्ठा धरा कविता गढब सिखौलक ताहि मैथिली केँ समकालीन परिवेश मे पुनः सोंगर लगा ठाढ़ करबाक श्रेय हिनके जाइत छनि । मैथिली कविता मे आधुनिकताक पसार, यात्री पर किछु हमरो कहबाक अछिः युवा सर्जक विकास

मिथिला समाजक क्रूर सच्चाईः वर बाहरे कमेनिहार चाही

बियाहक लेल  – राम कुमार मिश्र कोलकाताक पार्कस्ट्रीट में एक मित्रक बाट जोहैत रही, बगलमें बाघ सन बिलायती कुकुरक सिक्करि धेने एक पांच हाथक नवकबेर मोबाइल पर मैथिलीमें गप्प करैत छलाह, गप्प शेष भेलाक बाद पुछि देलियैन्ह, “की नाम भेल अपनेक बाऊ ?” ! अपन नाम गुजन कमती आ मधुबनी जिलाक एकटा गामक नाम कहला, मिथिला समाजक क्रूर सच्चाईः वर बाहरे कमेनिहार चाही

सत्यनारायण भगवान् पूजा पद्धतिः मैथिल जनमानस लेल

मिथिलाक आत्माः आध्यात्मिक अध्ययन व पूजा-पाठ निजी अनुभूति सँ आत्मज्ञान भेटल, मिथिलाक घरे-घर आ जन-गण-मन मे रचल-बसल देवता ‘सत्यनारायण भगवान्’ केर पूजा हेतु संपूर्ण पद्धति अपने सब धरि पहुँचाबी। चूँकि वर्तमान समय मे पंडिताय-पुरोहिती कर्म आजुक ब्राह्मणवर्ग मे सेहो लुप्तप्राय भऽ गेल अछि, दोसर बात जे मिथिलाक लगभग तीन-चौथाई जनमानस अपन मूल बास-स्थल सँ पलायन सत्यनारायण भगवान् पूजा पद्धतिः मैथिल जनमानस लेल

अनर्गल प्रलाप बन्द कय कार्यभार संग समूह मे आगू बढी हम सब

आलेख – राम बाबु सिंह, मधेपुर (कलुआही), मधुबनी (हालः दिल्ली सँ) मिरानिसे यानि मिथिला राज्य निर्माण सेना, करुणा आ याचना सँ नहि बल्कि जानकी केर सेना बनि शंखनाद आ हल्ला बोल अभियान करब। प्रकृति केर दुर्लभ रचना मे सँ एक थीक पृथ्वी आर फेर ताहि पृथ्वी पर अछि एकटा सुन्दर-विलक्षण देश भारत; आर ताहि सुन्दर-विलक्षण भारत अनर्गल प्रलाप बन्द कय कार्यभार संग समूह मे आगू बढी हम सब

कि फेर आओत कोसी मे महाप्रलयंकारी बाढि?

सुभाषचन्द्र झा, सहरसा। जून २९, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! सहरसा-मानसी रेलखंड पर कोशी केर बाढिक खतरा सहरसा-मानसी रेलखंड केर फनगो हॉल्टक एरिया में कोशी नदीक धारा रेलवे ट्रैक केँ कखनो बहा सकैछ हालाँकि अखन नदी में बेसी पानि नहि अछि लेकिन नेपाल क्षेत्र मे भऽ रहल निरंतर भारी वर्षा सँ स्थिति कखनो बिगैड़ सकैछ । नदी कि फेर आओत कोसी मे महाप्रलयंकारी बाढि?

सृष्टि मे नीक-बेजा दुनू बातः अहाँक रुचि कि से अहींके हिसाब

स्वाध्याय केर महत्व सर्वविदित अछि, विगत किछु समय सँ रामचरितमानस मे महाकवि तुलसीदास द्वारा प्रयुक्त संस्कार – मंगलाचरण केर माध्यम सँ जेना व्यक्त कैल गेल अछि ताहि पर चर्चा करैत आबि रहल छी। एहि सँ पूर्व मे भगवान्, गुरु, ब्राह्मण-संत आ खल वन्दना पर चर्चा कय चुकल छी। आइ चर्चा करब संत-असंत वन्दनापरः संत-असंत वंदना सृष्टि मे नीक-बेजा दुनू बातः अहाँक रुचि कि से अहींके हिसाब

मधेश-शहीदक अपेक्षा आ पुरखाक भूल लेल माफीक संयोग

प्रसंगवश…. नेपाल मे किछु मास पूर्वे दुनियाक सबसँ बेसी दिन धरि चलयवला आन्दोलन समाप्त भेल। दर्जनों लोक एहि आन्दोलन मे शहादति देलक। आन्दोलनक स्वरूप पर सेहो घमर्थन चलैत रहल। राज्य द्वारा आन्दोलन केँ हिंसक आ आम जन केर हित विरुद्ध हेबाक बात कहल जाएत रहल। असन्तुष्ट पक्ष द्वारा दंभी सत्ताभोगी आ शासकवर्ग सँ अन्तिम युद्ध मधेश-शहीदक अपेक्षा आ पुरखाक भूल लेल माफीक संयोग

दरभंगा पूलिस अन्तर्राष्ट्रीय वाहन चोरक गिरोहकेँ पकड़लक

दरभंगा, जून २८, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! एक दिस भीषण बेरोजगारी आ गरीबी सँ संघर्ष आ दोसर दिस लूट-खसोट-भ्रष्टाचार केर बढावा देबयवला राजनीति द्वारा राज्य संचालन – अन्हेर नगरी चौपट राजाक बेमिसाल उदाहरण बिहार आ ताहि ठाम विपन्न मिथिलाक्षेत्र मे बढैत अपराध जंगलराज केर अनुभूति दैत आबि रहल अछि। आइ-काल्हि कम समय मे बेसी पाइ कमेबाक दरभंगा पूलिस अन्तर्राष्ट्रीय वाहन चोरक गिरोहकेँ पकड़लक

मातृभूमि वन्दना

मिथिले मे जिबय चाहय छी – रविन्द्र उदासी माली, धनुषा, नेपाल (हालः दोहा, कतार सँ)   फुलक माला सन मिथिला मैथिल केँ गुथऽ चाहै छी स्वार्थी एहि दुनिया मे प्रेमक बिया बुनऽ चाहै छी बस एतबे वरदान दियऽ हे जगदम्बे माँ!! सीता भूमि पावन धरती पर शान्तिक दीप जराबऽ चाहै छी!!   खून पसिना बड चुवा लेलौं मातृभूमि वन्दना