अनन्यभाव सँ भगवानक चिन्तन मे लागू – योगक्षेम भगवाने देखता
गीताक तेसर बेरुक स्वाध्याय (निरन्तरता मे – आठम अध्याय मे अन्त जतय ध्यान रहत तेहने गति भेटत – एहि पाँति पर आधारित विभिन्न बाटक निरूपण भगवान् कएलनि आर अपन लोक केर प्राप्ति लेल सदैव हुनक भजन-सुमिरन-स्मरण मे रत रहबाक उपदेश केलनि अछि। तेकर बाद नवम अध्याय….) ॥ ॐ श्रीपरमात्मने नम:॥ श्रीमद्भगवद्गीता अथ … अनन्यभाव सँ भगवानक चिन्तन मे लागू – योगक्षेम भगवाने देखता









