कोना केँ बनबय जितेन्द्रिय
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी बुद्धिमें ब्याधि! मन के खींचय छै दस गो घोड़ा, नाम ओकर छै ज्ञानेन्द्रिय! नियम संयम अनुशासन बान्हय लोक बनै छै जितेन्द्रिय! विश्वंभर भर सभक जीवन – मुँह तैयो अनकर ताकी, पेटक अग्नि धधकैत ज्वाला – शम् हो छुधा काजहि काजी! मन के ….. आदम जीवन घुमुवा अनर्गल … कोना केँ बनबय जितेन्द्रिय









