धनरोपनी सँ जुड़ल मिथिलाक साहित्य-संस्कारः गभ लेनाइ आ धनखेती लेल डाक-वचन
आलेख – प्रवीण नारायण चौधरी धनरोपनी सँ जुड़ल मिथिलाक साहित्य-संस्कार के नहि जनैत छी जे बिना अन्न-पानि मानव जीवन किंवा सम्पूर्ण पर्यावरणीय संतुलन, हर जीव-जन्तु आ जीवन पद्धति स्वयं असंभव अछि। हम-अहाँ जे मिथिलाक लोक थिकहुँ एतय सेहो खेती-पाती आ घर-गृहस्थी संग जीवनचर्याक अपन एक अलग विशिष्ट परम्परा सुस्थापित अछि। हालांकि ई परम्परा आजुक … धनरोपनी सँ जुड़ल मिथिलाक साहित्य-संस्कारः गभ लेनाइ आ धनखेती लेल डाक-वचन









