Search

प्रवीण नारायण चौधरी

धनरोपनी सँ जुड़ल मिथिलाक साहित्य-संस्कारः गभ लेनाइ आ धनखेती लेल डाक-वचन

आलेख – प्रवीण नारायण चौधरी धनरोपनी सँ जुड़ल मिथिलाक साहित्य-संस्कार   के नहि जनैत छी जे बिना अन्न-पानि मानव जीवन किंवा सम्पूर्ण पर्यावरणीय संतुलन, हर जीव-जन्तु आ जीवन पद्धति स्वयं असंभव अछि। हम-अहाँ जे मिथिलाक लोक थिकहुँ एतय सेहो खेती-पाती आ घर-गृहस्थी संग जीवनचर्याक अपन एक अलग विशिष्ट परम्परा सुस्थापित अछि। हालांकि ई परम्परा आजुक धनरोपनी सँ जुड़ल मिथिलाक साहित्य-संस्कारः गभ लेनाइ आ धनखेती लेल डाक-वचन

पहिने बेटी बेचल जाइत छल, आब बेटा बेचल जाइत अछि – मिथिला समाज सँ गम्भीर सवाल

लेख – रूबी झा हम जहन छोट रही, करीब पन्द्रह साल केर, त एकटा टोल के दीदी (बुआ) बुलैय लेल अंगना एलीह, माँ कहलक दीदी छथिन गोर लगहुन। हम गोर त लागि लेलियनि लेकिन जहन दीदी चैल गेलखिन्ह त माँ केँ हम सवाल पर सवाल पूछैय लगलियैक। हम छोटे सँ बहुत जिज्ञासु छलहुँ। हरेक चीज पहिने बेटी बेचल जाइत छल, आब बेटा बेचल जाइत अछि – मिथिला समाज सँ गम्भीर सवाल

फेसबुक पर फेसक लफड़ा, बातक रगड़ा बातक झगड़ा

अहाँ सँ किछु विशेष बात करक छल   सभक सिनेह अहाँ केँ नसीब नहि होयत सहजहि, एहि लेल अहाँ कनिकबो सोच मे नहि पड़ू। सच छैक जे अहाँ केँ ई खराब लागत, मोन अन्दर सऽ तड़पैत रहत, लेकिन तैयो वांछित प्रेमक परिमाण अपेक्षा अनुरूप नहि भऽ सकैत छैक। ताहि सँ एतेक मानिकय चलल करू जे फेसबुक पर फेसक लफड़ा, बातक रगड़ा बातक झगड़ा

मिथिलाक लोकसाहित्य मे डाक वचन अनुसार व्रत-उपवास लेल प्रसिद्ध उक्तिक व्याख्या

मैथिली लोकसाहित्य – डाक वचन  – स्रोतः पंडित महेन्द्र ठाकुर – संकलनः प्रवीण नारायण चौधरी मिथिलाक गृहस्थ परिवार लेल विशेष पूजा-पाठ पर डाकक वचन सुतब-उठब टांग मोरा ताहि बीच मे जन्मल छौड़ा राजा बेटा रामलाल आठ-नौ मे डाक नेहाल बतहाक चौदह बतहीक आठ अन्न त्यागी सब जीवन काठ ई थिक डाक वचन। पंडित महेन्द्र ठाकुर मिथिलाक लोकसाहित्य मे डाक वचन अनुसार व्रत-उपवास लेल प्रसिद्ध उक्तिक व्याख्या

राधाक कृष्ण-विरह केर दुइ गोट विशिष्ट रचना – कि थिक राधाभाव से स्पष्ट करैत मूल्यवान् साहित्य

स्वाध्याय माधव-विरहिणी राधाक उद्गार   – श्रीजसवंतजी रघुवंशी (भावानुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   भगवान् कृष्ण जहिया सँ मथुरा गेला, तहिये सँ सब गोप-गोपियन विरहाग्नि सँ व्याकुल भेलाह, शोक-सन्तप्त रहैत विलाप करैत छलाह। एहि क्रम मे हुनक प्रिय सखा मनसुख केर विरह-पीड़ा केँ कवि द्वारा ‘मनसुख-विरह-शतक’ केर रूप मे निबद्ध कयल गेल अछि। एकर जाहि अंश राधाक कृष्ण-विरह केर दुइ गोट विशिष्ट रचना – कि थिक राधाभाव से स्पष्ट करैत मूल्यवान् साहित्य

ईन्दूक बाबू फ्रीज कियैक नहि कीनलनि

लघुकथा – रूबी झा “बाबू यौ फ्रीज खरीद लिय ने, ओहि में सँ ठंडा-ठंडा पैन पिब आ दूध कहियो फटबो नहि करत, दही सेहो नहि खट्टा होयत” ईन्दू अपन पिता सँ बारम्बार आग्रह क रहल छलखिन्ह। पिता बात केँ हमेशा टाइर दैत छलखिन्ह। एक दिन ईन्दू अपन जिद्द पर अड़ि गेली। पिता रिटायर्ड शिक्षक रहथिन्ह, ओ पेंशन ईन्दूक बाबू फ्रीज कियैक नहि कीनलनि

आन्दोलन करबाक चेतावनी देलक सुकुम्बासी

जितेन्द्र ठाकुर, विराटनगर । १२ जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! काफी समय सँ विराटनगर महानगरपालिका १ स्थित परोकार घाट जायवला रस्ता मे बसोवास करैत आबि रहल सुकुम्बासी (भूमिहीन) लोक द्वारा स्वयं केँ बसोवास करबाक वैकल्पिक व्यवस्थापन कएने बिना घर खाली करेबाक काज कयल जाय त आन्दोलन करब से चेतावनी देल गेल अछि। विगत ४० वर्ष सँ आन्दोलन करबाक चेतावनी देलक सुकुम्बासी

विराटनगरक कोशी अस्पताल परिसर मे पानिक जमाव सँ समस्या

जितेन्द्र ठाकुर, विराटनगर। १२ जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! विगत किछु दिन सँ लगातार पड़ि रहल वर्षाक कारण कोशी अञ्चल अस्पताल मे डुबानक समस्या देखा रहल अछि। लगातार वर्षा पड़ैत रहला आ पानिक समुचित निकासी नहि रहबाक चलते प्रदेश १ केर सब सँ पैघ सरकारी अस्पताल मे डुबानक समस्या भेल अछि। अस्पताल परिसरमे पानिक सतह ३ विराटनगरक कोशी अस्पताल परिसर मे पानिक जमाव सँ समस्या

राधा मम प्राण – एक बांग्ला गीत जे श्रीआनन्दमयी माँ केँ बहुत प्रिय छलन्हि

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी अदौकाल सँ भगवद्भक्ति मे भावपूर्ण भजन केर गान हिन्दू धर्म-संप्रदायक लोक लेल जीवनक मुख्य आधार रहल कहि सकैत छी। हम मिथिलावासी सेहो तरह-तरह केर भक्तिगीत भोरे प्राती सँ लैत साँझ व अन्य-अन्य समय मे अपन ईष्ट केँ प्रसन्न रखबाक लेल गबैत छी। सामूहिक गान – महिला आ पुरुष दुनू केर राधा मम प्राण – एक बांग्ला गीत जे श्रीआनन्दमयी माँ केँ बहुत प्रिय छलन्हि

माछ मारय पर प्रतिबन्धक बावजूद कोशीमे मारल जा रहल अछि माछ (रिपोर्ट)

जितेन्द्र ठाकुर, ११ जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! विराटनगर । सप्तकोशी नदिमे वर्षाक मौसममे माछ मारय पर रोक लगेलाक बादहु ई नहि रुकि सकल अछि। प्रत्येक वर्ष तीन महीना सप्तकोशी नदीमे भेटयवला माछक जीरा देबाक सीजन आर माछक संख्या बढबाक समय होयबाक कारण जेठ, अषाढ आर सावन मासमे माछ मारयपर रोक लगायल जाइत अछि। लेकिन रोक माछ मारय पर प्रतिबन्धक बावजूद कोशीमे मारल जा रहल अछि माछ (रिपोर्ट)