दृष्टि आ समझ सभक अलग होइत छैक – दार्शनिक दृष्टान्त
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी यात्री हम सब जीवन यात्रा मे छी। ई यात्रा पृथ्वी पर भिन्न-भिन्न जीवरूप मे प्राप्त अछि। ठीक तहिना एहि ब्रह्माण्डक अनन्त संरचना मे अनन्त पृथ्वीक परिकल्पना आ अनन्त जीवनयात्राक कल्पना यथार्थ सत्य थिक। बुझनिहार बुझैत छथि। अबुझ भटैक रहल छथि। बुझ-अबुझ केर स्थिति सेहो महान सत्य थिक। जरूरी नहि जे … दृष्टि आ समझ सभक अलग होइत छैक – दार्शनिक दृष्टान्त





