कथाः ठकविद्या
कथा – प्रवीण नारायण चौधरी ठकविद्या मास्टर साहेबक आदति छलन्हि जे कक्षा मे अबिते देरी चपरासी बिकाउ केँ कहथिन जे छड़ी लेने आबे। एक त छात्र सब हुनका सँ ओहिना डराएत छल, ताहि पर सँ ओ जानि-बुझि कक्षा मे प्रवेश सँ ठीक पहिने चिकैरकय कहथिन, “ऐ बिकाउ, छड़ी लेने आउ!” हुनकर छड़ियो अयली-बयली नहि … कथाः ठकविद्या









