अविरल बर्खा सँ बाढिक तान्डव – नेपाली मीडिया मे कोसी बैरेज पर नियंत्रणक सवाल बेसी भारी

अगस्त १६, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!!

वर्तमान बाढि महाप्रलयक एक छोट संकेत कहि सकैत छी

नेपाल केर पहाड़ आ तराई सहित दुनू कातक मिथिला क्षेत्र व अन्य-अन्य क्षेत्र मे निरन्तर भेल ४९-५० घंटाक अविरल वर्षा सँ भीषण बाढि आयल। नेपालक तराई सहित भारतक ओ भाग जे नेपाल सँ जुड़ल अछि आ गंगाक उत्तर अवस्थित अछि – एहि समस्त भाग मे बाढिक तान्डव देखल जा रहल अछि। सुसंयोग कहू जे कोसी नदी मे कतहु कोनो कटान नहि भेल, मुदा कमला-बलान-गंडकी सब नदी मे जलस्तर खतराक निशान सँ ऊपर जाएत जनजीवन अस्त-व्यस्त कय देलक। कमला-बलान मे दू-दू ठाम बान्ह टूटल, पहिने बौर (रसियारी) आ फेर विष्णुपुर (ककोढा) केर पास पश्चिमी तटबन्ध टूटैत लाखों घर-परिवार केँ घर सँ बेघर करैत धनखेती केँ नाश कय देलक। एम्हर नेपालक तराई भूभाग मे पर्यन्त आइ धरि एहेन बाढि नहि देखल जेबाक खबरि जैंह-तैंह सऽ भेटल।

विराटनगर केर सब भाग मे बाढिक पानि लगभग ४० सँ ५० घन्टा धरि तान्डव केलक। गरीब-गुरबाक बनल माटिक घर सब लगभग बर्बाद भऽ गेल। दर्जनों आदमी पानिक तेज बहाव मे बैह गेल। माल-जालक जान कतेक गेल ई निस्तुकी कहब संभव नहि अछि। पानि घटलाक बाद नदी आ गहिंर जल-ठहरावक स्थान सब पर मानव संग जानवर सभक लाश भेटब जारी अछि। जोगबनी रेलवे स्टेशन केर सटले पश्चिम गहिंर खाई छल जतय बगलहि केर टिकुलिया वस्ती सहित नेपालक विभिन्न स्थानक दर्जनों लोकक लाश भेटल अछि आर ई क्रम एखनहु जारिये अछि। पानि भले घैट गेल हो, लेकिन बाढिक त्रास आ बाढि उपरान्तक महामारी आदिक डर बनले अछि। एहेन प्राकृतिक आपदा कतेको लोक पहिने नहि देखने छल।

बाढि सँ सिर्फ तराई भूभाग केँ नहि पहाड़हु मे ओतबे नोक्सानी भेल समाचार सँ जनतब भेटल। कतेको स्थान पर भूस्खलन सँ रास्ता सब बाधित भेल। पहाड़ी बाढि (पथरीला माटि आ पानिक मिश्रित बहाव जे ऊपर सँ नीचाँक तरफ बड पैघ मात्रा मे बहैत छैक) सँ नेपाल मे कतहु बड पैघ जान-मालक छति होयबाक समाचार त नहि अछि, परन्तु भारत मे कतहु-कतहु यात्री बस समेत केँ ओहि सँ नोक्सान होयबाक समाचार भेटल। एहि तरहक आपदा सँ बिजली, इन्टरनेट, आदिक सुविधा सेहो निरस्त भेल। विराटनगर मे लगभग १०० घंटाक बाद बिजली चालू कएल जा सकल अछि।

स्वाभाविक बात छैक जे पानिक बहाव ऊंच सँ नीच दिस होएत छैक। नेपाल हिमालय पहाड़ केर गोद मे बसल राष्ट्र थिक। एतय पहाड़ मे भेल वर्षाक पानि हो वा हिमालयक ग्लेशियर पिघैलकय बहाव मे रहल नदीक पानि हो – ई सब पानि क्रमशः निचला भाग नेपालक तराई आ भारतक मिथिला मे प्रवेश करैत अछि। लगभग सब छोट-पैघ नदी अपन प्राकृतिक बहाव केर संग अन्त गंगा मे मिलान करैत पुनः गंगाक बाटे महासागर मे प्रवेश करैत अछि। पैघ-पैघ नदीक जल केँ नियंत्रण करबाक लेल बाँध निर्माण कएल गेल अछि। मुदा बाँधक पेट मे नदीक बहाव द्वारा आनल गेल बालू-माटि आदि केँ निरंतर सफाई नहि कएल जेबाक कारणे ओकर बहावक दिशा आ दशा दुनू बदलैत रहैत छैक। एहि कारण बाँध पर निर्मित स्पर सँ पानिक दिशा आ बहाव केँ नियंत्रण कएल जेबाक सिद्धान्तक बादो बहावक चाप यदा-कदा एहेन ढंग सँ बढि जाएत छैक जे मानवीय नियंत्रण सँ बाहर जा बाँध केँ तोड़िकय पानि बाहर निकैल जाएत छैक।

१९८७ मे सेहो एहने खतरनाक बाढ़ि आयल छलैक। पुनः १९९१ मे आ एहि बेर फेरो आयल बरसात जे लगातार ४०-५० घण्टा धरि बरसैत रहल, नेपाल केर पहाड़ आ तराई सब तैर बरसल आ एतेक पानि जखन बहिकय निचला सतह दिस गेल त स्वाभाविक रूप सँ विभिन्न नदी अपन उग्र रूप में आयल। पिछ्ला कतेको वर्ष सँ बाँध परियोजना पर सड़क निर्माण केर काज चलेबाक एक अनुपम प्रयास केँ करारा धक्का लागल अछि। स्लुईस गेट आ नदीक पेट बालू आ माटि सँ पैक रहल, नहर निर्माण आ नदीक पानि केर प्राकृतिक धारा अनुरूप जल बहाव व्यवस्थापन पर समुचित ध्यान नहि देखलहुँ। स्लिट मैनेजमेंट लेल कोनो परियोजना नहि देखायल इम्प्लीमेंट होएत। बाँध सुरक्षा हेतु वृक्षारोपण अधूरा देखाएछ। लेकिन बजट प्रोविजन आ इम्बर्समेंट के हिसाब देखल जाय त उपरोक्त सब कार्य कयल गेल अछि, फ्लड मैनेजमेंट परचेजिंग के संग संग दीर्घकालिक सुधार पर सेहो राज्य चौकस अछि। राज्य आ केंद्र बीच बाढ़िक निदान लेल करोड़ो-अरबों केर बजट व्यवस्था कयल गेल अछि। लेकिन बिहार राज्य केर खजाना में पानिक नियंत्रण लेल जेना असर पड़ैत अछि तेना काज नहि आ परिणाम नहि। फेर समाधान कि? सोचनीय विषय थिक प्रत्येक मिथिलावासी लेल। पृथक राज्य केर मांग केर ई एक पुख्ता कारण थिक, पटना सँ समाधान सम्भव नहि अछि। मंत्री बेसीकाल मिथिलाक बनल, मुदा ओकर आका ओहि कातक अछि जे हिनका सिट्ठी आ अपना रस पिबैत अछि। वंचित मिथिलावासी सँ ओहि पैसा में सँ १ नमड़ी में जातिक नाम पर वोट ल लैत अछि। अभागल केर भाग्योदय एहि तरहें अपने घरक किछु अदूरदर्शी नेताक कारण ग्रहण लगौने अछि।

नेपालक राजनीतिक अवस्था केहेन छैक जे किछु बात भेल त भारतक शासन पर कोन तरहें आरोप लगा देल जाय, बस एतुका मीडिया आ शासनाधिकारी सब ओतबे ताक मे देखाएत अछि। कोसी बैरेज मे ५६ गोट फाटक छैक आर पानिक डिस्चार्ज हेतु भारतीय अधिकारीक हाथ मे अधिकार छैक। अविरल बरसात सँ नदीक भीतर आ बाहर सब तैर बढल पानिक मात्रा केँ भले ओ ५६ गोट फाटक कोना नियंत्रित कय लेतैक, लेकिन एतुक मीडिया केर दृष्टि मे कोसीक फाटक भारतीय अधिकारी कियैक नहि पूरा खोललक, सब दोष ओकरे पर डालि देलक। देशक सीमा केँ हम-अहाँ जेना मोन होयत परिभाषित कय लेब, मुदा पानिक बहाव ओहि सीमा केँ हमरा-अहाँ सँ पूछिकय ओकर सम्मान करैत अपन बहाव बनेतैक से बात नहि छैक। नेपालक पानि स्वतः भारतीय भूभाग मे प्रवेश करैत आयल छैक आर एकर दुष्प्रभाव बेसी ओहि कातक लोक पर पड़ैत रहबाक बात सर्वविदिते अछि। एहेन स्थिति मे अविवेकक पराकाष्ठा नांघैत ५६ गोट फाटक खोलबाक हड़बड़ी करब त एकर दुष्परिणाम कि सब सोझाँ आओत ई कहब जरुरी नहि छैक, स्वतः बुझय योग्य विषय थिक। दुइ देशक बीच सुमधुर सम्बन्ध आ नेपालक अर्थतंत्रक भारत पर परनिर्भरताक स्थिति सँ परिचित रहितो जँ एक-दोसरक हितक रक्षा लेल बुद्धि नहि पहुँचायब त दुष्परिणाम नेपाल केँ झेलय पड़त ई कहय मे कनियो अतिश्योक्ति नहि होयत।

ई एहेन प्राकृतिक आपदाक संकेत केलक जे जीवमंडल पर ग्लोबल वार्मिंग सँ कखनहु भऽ सकैछ वैज्ञानिक सब अन्दाज लगबैत बेर-बेर चेतावनी दैत आबि रहल अछि। वायूमण्डल मे खतरनाक गैस केर मात्रा बढि जेबाक कारण तापक्रम शनैः-शनैः बढैत जा रहल छैक आर एकर असैर सँ ग्लेशियर पिघलब आ बरसातक मात्रा – मानसून केर समय आदि मे अनियंत्रणक गुंजाईश बढि गेल छैक। यदि ४०-५० घंटाक अविरल बर्खा यदि एहेन कहर मानव केँ देखा सकैत अछि त एकर अबधि आरो बढतैक त कि हेतैक से स्वतः बुझल जेबा योग्य विषय थिक। मनुष्य विकासक नाम पर प्रकृति सँ खेलबाड़ करत त एहेन वीभत्स दुर्घटना केँ कियो नहि नकारि सकैत छैक। वर्तमान पीड़ा आ आपदा त बस एकटा संकेत कहल जा सकैछ।

हरिः हरः!!