विशेष सम्पादकीय
किसलय कृष्ण, समाचार सम्पादक, मैथिली जिन्दाबाद ।
मैथिलीमे कोनो संवेदनशील प्रसंग वा अकादमीक प्रसंग पर साहित्यकार लोकनिक चुप्पी जगतविदित अछि । हालहिमे साहित्य अकादमीक दरभंगा प्रकरणमे सेहो किछु एहने सन दु:स्थिति रहल । अपनाकें विद्रोही तेवरक रचनाकार घोषित कयनिहार सभ सेहो पतनुकान लेने छलाह, तेहनोमे किछु अभियानी अपन लाठियेमे नींव बन्हने भाषा साहित्यक अस्मिता लेल लिखैत रहलाह ।एतय प्रश्न उठैत अछि जे मिथिला राज्य सन पहिचान, अकादमी सभक बदनेती प्रति अपन रचनामे क्रान्तिक गप्प करयवला व्यक्ति सुसुप्त किए भ जाइत छथि ? हमरा बुझने अकादमीक आमंत्रण, पुरस्कार लोलुपता आदि एहि समस्याक जड़िमे अछि ।
कहियो साहित्य अकादमीक पुरस्कारसँ सम्मानित प्रसिद्ध साहित्यकार मैथिलीकें आठम अनुसूचीमे शामिल नहि करबाक स्थितिमे साहित्य अकादमी पुरस्कार घुरेबाक घोषणा कयने छलाह, त कहियो साहित्य अकादमीक उटपटांग निर्णय विरूद्ध युवा कवि अजित आजाद पटनाक चेतना समितिक सोझाँ धरना पर बैसल छलाह । अजित त हालहुमे मिथिला राज्य लेल “ले जान कि दे जान”क नारा देलनि । मुदा दरभंगा आ एहने सन आन प्रकरण पर गुम्मी किएक ?
साहित्य अकादमीक कुकृत्य पर निरन्तर लिखयवला वरेण्य साहित्यकार रामलोचन ठाकुर, सुकान्त नागार्जुन आदि बारल छथि अकादमी द्वारा । कहीं बारले जयबाक भयसँ ई चुप्पी त व्याप्त नहि अछि ? की अकादमीक सेमिनार आ पुरस्कार लोभें हम सभ अप्पन भाषाकें अन्हार जंगल दिस नहि ल जा रहल छी ?
एहि चुप्पीकें अपवाद बनि बेर बेर तोड़बाक प्रयत्न करैत छथि साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित साहित्यकार डॉ शेफालिका वर्मा । कहियो ली मेरिडियन होटलक खचाखच भरल सभागार आ मंच पर उपस्थित अनेको केन्द्रीय मंत्री आ सांसद लग अटल मिथिला सम्मान ग्रहण करैत मिथिला राज्य सन मुद्दाकें अप्पन स्वरसँ बुलन्द करैत कहने छलीह जे “प्रभात झाजी, पप्पूजी सभ मिलि मिथिला राज्य निर्माण करू, तखने कल्याण संभव” आ एहि खेप हिन्दी भवन, नई दिल्लीमे मैथिली भोजपुरी अकादमीक कार्यक्रममे सरकारसँ मैथिली अकादमीक स्वतंत्र अस्तित्व लेल अप्पन मांग रखलनि संगहि मिथिला भवनक निर्माण सरकारी स्तर पर हो से मांग रखलनि ।
आवश्यकता एहि बातक अछि जे आनो मैथिली साहित्यकार लोकनि डा वर्माक स्वरमे स्वर मिलाकय मांगक आवाज बुलन्द करथि । ज्ञात हो जे विगत 19 आ 20 मई 2017 कें दिल्ली सरकारक मैथिली भोजपुरी अकादमी द्वारा काव्य पाठ आ कथा पाठक कार्यक्रम नई दिल्लीक हिन्दी भवनमे आयोजित छल, जाहिमे मैथिलीसँ प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ गंगेश गुंजन, युवा कवि रमण कुमार सिंह संग डॉ शेफालिका वर्मा कथा पाठ लेल आमंत्रित छलीह आ उक्त अवसर पर मिथिलाहित लेल ई मांग रखलनि । एहि सँ पूर्वो बहुते गैर-साहित्यिक संस्थादि द्वारा सेहो मैथिली आ भोजपुरी केर अलग-अलग अस्मिताक रक्षार्थ दिल्ली मे दुनू भाषाक अकादमी अलग-अलग बनबाक आवाज उठैत रहल अछि, परञ्च ई बस मंच आ आवाज धरि मात्र सीमित रहि यथार्थतः दिल्ली सरकार आ सम्बन्धित मंत्रालयक कान धरि कियैक नहि पहुँचि पबैत अछि ई रहस्यपूर्ण अछि।
