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पिता परिवारक रीढ होई छथि

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लेख विचार
प्रेषित: रिंकू झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार , वृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय -परिवार में एक टा पिता के महत्व।

पिता यानी पालन करय बला।एक टा बच्चा के परवरिश में माता आर पिता दुनू के भूमिका अहम होइत छै। बच्चा के सामाजिक अस्तित्व पिता के उपर टिकल रहय छै। पिता स मनुष्य के पहचान आर नाम भेटय छै। संस्कृत में एक टा श्लोक छै,
“पिता धर्म: पिता स्वर्ग: पिता हि परम तप:
पितरि प्रितिमायने सर्वा:प्रीयन्ति देवता:”
अथार्त पिता धर्म छथिन,पिता स्वर्ग छथिन,पिते सबस श्रेष्ठ तपस्या छैथ। पिता के प्रशन्न भेला स समस्त देव -पितर प्रशन्न रहय छैथ। मनुष्य के जीवन में पिता के छाया बहुत जरूरी छै, कारण जीवन के कोनो भी समस्या के समाधान पिता लग आसानी स भेट जाई छै। जीवन में जतेक महत्व एक टा पिता के छै ,ओतेक महत्व शायद कोनो और व्यक्ति के नहीं भ सकैया।एक टा पिता अपना संतान के खुशी लेल नहि जानि कतेक कष्ट झेलय छैथ।अपन सब खुशी संतान लेल हंसैत -खेलैत कुर्बान क दय छथिन,आर चेहरा पर सिकन तक नहीं होई छैन्ह। पिता अपना संतान के दुनिया दारी स अवगत कराबय छथिन।कन्हा पर बैसाक ऽ कोसो दूर मेला देखाबय छथिन। बच्चा के खुशी लेल घोड़ा तक बनय छैथ।हाथ थाम्हि क चलब सिखाबय छथिन। परिस्थिति स लड़ब सिखाबय छथिन। अपने फाटल जूता भले पहिरैथ,छेद बला गंजी पहिरने रहतैथ ,रफू कराक कूर्ता पहिरतैथ धैर बाल -बच्चा के नव कपड़ा पहिराबय छैथ।हुनकर सब जरुरत समय स पूरा करय छैथ। अपना संतान के कखनो दुखी नहीं देख सकय छैथ। अपने जे ज़िन्दगी जिलैथ ओहि स लाख गूणा बेहतर जिंदगी अपना संतान के देबय चाहय छैथ। पिता के डांट, फटकार आर शख्ति में सेहो संतान के हिते छुपल रहय छै। पिता के महत्व ज़िन्दगी में एक टा घर जेना होई छै, जेना दिन भरी मनुष्य कतौह मेहनत करैथ,कतबो परेशान रहैथ, दौड़ -धूप करैथ ,धैर सांझ होईत देरी हुनका अपन घरक छत चाहि जतय जाक ऽ ओ अपन दिन भैरक परेशानी के भूईल सुकून के ज़िन्दगी जी सकैथ।कारण ओहि घर में जे शांति भेटय छै से दुनिया के कोनो आलीशान होटल में नहीं छै।तहिना जीवन में मनुष्य के सिर पर पिता के छाया छै जिनका लग आबि बच्चा केहनो परेशानी में निश्चींत भय जाई छैथ, पिता के एक शब्द चिंता जुनी कर:सब ठीक भय जेतय,हम छी ने ई जादु स कम कहां छै। पिता एक टा परिवार के महत्वपूर्ण स्तंभ छथिन मानू मुखिया, जेना रीढ के हड्डी होई छै। बच्चा के संपुर्ण विकास में पिता के महत्व एक टा माता के योगदान स कनियो कम नहीं होईत अछि।कहबि छै जे माता अगर परिवार के हृदय छथिन त पिता ओहि हृदय के धड़कन, माता जन्म दै छथिन त पिता नाम। माता पंख दै छथिन त पिता उड़ान। पिता ओ पहिया छैथ जिनका उपर परिवार चलय छै। एक टा वटवृक्ष के जंका पिता सदैव अपना छाया में संतान के राखय छथिन। कोनो आंच नहीं आबय दय छथिन अपना संतान पर , अपने भले संघर्ष मे जिबैथ। एक टा पिते एहन व्यक्ति होइछ संसार में जे अपना संतान के अपना स आगू बढैत देख चाहय छथिन। पिता के महत्व कोनो भी व्यक्ति तखनहि बुझय छथिन जखन ओ स्वयं पिता बनय छैथ। लाख कोशिश के बावजूद मनुष्य अपना माता -पिता के ऋण स मुक्त नहि भ सकय छैथ।
हमरा नज़र में पिता ओ फरिस्ता छैथ जे केवल देवय जनय छथिन।एक टा खजाना छैथ पिता जाहि स संतान के हमेशा संरक्षण भेटैत रहय छै। ताहि हेतु हरेक व्यक्ति स हमर आग्रह अछी जे अपना जन्मदाता के आदर करी, सम्मान करी। हृदय स हुनकर सेवा करी ,अहि अमुल्य रत्न के कद्र करी।
बांकी पिता की छी से हुनका स पुछियौन जिनका सिर पर पिता के छाया नहीं छनि।

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