लेख विचार
प्रेषित: शेफालिका दत्त श्रीजा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
#विषय – “अंतरजातीय विवाहक कारण एवं भविष्य मे एकर परिणाम”
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अंतरजातीय विवाहक कारण एवं भविष्य में एकर परिणाम
समाज निरंतर परिवर्तनशील होइत अछि। समयक संग-संग मान्यता, परंपरा आ सामाजिक सोच में सेहो बदलाव अबैत रहैत अछि। विवाह समाजक एक महत्वपूर्ण संस्था मानल जाइत अछि, जाहि पर परिवार आ समाजक संरचना टिकल रहैत अछि। परंपरागत रूप सँ भारत आ मिथिला समाज में विवाह प्रायः अपन-अपन जातिक भीतर कयल जाइत छल। मुदा आधुनिक समय मे अंतरजातीय विवाहक प्रवृत्ति धीरे-धीरे बढ़ैत जा रहल अछि।
अंतरजातीय विवाहक प्रमुख कारण शिक्षा आ आधुनिक सोच अछि। जखन युवक-युवती विद्यालय, महाविद्यालय, कार्यालय आ अन्य सामाजिक स्थान पर एक-दोसरा सँ परिचित होइत छथि, तखन ओ सभ एक-दोसराक विचार, स्वभाव आ व्यक्तित्व के निकट सँ बुझैत छथि। एहि परिचय सँ आपसी समझ आ स्नेह उत्पन्न होइत अछि, जे अंततः विवाहक रूप लऽ सकैत अछि। शिक्षा मनुष्य के संकीर्ण सोच सँ बाहर निकालैत अछि आ समानता, स्वतंत्रता आ मानवीय मूल्यमान के महत्व सिखबैत अछि।
दोसर महत्वपूर्ण कारण शहरीकरण आ सामाजिक संपर्कक विस्तार अछि। आजुक समय मे लोग विभिन्न स्थान पर पढ़ाई आ रोजगार लेल जाइत अछि, जाहि सँ अलग-अलग जाति, भाषा आ संस्कृति के लोक सभ एक-दोसरासँ मिलैत-जुलैत छथि। एहि मेल-जोल सँ जातिगत दूरी धीरे-धीरे कम होइत अछि आ अंतरजातीय विवाहक संभावना बढ़ैत अछि।
अंतरजातीय विवाहक किछु सकारात्मक परिणाम सेहो समाज मे देखल जा रहल अछि। पहिल बात, एहि सँ जातिगत भेदभाव कम होइत अछि आ समाज मे समानताक भावना मजबूत बनैत अछि। जखन अलग-अलग जातिक लोक विवाह बंधन मे बँधैत छथि, तखन परिवार आ समाज मे आपसी समझ, सहिष्णुता आ सम्मानक भावना बढ़ैत अछि। दोसर, अलग-अलग संस्कृति आ परंपरा के मेल सँ परिवारिक जीवन अधिक समृद्ध आ विविधतापूर्ण बनैत अछि।
तथापि, अंतरजातीय विवाह आई कतेको स्थान पर सामाजिक चुनौती बनल अछि। किछु परिवार आ समाज एहन विवाह के सहज रूप सँ स्वीकार नहि करैत छथि। परंपरा आ सामाजिक प्रतिष्ठाक कारण कई बेर युवक-युवती के विरोध, आलोचना आ मानसिक दबाव झेलय पड़ैत अछि। एहि स्थिति मे परिवार आ समाज के उदार दृष्टिकोण अपनाबय के आवश्यकता अछि, ताकि युवा पीढ़ी अपन जीवनक निर्णय सम्मानपूर्वक लऽ सकय।
भविष्यक दृष्टि सँ देखल जाय तऽ अंतरजातीय विवाह समाज मे एकता आ सामाजिक समरसता के मजबूत बना सकैत अछि। यदि समाज धीरे-धीरे संकीर्णता छोड़ि कऽ मानवता, समानता आ प्रेम के महत्व देत, तऽ जातिगत भेदभाव स्वतः कम भऽ जायत। एहि सँ एकता अधिक समावेशी, उदार आ प्रगतिशील समाजक निर्माण संभव भऽ सकैत अछि।
अंततः कहि सकैत छी जे अंतरजातीय विवाह केवल दू व्यक्ति के संबंध नहि, बल्कि समाज मे परिवर्तन आ नवीन सोचक प्रतीक सेहो अछि। यदि ई संबंध आपसी सम्मान, प्रेम आ विश्वास पर आधारित होय, तऽ भविष्य मे समाज मे भाईचारा, समानता आ सामाजिक सद्भाव के बढ़ावा दे सकैत अछि।
