सामाजिक-राजनीतिक अभियन्ता डी. के. सिंह द्वारा डा. सी. के. राउत पर गंभीर आरोप

बीरगंज, जून २, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!!

डा. सी. के. राउत ऐतिहासिक तथ्य पर गलत व्याख्या राखि जनता केँ जातीयताक नाम पर भड़का रहल छथिः डी. के. सिंह

आइ‍-काल्हि स्वतंत्र मधेस गठबंधन केर संस्थापक-संयोजक नेपालक मधेस मे विभिन्न जाति-पातिक मधेसी समुदाय केँ लक्षित करैत जातीय दंगा पसारैत अपन राजनीतिक स्वार्थ केँ पूरा करबाक कुत्सित प्रयास कयल जा रहल अछि । डा सी के राउत द्वारा सामाजिक संजालक फेसबुक पेज मार्फत ऐतिहासिक तथ्य केँ तोड़ि-मरोड़ि राखल जा रहल अछि। अपना केँ मधेसक मसीहा सिद्ध करबाक क्रम मे एतुका अधिकांश अनपढ आ पिछड़ल जनमानस बीच कूतथ्य भाषा, साहित्य, इतिहास, परम्परा सम्बन्धित तथ्य केँ गलत ढंग सँ रखबाक काज राउत द्वारा कयल जा रहल अछि। ई बात मधेस विषयक शोधकर्ता सामाजिक-राजनीतिक अभियानी डी. के. सिंह द्वारा सप्रमाण तथ्य रखैत कहलनि अछि।
 

डा. सी. के. राउत द्वारा गलतबयानीक सबूत

किछु समय पूर्व डा सी के राउत अपन फेसबुक पेज सँ तिरहुता लिपि केर प्राचीनता केँ अपन क्षुद्र विद्वताक शिकार बनबैत एकरा बंगाली लिपि केँ तोड़ि-मरोड़िकय बनेबाक बात कहने छलाह।
(लिंक – “तिरहुता बंगाली लिपी को तोड़ मरोड़ के बनाया गया है!!
https://facebook.com/drckraut/posts/1939078046133676 )
 
अपन एद दोसरो पोस्ट मार्फत राउत कहलनि “तिरहुता लिपि विदेशी लिपि हो” ।
(लिंक – https://facebook.com/drckraut/posts/1937054519669362 )
 
डी. के. सिंह सप्रमाण राउत केर दाबी केँ खारिज करैत कहलनि अछि जे, ” 1992 ई. मे बारा जिलाक ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक नगरी सिम्रौनगढ मे उत्खनन सँ प्राप्त एक शिलालेख केर अध्ययन मे एक स्थानीय शिक्षक केर सहयोग सँ इटालिन पुरातत्वविद् मैसिमो विडा द्वारा अध्ययन सँ एहि बातक खोज भेल अछि जे एहि शिलालेख मे उद्धृत लिपि तिरहुताक्षर थिक। एहि शिलालेख केर टुकड़ा जेकर लम्बाई -16 से.मि. आर चौड़ाई 12.3 से.मि. रहल अछि, एकरा बारे मे नेपाल पुरातात्त्विक विभाग केर पत्रिका “Ancient Nepal” 1993 ई. केर अक्टुबर/नोवेम्बर अंक मे A Fragmentary Inscription From Simraungarh, The Ancient Maithila Capital शीर्षक अन्तर्गत प्रकाशित कयल गेल छल। एहि मे केवल 7 लाइन खण्डित रुप मे भेटल छलैक, जे कि चारू तरफ सँ अपुर्ण छलैक।”
 
पुनः 2018 मई 15 तारीख केर दिन बारा जिला निवासी अभियानी डी. के. सिंह सहितक अन्य सहयोगीजन मिलिकय ग्रामीण सभक उपस्थिति मे जेसीवी सँ उत्खन्न करेबाक क्रम मे दोसर एक गोट खण्डित शिलालेख केर टुकड़ा भेटल, जेकर लम्बाई 29.5 से. मि. आर चौड़ाई 15 से. मि. तथा एकटा शिवलिङ्ग सेहो भेटायल छल। ओहि क्षेत्र मे ई प्रमाण भेटलाक बादो ताहि ऐतिहासिक तथ्यक अस्तित्व केँ मिटेबाक हिसाबे झूठ अभिव्यक्ति दैत डा. राउत मधेसी जनता केँ गुमराह कय रहबाक आरोप ओ लगौलनि। मधेसक उत्पीडित जनता केँ कूतथ्य आ गलत भावनात्मक तथा जातिवादी संवेदना केँ छूबयवला लेख, विचार आदि मार्फत अपन समर्थकक संख्या बढाकय राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय केर नजरि मे स्वयं केँ बड़का क्रान्तिकारी-आन्दोलनी देखेबाक नाटक कय चौतर्फा आर्थिक सहयोग सहित अन्य भावनात्मक सहयोग लूटबाक मनसाय एहि सभक पाछाँ रहबाक बात सिंह द्वारा राउत केर सम्बन्ध मे कहल गेल।
 
एहि सँ पहिनहुँ राउत द्वारा फेसबुक मार्फत राखल गेल कतेको रास पोस्ट मे प्रदेश २ केर भाषा मैथिली तथा नामकरण मिथिला सँ मधेस केर भाषा, नाम, पहिचान आदि समाप्त होयबाक निराधार आशंकाक प्रसार करैत मैथिलीभाषी पर दरभंगिया, मनुवादी, मिथिला पाग दोसर पर जबरदस्ती लदबाक कतेको तरहक कूतथ्यक संग मैथिली भाषा २-३% ब्राह्मण-कायस्थ-भुमिहार-राजपुतादिक भाषा मात्र रहबाक बात सब प्रसार करैत मधेसी समुदायक बीच एकटा विभाजनकारी षड्यन्त्र सी के राउत केर विचार सँ देखायल छल। सिंह द्वारा राउत केर मानसिकता पर सवाल ठाढ करैत कहल गेल अछि जे ओ जानि-बुझिकय एहि शब्द सभक प्रयोग कय मधेसी युवा केँ जातिवादक खधिया मे धकेलि रहल छथि जेकरा चलते सोशल मीडिया मे मैथिली या मिथिला-तिरहुतक बात कयनिहार केँ बहुतो तरहक उपनाम सभ सँ ट्रोल करबाक काज होएत अछि। मधेसी समुदाय केँ एना आपस मे लड़ेबाक काज राउत द्वारा स्वतंत्र मधेसक अखन्ड राज्य भोग केर सपना देखबाक मानसिकता सँ कयल जाएत अछि, ईहो आरोप लगैत छन्हि।
 
जखन कि एक समय मे स्वयं मिथिला सँ होयबाक आ मातृभाषा मैथिली होयबाक बात अपन पुस्तक तक मे लिखिकय स्वीकार कयनिहार डा. सी. के. राउत अपने छथि, तखन कोन कारण सँ ओ अपनहि कहल बात सँ आब पाछाँ हँटि रहला अछि ई अपने-आप मे एकटा गंभीर सवाल ठाढ करैत अछि आ दुर्भाग्यपूर्ण सेहो अछि। तहिना ओ बेर-बेर अपन पोस्ट मार्फत जातीय सद्भावना बिगाड़बाक लेल २-३% केँ छोड़िकय आगू जेबाक बात करैत छथि जाहि मे ब्राह्मण, भुमिहार, कायस्थ, राजपुत आदि पड़ैत अछि।
 
सिंह सीधा सवाल पूछैत राउत सँ जिज्ञासा रखलनि अछि जे अहाँ एतेक पढल-लिखल आदमी रहितो एहेन गलती बेर-बेर कियैक कय रहल छी, कि प्रमाण अछि अहाँ संग जे तिरहुता लिपि बंगाली लिपि केँ तोड़ि-मरोड़िकय बनायल गेल अछि? अहाँ अपन स्वार्थ पूर्ति लेल मधेसी समुदाय मे कियैक जातीय द्वेष पसारबाक काज कय रहल छी? कि अहाँक मिशन पूरा करबाक यैह रुतबा रहत? अहाँ त स्वयं एकटा अहंकारी, तानाशाही तथा षड्यन्त्रकारी सेहो छी, जे अहाँक बात केँ आँखि मुनिकय मानि लैत अछि तेकरा मात्र अपन संगठन मे स्थान दैत छी बाकी पर विभिन्न आरोप लगाकय चरित्र हत्या करनिहार हत्यारा सेहो बनैत छी। यदि नहि, त सबकेँ एकठाम रखबाक लेल आ सभक कल्याण लेल अहाँक पास केहेन योजना अछि? इत्यादि पैघ आ महत्वपूर्ण प्रश्न सिंह द्वारा राउत केर सम्बन्ध मे उठायल गेल अछि।
 
डि. के. सिंह सम्पुर्ण मधेसी जनता सँ आह्वान करैत कहलनि अछि जे समय पर डा सि के राउत केर कुविचार आ आपस मे विभाजनक षड्यन्त्र सब कियो बुझी आर अपन मूल्य, विरासत, इतिहास संग कोनो प्रकारक दुर्भावना कोनो हाल मे झूठक तथ्य आ आधार पर एकदम नहि आनी। अपन दिमाग आ विवेक सँ काज लेल बेस होयत कारण राज्यक विभेद मे पड़िकय समस्त मधेसी नेपाल मे पछुआ गेल छी, मधेसक समग्रता २५० वर्षक दमन, शोषण आ विभेदक विरोध सँ छैक। एक दिस संविधान मे असमान अधिकार लेल संघर्ष आ दोसर दिस अपने मे जातियताक आधार पर अन्तर्विभाजनक षड्यन्त्र, आखिर ई कि संकेत करैत छैक! एहि पर सब कियो गंभीरता सँ मनन करी। डा. सी. के. राउत मधेसक स्वतंत्रताक नारा दैत छथि अधिकारसंपन्नता लेल, लेकिन झगड़ा लगबैत छथि जाति-पातिक नामपर; एहि सँ हुनक विद्रुप मानसिकता जगजाहिर भऽ चुकल अछि।