गीतकार विजय झा मुन्नू केर दुइ गोट भक्ति रचना
भक्ति-रचना – विजय झा ‘मुन्नू’ नचारी दिय प्रलोभ लोभ मद त्यागी, चरणक करि सेवा शिव यौ पाबि हम भक्ति सन मेवा दया धर्म ने कनिको बांचल सबतर हम अन्याय देखैय छी भाई भाई मे रक्त के प्यासल धिरज ने हम कतौउ देखैय छी माय बाप के बेटा पुतोहु, देखाबैय छै ठेंगा शिव यौ पाबि … गीतकार विजय झा मुन्नू केर दुइ गोट भक्ति रचना









