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प्रवीण नारायण चौधरी

खापरि मे जाइत भुजै छेलौं – वंदना चौधरी लिखित एक अत्यन्त मर्मस्पर्शी कथा

लघुकथा – वंदना चौधरी मनीषा काफी पढ़ल लिखल और देखै में सुंदर छेली। घर के काज राज में सेहो दक्ष। एकटा मध्यम वर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुनकर जन्म भेल छेलहनि। हुनकर पिता एक कट्टर ब्राह्मण छेलाहा। मनीषा के अपन सहपाठी मनोज स प्रेम भ गेलैन कॉलेज में जे की काफी धनीक भूमिहार के बेटा छेला और खापरि मे जाइत भुजै छेलौं – वंदना चौधरी लिखित एक अत्यन्त मर्मस्पर्शी कथा

सिर्फ पुत भऽ गेला सँ माय-बापक उद्धार भऽ जाइत छैक की? – रूबी झा लिखित मार्मिक लघुकथा

लघुकथा – रूबी झा तोरा त बेटो नै छौ, तोहर दुनू प्राणी के उद्धार कना हेतौ? दिन राति कमला अपन जेठ दियादनी के कहैत रहैय छलखिन्ह, “तूँ खेत-पथार कि अपन नामे लय छैं, हैत त हमरे बेटा के। हमरे घरवाला के नामे ल ले न। आगि के देतहु? श्राद्ध-कर्म के करतहु? बरषी-तिथी के करतहु? बेटी सिर्फ पुत भऽ गेला सँ माय-बापक उद्धार भऽ जाइत छैक की? – रूबी झा लिखित मार्मिक लघुकथा

गाम मे सब किछु अछि मुदा गाम नहि अछि

चिन्तन-विचार – प्रवीण नारायण चौधरी हँ भैया, गाम मे छी!   “बड गर्मी पड़ि रहल अछि। भोरे सुरुजदेव ततेक टाइट भऽ उगि जाइत छथि जे देखिते घबराहट होबय लगैछ। पंखा तर जे बैसैत छी से ओतय सँ हंटबाक एको रत्ती इच्छा नहि होइत अछि। जँ लाइन कटि गेल त बुझू जे मोन अलबलाय लगैत अछि।” गाम मे सब किछु अछि मुदा गाम नहि अछि

केना घटैत अछि जलस्तर मिथिला मे – एक गम्भीर केस स्टडी – नारायणपुर केर रजोखर पोखरि

अमित कुमार, तारडीह न्युज संवाददाताक एक रिपोर्ट ४ जुलाई २०१४, मैथिली जिन्दाबाद!! (मूल समाचार हिन्दी सँ अनुवादित) जल केर प्राकृतिक स्रोत पर अतिक्रमणकारीक नजरि तारडीह (दरभंगा)। एक दिश जतय खेतीक जोत व पानि लेल हाहाकार मचल अछि ओतहि दोसर दिश पानिक प्राकरतिक स्रोत अपन उद्धार लेल कोनो भागिरथ केर अवतार लेबाक प्रतीक्षा कय रहल अछि। केना घटैत अछि जलस्तर मिथिला मे – एक गम्भीर केस स्टडी – नारायणपुर केर रजोखर पोखरि

मधुबनी सांसद डा. अशोक कुमार यादव संसद मे उठेलनि मांगः रोजगारक साधन उपलब्ध कराउ

४ जुलाई २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! भारत मे आजादीक कइएक दशक बितलाक बादहु मिथिलाक्षेत्र मे रोजगारक साधन उपलब्ध नहि करेबाक अपरोक्ष आरोप आ असन्तुष्टि जाहिर करैत पहिल बेर भारतीय संसद लेल निर्वाचित मधुबनी सांसद द्वारा लोकसभाक शून्यकाल मे मांग राखल गेल अछि। मधुबनी सांसद डा. अशोक कुमार यादव द्वारा अपन निर्वाचन क्षेत्र मधुबनी मे रोजगारक साधन मधुबनी सांसद डा. अशोक कुमार यादव संसद मे उठेलनि मांगः रोजगारक साधन उपलब्ध कराउ

प्रवीणक गतिविधि अन्तर्राष्ट्रीय-राष्ट्रीय मीडिया मे

http://rajbirajdainik.com.np/Home/News/2570 मातृभाषामा पठनपाठन हुन नसकेकोमा चिन्ता व्यक्त Friday, January 13, 2017 दैनिक समाचारदाता राजविराज, २८ पुस ।  “मातृभाषामे शिक्षाः एक डेग” विषयक अन्तरक्रिया कार्यक्रम बिहीबार राजविराज स्थित पब्लिक विन्देश्वरी उच्च माध्यमिक विद्यालयमा सम्पन्न भएको छ ।  मिथिलाक अनुपम डेग नामक संस्थाद्वारा आयोजित कार्यक्रममा मैथिली साहित्य परिषद्का पूर्व अध्यक्ष समेत रहेका देवेन्द्र मिश्रले राज्यले मातृभाषामा पठनपाठन प्रवीणक गतिविधि अन्तर्राष्ट्रीय-राष्ट्रीय मीडिया मे

मैथिली कविता – एक दिन

कविता – ममता झा एक दिन एक दिन सब के जिन्दगी शेष भ जैत ई बात सब कियो जनई या, लेकिन अंतिम दिन तक स्वीकार बहुत लोग नई करै या कियाक त जीबऽ के अभिलाषा बेसी छै। किछु लोग जे जीवन स हैर गेल अपने आप के लाचार बुझइत अइ, हुनका लेल ई दू पंक्ति, मैथिली कविता – एक दिन

विधवा नारी केर विभिन्न अधिकार पर बंधनक औचित्य की?

विचार – डा. लीना चौधरी विधवा ई शब्द अपनेआप मे सब किछ कहि दैत अछि। स्त्रीक स्थिति मात्र सांस लैत शरीर केर रहि जाइत छैक। जीवन सँ रंग, स्वाद, सम्मान सब छीन लैछ ई समाज ओहि बेचारी केर। ओकरा ओहि बात केर सजा देल जाइत छैक जाहि मे ओकर कोनो हाथ नहि होइछ। ई समाज ईहो विधवा नारी केर विभिन्न अधिकार पर बंधनक औचित्य की?

दिल्लीक सुधीरा दाय ऊर्फ दीपक चौरसियाक खिस्सा

लघुकथा – रूबी झा कहल गेल छै सैंग (थोड़) लोक अपने संतान स होययै। एकटा छली सुधीरा दाय। अपन घरक ख्याल राखैय स ज्यादा दोसरे के घरक कहानी सुनैय-सुनाबै में मोन लागैय छलैन। अपन बच्चा स ज्यादा दोसरे के बाल-बच्चा पर आँखि गड़ेने रहै छलैथ। पूरा मुहल्ला में ककरा घर में कि भेलैक नै भेलैक दिल्लीक सुधीरा दाय ऊर्फ दीपक चौरसियाक खिस्सा

जुड़य अपना त आदर करय आन – ओकर कहानी जे संघर्ष कय धियापुता केँ ठाढ केलक

लघुकथा – रूबी झा बिलो रिक्सा चालक छलाह। दिन-राति मेहनत क अपन परिवार केर लालन-पालन करैत छलाह। ओ पाँच-प्राणी छलाह – अपने, कनियाँ आ हुनक दुटा बेटी आ एकटा बेटा छलैन। सब गोटे दिल्ली मे रहैत छलैथ। दिन बहुत नीक ढंग सँ बीत रहल छलैन। भगवान के लीला देखू, एक दिन शरीर हुनका धोखा द जुड़य अपना त आदर करय आन – ओकर कहानी जे संघर्ष कय धियापुता केँ ठाढ केलक