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प्रवीण नारायण चौधरी

सन् २०५० ई धरि कइएक महत्वपूर्ण वैश्विक महानगर समुद्र मे समा जायत

चिन्तन – प्रवीण नारायण चौधरी विश्वक कइएक देश रहत समुद्रक अन्दर   सन् २०५० धरि विश्व केर नक्शा मे बहुत पैघ परिवर्तन आबि जायत। समुद्रक तलहटीक स्तर जाहि गति सँ बढि रहल अछि ताहि कारणे समुद्र किनारक कतेको महत्वपूर्ण महानगर-नगर आ आबादीक्षेत्र २०५० धरि पानिक (समुद्रक) भीतर समा जेबाक खतरा अछि। एहनो नहि छैक जे सन् २०५० ई धरि कइएक महत्वपूर्ण वैश्विक महानगर समुद्र मे समा जायत

मधेशी आयोग केर अध्यक्ष विजय दत्त केँ सौंपल गेल ज्ञापनः मैथिली-मिथिलाक संरक्षण-संवर्धन-प्रवर्धनक मांग

६ नवम्बर २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषा एवं मिथिला संस्कृति संरक्षण-संवर्धन-प्रवर्धन निमित्त मधेशी आयोग केँ ज्ञापनपत्र देल गेल मैथिली साहित्यकार सभाक सभापाल (मुखिया) एवं मैथिलीक साहित्यकार-कवि प्रेम विदेह ललन मैथिली जिन्दाबाद सँ बातचीत मे कहलनि अछि जे पैछला दिन २ नवम्बर जनकपुर मे मैथिली भाषा संग-संग मिथिलाक बहुमूल्य संस्कृति आ लोकपरम्पराक संरक्षण-संवर्धन-प्रवर्धन मे नेपालदेश मे मधेशी आयोग केर अध्यक्ष विजय दत्त केँ सौंपल गेल ज्ञापनः मैथिली-मिथिलाक संरक्षण-संवर्धन-प्रवर्धनक मांग

ध्वस्त ताजमहलः विजेता चौधरीक टटका कथा

कथा – विजेता चौधरी ध्वस्त ताजमहल आंखिमे रहस्यमयी चञ्चलताक विम्ब लऽ कऽ घुमैत रहैत छथि ओ । किछ तऽ छैक हुनक आँखिमे जे हमरा हरदम आकर्षित करैत अछि । हुनक आँखि अभिव्यक्तिक सिम्बोलसन एकदम्म बाचाल छैक । नैनक भाषा होइत छैक से सुनल छल मुदा एतेक मुखर भऽ सकैछ से पहिलबेर देखल । शनि दिन ध्वस्त ताजमहलः विजेता चौधरीक टटका कथा

पर्यटन लेल अद्भुत स्थल अछि देवही टोलः एक सँ एक निर्माणक अनुपम छवि-छटा बनल अछि

पर्यटन स्थलक परिचय – विवेक चन्द्र मिश्र, देवही टोल, मधुबनी (साभार लेखकक फेसबुक पर राखल गेल पोस्ट, जहिनाक तहिना) ई थीक हमर गाम के बाबा देवेश्वर नाथ महादेव के स्थान। ई स्थान झंझारपुर सँ लगभग ७ किलोमीटर पूर्व में अवस्थित अछि। लखनौर और दीप के मध्य में दीप पश्चिम पंचायतान्तर्गत हमर गामक नाम #देवही_टोल अछि। पर्यटन लेल अद्भुत स्थल अछि देवही टोलः एक सँ एक निर्माणक अनुपम छवि-छटा बनल अछि

मैथिली मात्र नहि बल्कि आनहु भाषा मे विज्ञता आ जनजुड़ाव नगण्ये होइत छैक

मैथिलीक हरेक मंच, हरेक पुरस्कार, हरेक पत्रिका, हरेक अभियान आ हरेक गतिविधि मे सबके चेहरा देखायत तखने सबकेँ अनुभूति हेतैक। – आदरणीय डा. सुरेन्द्र लाभ आइ सामाजिक संजाल मे जानल-मानल सामाजिक-सांस्कृतिक अभियन्ता राजकुमार महतो नेपालीय मिथिलाक्षेत्रक जानल-मानल विद्वान् डा. सरेन्द्र लाभ केर उपरोक्त उक्ति शेयर कयलनि अछि। जनकपुर मे लगातार एहि विषय पर मंथन चलि मैथिली मात्र नहि बल्कि आनहु भाषा मे विज्ञता आ जनजुड़ाव नगण्ये होइत छैक

कि जातिवाद आ वर्गवादक अन्त संभव अछि?

विचार-मंथन – प्रवीण नारायण चौधरी नर आ बानर – विज्ञानक कहब छैक जे बानरहि सँ नर केर विकास भेल अछि। नर केर आदम पुरुष बानर छल। विकासक्रम मे बानर जखन सभ्य भेल त नर केर रूप मे परिणति पाबि गेल। जखन कि सामान्य तर्कबुद्धि सँ हम सब बुझि रहल छी जे बानर एक जानवर थिक, कि जातिवाद आ वर्गवादक अन्त संभव अछि?

महापात्र ब्राह्मण समुदायक ऋणी अछि हिन्दू मैथिलजन

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी महापात्र ब्राह्मण केँ ओछ-तुच्छ बुझब महाभूल थिक आइ सँ दुइ वर्ष पूर्व श्री प्रभाकर झा अपन एक गोट लेख हिन्दी मे मिथिलाक महापात्र समुदाय पर केन्द्रित किछु रास ऐतिहासिक सन्दर्भ जोड़िकय लिखने रहथि। मिथिला सँ सम्बद्ध कोनो लेख-रचना केँ यथासंभव मैथिली मे अनुवाद कय केँ प्रकाशित करैत छी, मुदा समयक महापात्र ब्राह्मण समुदायक ऋणी अछि हिन्दू मैथिलजन

दीपावली, अरिपन आ रंगोलीः परिप्रेक्ष्य मिथिलावासीक वर्तमान अवस्था

अरिपन आ रंगोली दुइ अलग चीज थिकैक अरिपन केर महत्व मिथिला में प्रशस्त छैक। अरिपन केर शोभा माटि पर पाड़य में छैक। मिथिला केर पवन माटि जाहि सँ जानकी स्वयं प्रकट भेलीह ओकर पुण्य आ प्रताप स्वतः कतेक महत्वपूर्ण भेल से सोचय योग्य विषय भेल। ताहि माटि पर गायक गोबर सँ निपलाक बाद चिकन माटि दीपावली, अरिपन आ रंगोलीः परिप्रेक्ष्य मिथिलावासीक वर्तमान अवस्था

नेपाल मे आंगुर पर गानय योग्य भत्ताभोगी व्यक्ति मैथिलीक विरोध मे कुतर्क कियैक करैत अछि

नेपाल मे मैथिलीक विरोध लेल एकटा खास भत्ताभोगी वर्ग सक्रिय केकरो नाम लेनाय त उचित नहि अछि परञ्च ई बात लिखब आवश्यक अछि जे आंगुर पर गानल किछु लोक भिन्न-भिन्न नाम सँ आईडी बनाकय मैथिली भाषाक सम्बन्ध मे गलत अफवाह आ कुतथ्य केर प्रसार कय अपना केँ पोल्हा रहल अछि। ओ ई बुझैत छैक जे नेपाल मे आंगुर पर गानय योग्य भत्ताभोगी व्यक्ति मैथिलीक विरोध मे कुतर्क कियैक करैत अछि

मिथिला रत्न केर खोज लेल वृहत् सहकार्यक आवश्यकता

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिला रत्न किनका मानल जाय   सामान्यतया अपन मिथिला सभ्यता लेल मूल्यवान् योगदान देनिहार व्यक्तित्व केँ ‘मिथिला रत्न’ कहल जा सकैत अछि। मुदा विगत कतेको समय सँ ‘मिथिला रत्न’ उपाधि सँ सम्मान प्रदान करबाक कार्य पर कइएक प्रकारक सवाल ठाढ़ कयल जेबाक कारणे हमहुँ दुविधा मे पड़ि गेल छी जे मिथिला रत्न केर खोज लेल वृहत् सहकार्यक आवश्यकता