रामचरितमानस मोतीः अयोध्याजीक रमणीयता, सनकादिक आगमन आर संवाद
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती अयोध्याजीक रमणीयता, सनकादिक आगमन आर संवाद १. जे (बौद्धिक) ज्ञान, वाणी आ इंद्रिय सँ परे आर अजन्मा छथि; संगहि माया, मन आ गुण सँ सेहो परे छथि, से सच्चिदानन्दघन भगवान् श्रेष्ठ नरलीला करैत छथि। प्रातःकाल सरयूजी मे स्नान कयकेँ ब्राह्मण आ सज्जन सभक संग सभा मे बैसैत छथि। … रामचरितमानस मोतीः अयोध्याजीक रमणीयता, सनकादिक आगमन आर संवाद





