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प्रवीण नारायण चौधरी

अत्यन्त जरूरी विमर्शः मैथिली भाषा-साहित्यक विद्वानक पहिचान की ?

मैथिली विमर्श ओ विमर्शकारक स्तर पर आधारित एक जरूरी चर्चा – प्रवीण नारायण चौधरी “विभिन्न सेमिनार सभमे तथाकथित ‘मैथिली’ विद्वान् वक्ता सभकेँ सुनि एहि निष्कर्ष पर पहुँचलहुँ अछि जे वक्ताक रुपमे हुनके आमंत्रित कएल जएबाक चाही जे मासमे कम सँ कम पाँच गोट पोथी पढ़ैत होथि ।” – मैथिली साहित्यकार ‘सत्येन्द्र कुमार झा’ एहि विन्दु अत्यन्त जरूरी विमर्शः मैथिली भाषा-साहित्यक विद्वानक पहिचान की ?

गीतिकाव्य के प्रमुख तत्वों के आधार पर विद्यापति के गीतों का मूल्यांकन

पठनीय आलेख – हिन्दी मे महाकवि विद्यापति केँ कविकोकिल कहल जाइत छन्हि । हुनकर पदावली केर संग्रहित रूप प्रत्येक विश्वविद्यालय मे हिन्दी सिलेबस मे पढ़ायल जा रहल अछि । विद्यापतिक पदावली सभक जे सम्पादित रूप उपलब्ध भेटैत अछि, तेकर मूल स्वरूप आ व्याख्या विभिन्न विद्वान् लोकनि भिन्न-भिन्न ढंग सँ कयलनि अछि । आइ सँ लगभग गीतिकाव्य के प्रमुख तत्वों के आधार पर विद्यापति के गीतों का मूल्यांकन

सिंगापुर मे जानकी जन्मोत्सव मनायल गेल

मैथिली सोसायटी (सिंगापुर) द्वारा जानकी नवमी महोत्सव सिंगापुर 2026 के तीसरे संस्करण का सफल आयोजन – आराधना झा श्रीवास्तव शनिवार, 25 अप्रैल 2026 को सिंगापुर स्थित आर्य समाज भवन के सभागार में मैथिली सोसायटी (सिंगापुर) के द्वारा जानकी नवमी महोत्सव 2026 का सफल आयोजन किया गया। मैथिली भाषा, मिथिलाक्षर लिपि, लोक-संस्कृति, लोक-कला, लोक-संगीत और मिथिला सिंगापुर मे जानकी जन्मोत्सव मनायल गेल

मैथिलीक शेक्सपियर महेन्द्र मलंगिया व मलंगिया फाउन्डेशनक नाम गिनीज विश्व रेकर्ड मे दर्ज

नई दिल्ली, २७ अप्रैल २०२६ । मैथिली जिन्दाबाद !! गाँधी दर्शन, राजघाट, नई दिल्ली मे मलंगिया फाउन्डेशन एवं गाँधी स्मृति दर्शन समितिक संयुक्त आयोजन मे चलि रहल ५-दिवसीय ‘मलंगिया महोत्सव’ मे काल्हि २६ अप्रैल २०२६ केँ गिनीज वर्ल्ड रेकर्ड केर भारतीय प्रतिनिधि मिलिन्द ऋषि नाथ एवं भारतीय जनता पार्टीक वरिष्ठ नेतृत्वकर्ता विजय गोयल द्वारा मैथिली मैथिलीक शेक्सपियर महेन्द्र मलंगिया व मलंगिया फाउन्डेशनक नाम गिनीज विश्व रेकर्ड मे दर्ज

स्वाध्याय-सत्संगक एक गोट प्रसंग

दुर्गा पाठ आ वर्तमान जीवन पद्धति एखन विश्वयुद्धक माहौल देखाइछ । हमरा सभक धर्मशास्त्र मे सेहो युद्धक वर्णन होइत पढ़ैत-गुनैत रहबाक यथास्थिति सँ सब परिचिते छी । युद्धहि केर विम्ब पर आधारित एकटा संछिप्त चर्चा करबाक इच्छा भेल । दुर्गा सप्तशतीक विशेष स्वाध्यायक क्षण मे आइ तेसर अध्याय सँ जे अभरल से देखू, पढ़ू आ स्वाध्याय-सत्संगक एक गोट प्रसंग

मिथिला नवनिर्माणक पहिल बैसार मधेपुरा सँ आरम्भः जनगणना मे मैथिली पर जोर देबाक संकल्प

समाचार-साभार कुमार विक्रमादित्य । २६ अप्रैल २०२६, मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हि २५ अप्रैल २०२६ केँ मिथिला नवनिर्माण अभियानक पहिल बैसार टी पी कॉलेज मधेपुरा मे प्रो कुमार सौरभक संयोजकत्व मे संपन्न भेल । मधेपुरा, सुपौल सहरसा आ पूर्णिया सं ढेर रास व्याख्याता, शिक्षक, प्राचार्य आ गैर शिक्षकेत्तर कर्मी एहि कार्यक्रम मे उपस्थित रहि अपन बात रखलाह मिथिला नवनिर्माणक पहिल बैसार मधेपुरा सँ आरम्भः जनगणना मे मैथिली पर जोर देबाक संकल्प

जानकी जन्म केर एक कथा इहो – भीमनाथ झा

जानकी-जन्मक एक कथा ईहो – डा. भीमनाथ झा विक्रम संवत् 2013 (1956 ई.) मे निज जानकी नवमी दिन कविवर सीताराम झा अपन प्रख्यात महाकाव्य ‘अम्बचरित’क प्रकाशकीय (क्षमा प्रार्थना) लिखलनि । स्वभावत: छन्देमे लिखलनि — सात गोट दोहामे । ताहिमे एक दोहा ई थिकनि – निज जननी-वानीक पद-सेवा करतब जानि । कयल चरित चरचा हुनक, अपन जानकी जन्म केर एक कथा इहो – भीमनाथ झा

विद्यापतिक विभिन्न गीत – भावार्थ सहित

विद्यापति गीत (मिलन) हरिनि-नयनि धनि रामा कानुक सरस परस संभाषन मेटल लाजक धामा हरिनि-नयनि धनि रामा….. हरि-कर हरिनि-नयन तन सौँपलि सखिगन गेलि आन ठाम अबसर पाइ धनि कर धरि नागर बिनति करए अनुपाम हरिनि-नयनि धनि रामा….. सुखद सेजोपरि नागरि नागर बइसल नबरति-सावे प्रति अंग चुम्बन रस अनुमोदन थर-थर काँपए राधे हरिनि-नयनि धनि रामा…. मदन-सिंहासन करल विद्यापतिक विभिन्न गीत – भावार्थ सहित

दुर्गा भगवतीक मध्यम् चरित्र – महालक्ष्मीक प्रादुर्भाव एवं दुर्दान्त महिषासुर सँ लड़ाइ

स्वाध्याय – प्रसंग आदिशक्ति महालक्ष्मी (दुर्गा सप्तशती – देवी दुर्गाक मध्यम चरित्रक विनियोग मे आदिशक्ति श्री महालक्ष्मीक प्रसन्नताक उद्देश्य सँ पाठ कयल जाइछ । आउ देखी हुनकर विशेष स्वरूप ।) ॐ अक्षस्रकपरशुं गदेषुकुलिशं पद्मं धनुष्कुण्डिकां दण्डं शक्तिमसिं च चर्म जलजं घण्टां सुराभाजनम् ॥ शूलं पाशसुदर्शने च दधतीं हस्तैः प्रसन्नाननां सेवे सैरिभमर्दिनीमिह महालक्ष्मीं सरोजस्थिताम् ॥ हम दुर्गा भगवतीक मध्यम् चरित्र – महालक्ष्मीक प्रादुर्भाव एवं दुर्दान्त महिषासुर सँ लड़ाइ

गन्दगी सँ जन्म लैछ खतरनाक वायरस – आध्यात्म आ यथार्थ बीचक एक विश्लेषण

स्वाध्यायक एक बेजोड़ प्रसंग (मात्र आस्तिक-आस्थावान आ स्वाध्यायी लोक वास्ते) ब्रह्माजी द्वारा विश्वक अधीश्वरी, जगत् केँ धारण करयवाली, संसारक पालन आ संहार करयवाली तथा तेजःस्वरूप भगवान् विष्णुक अनुपम शक्ति छथि, ताहि भगवती निद्रादेवीक स्तुति करय लगलाह – त्वं स्वाहा त्वं स्वधा त्वं हि वषट्कारःस्वरात्मिका ॥ सुधा त्वमक्षरे नित्ये त्रिधा मात्रात्मिका स्थिता ॥१॥ अर्धमात्रास्थिता नित्या यानुच्चार्या गन्दगी सँ जन्म लैछ खतरनाक वायरस – आध्यात्म आ यथार्थ बीचक एक विश्लेषण