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दुर्गा भगवतीक मध्यम् चरित्र – महालक्ष्मीक प्रादुर्भाव एवं दुर्दान्त महिषासुर सँ लड़ाइ

74 भ्यूज

स्वाध्याय – प्रसंग

आदिशक्ति महालक्ष्मी

(दुर्गा सप्तशती – देवी दुर्गाक मध्यम चरित्रक विनियोग मे आदिशक्ति श्री महालक्ष्मीक प्रसन्नताक उद्देश्य सँ पाठ कयल जाइछ । आउ देखी हुनकर विशेष स्वरूप ।)

ॐ अक्षस्रकपरशुं गदेषुकुलिशं पद्मं धनुष्कुण्डिकां
दण्डं शक्तिमसिं च चर्म जलजं घण्टां सुराभाजनम् ॥
शूलं पाशसुदर्शने च दधतीं हस्तैः प्रसन्नाननां
सेवे सैरिभमर्दिनीमिह महालक्ष्मीं सरोजस्थिताम् ॥

हम कमल केर आसन पर बैसल प्रसन्न मुखवाली महिषासुरमर्दिनी भगवती महालक्ष्मीक भजन करैत छी, जे अपन हाथ सब मे अक्षमाला, फरसा, गदा, बाण, वज्र, पद्म, धनुष, कुण्डिका, दण्ड, शक्ति, खड्ग, ढाल, शङ्ख, घण्टा, मधुपात्र, शूल, पाश आ चक्र करैत छथि ।

पाठ जारी….. मध्यम चरित्रक ऋषि विष्णु छथि, महालक्ष्मी स्वयं देवता छथि, उष्णिक छन्द मे अछि, शाकम्भरी एकर शक्ति थिकीह, दुर्गा बीज छथि, यजुर्वेद स्वरूप अछि आ एकर विनियोग महालक्ष्मीक प्रसन्नता लेल कयल जाइछ ।

ततोऽतिकोपपूर्णस्य चक्रिणो वदनात्ततः ।
निश्चक्राम महत्तेजो ब्रह्मणः शंकरस्य च ॥१०॥
अन्येषां चैव देवानां शक्रादीनां शरीरतः ।
निर्गतं सुमहत्तेजस्तच्चैक्यं समगच्छत ॥११॥
अतीव तेजसः कूटं ज्वलन्तमिव पर्वतम् ।
ददृशुस्ते सुरास्तत्र ज्वालाव्याप्तदिगन्तरम् ॥१२॥
अतुलं तत्र तत्तेजः सर्वदेवशरीरजम् ।
एकस्थं तदभून्नारी व्याप्तलोकत्रयं त्विषा ॥१३॥

क्षणेन तन्महासैन्यमसुराणां तथाम्बिका ।
नित्ये क्षयं यथा वह्निस्तृणदारुमहाचयम् ॥६७॥

वर्तमान प्रसंग मे देवी महालक्ष्मीक प्रादुर्भावक बात संगहि हुनक सर्वशक्तिमान् होयब, तदनोपरान्त महिषासुर केर सेना सँ घोर युद्ध करब, आ फेर जेना अग्निक ज्वाला क्षणहि भरि मे बड़का-बड़का जंगल केँ नाश कय दैछ, से दृश्यक विलक्षण वर्णन भेटत ।

लौकिकता सँ एहि अध्यायक तुलना मे नारी शक्तिक अनुभूति करबाक प्रेरणा भेटैत अछि । नारी शक्ति सँ आसुरिकता विरूद्ध संघर्षक प्रेरणा सेहो लय सकैत छी । नारी शक्तिक सम्मान मे पुरुष केँ कतहु चूक नहि करबाक चाही सेहो सन्देश भेटैछ ।

केना शक्तिसम्पन्न पुरुष सब अपन-अपन शक्तिक संचयन कयला उपरान्त जाज्वल्यमान् भगवती महालक्ष्मीक प्रादुर्भाव, केहेन कठिन परिस्थिति मे भ’ सकल तथा केना महिषासुर समान दुर्दान्त राक्षस मारल जा सकल – सब कथा-वृत्तान्त सँ बुझय मे आओत ।

महिषासुर जे कि इन्द्र आ सम्पूर्ण देवलोक पर कब्जा कय लेने छल, तेकरा सँ युद्ध कयलनि – ओकर वध महालक्ष्मी कयलनि । यैह थिक मध्यम चरित्र ।

उपरोक्त किछु जरूरी श्लोक केँ उद्धृत कयल अछि, बाकी भगवतीक शारीरिक निर्माण, अस्त्र-शस्त्र सँ लैश होयबाक व्याख्या आ तदोपरान्त सिंह केर सवारी करैत युद्धक वर्णन प्रभावित-प्रेरित करयवला अछि ।

हरिः हरः!!

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