रामचरितमानस मोतीः जनकजीक पहुँचब, कोल किरातादिक भेंट, सभक परस्पर मिलाप
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती जनकजीक पहुँचब, कोल किरातादिक भेंट, सभक परस्पर मिलाप १. ताहि समय सब कियो प्रेम मे मग्न रहथि। एतबे मे मिथिलापति जनकजी केँ अबैत सुनि सूर्यकुल रूपी कमल केर सूर्य श्री रामचन्द्रजी सभा सहित आदरपूर्वक तुरन्त उठिकय ठाढ़ भ’ गेलाह। भाइ, मंत्री, गुरु आर पुरवासी लोकनि केँ संग लय … रामचरितमानस मोतीः जनकजीक पहुँचब, कोल किरातादिक भेंट, सभक परस्पर मिलाप





