रामचरितमानस मोतीः राजा लोकनि सँ धनुष नहि टरब आ राजा जनकक आक्रोश
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती मंगलगान कयनिहार ‘भाट’ द्वारा जनकप्रतिज्ञाक घोषणा आ राजा लोकनि सँ धनुष नहि उठब, जनक केर निराशाजनक वाणी धनुष यज्ञशाला मे सीता जीक प्रवेश उपरान्तः १. राजा जनक भाट लोकनि केँ बजौलनि। ओ सब वंश केर कीर्ति (विरुदावली) गबिते आबि गेलाह। राजा कहलखिन – जाय केँ हमर प्रण सब … रामचरितमानस मोतीः राजा लोकनि सँ धनुष नहि टरब आ राजा जनकक आक्रोश




