रामचरितमानस मोतीः वशिष्ठ-भरत संवाद, श्री रामजी केँ अनबाक लेल चित्रकूट जेबाक तैयारी
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती वशिष्ठ-भरत संवाद, श्री रामजी केँ अनबाक लेल चित्रकूट जेबाक तैयारी १. वशिष्ठजी कहलखिन – हे तात! हृदय मे धीरज धरू आर जाहि कार्यक अवसर अछि, से करू। गुरुजीक वचन सुनि भरतजी उठलाह आ ओ अन्त्येष्टिक तैयारी करय लेल कहलनि। २. वेद मे बतायल गेल विधि मुताबिक राजाक देह … रामचरितमानस मोतीः वशिष्ठ-भरत संवाद, श्री रामजी केँ अनबाक लेल चित्रकूट जेबाक तैयारी


