किछु तँ लोक सब कहतय – लोकक त काज छय कहनाय
प्रेरणास्पद प्रसंग – प्रवीण नारायण चौधरी सहिये कहलनि अछि धर्मनाथ जी – लोक अहाँक बारे मे नीक सुनैत अछि त शक-सन्देहक दृष्टि सँ अहाँक चरित्र-चित्रण करब आरम्भ कय दैछ आ जँ बेजा (खराब) सुनैत अछि त तुरन्त ओहि पर यकीन (विश्वास) कय लैत अछि। ई अवस्था लोक-संसार मे अवश्य छैक। लेकिन एहि लेल अपन संसार … किछु तँ लोक सब कहतय – लोकक त काज छय कहनाय









