हड़बड़ी मे गड़बड़ी कि संवेदनहीनताक पराकाष्ठा छल मैथिल महिला समाजकः वाणीक प्रश्न
विचार – वाणी भारद्वाज बदलैत समाज आ संवेदनशीलता ई सर्वव्याप्त भ रहल अछि जे समाज के प्रारुप आधुनिकता के आवरण मे अपना केँ लिपटैत जा रहल अछि. धीरे धीरे भयावहता दिश बढल जा रहल अछि. संगहि ईहो कहब जे महिला पहिने के अपेक्षा बेसी सशक्त भेल जा रहल छथि. पहिनो महिला सब बहुत गुणी होइतो … हड़बड़ी मे गड़बड़ी कि संवेदनहीनताक पराकाष्ठा छल मैथिल महिला समाजकः वाणीक प्रश्न









