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प्रवीण नारायण चौधरी

सीता (मैथिली कविता)

साहित्य सृजन – पल्लवी झा मिथिलेश्वर अप्पन खेत में हल के शिरा घुमाओल जहिना जनकनन्दिनी भेली अवतरित धरा के भीतर सँ हे बहिना धन्य भेल मिथिला के धरती जन जन गाबै ये बधैया अन धन सोनवा लुटबै खुशी में झूमी सुनैना मैया   जनकसुता ओ चारू चंचला लक्ष्मी के अवतारी सेहो सात बरख आयु में सीता (मैथिली कविता)

साहित्यकार कामेन्द्रनाथ झाक निधन

18 मई 2021, मैथिली जिन्दाबाद!! साहित्यकार कामेन्द्रनाथ झाक निधन मधुबनी : मैथिली कथा-संग्रह ग्रिभाँस केर लेखक कामेंद्रनाथ झाक रवि दिन दरभंगा मे स्वर्गीय हेबाक दुखद समाचार अछि। ओ पचासी वर्षक रहथि। कोइलख गाम के निवासी कामेन्द्रनाथ झा विगत छह माह सँ बीमार रहथि और अपन ज्येष्ठ पुत्र साहित्यकार हीरेन्द्र कुमार झा संग हुनक दरभंगा आवास साहित्यकार कामेन्द्रनाथ झाक निधन

समाज मे सभक योगदान छैक – सभक प्रति स्वीकार्यताक भाव सब व्यक्ति मे जरूरी

जड़ व्यक्ति मे सेहो अनेक सद्गुण आ वैशिष्ट्य छैक – प्रवीण नारायण चौधरी एहि संसार मे भिन्न-भिन्न प्रकारक मनुष्य रहैछ। ओकर वृत्ति (कर्म) सेहो भिन्न-भिन्न होइछ। साधारण जनजीवन मे सभक आजीविका चलेबाक काज कतेको रंग के छैक। सामाजिक व्यवहार मे लोकवृत्तिक आधार पर केकरो सभ्य, केकरो असभ्य, केकरो ऊँच, केकरो नीच हेबाक बात प्रचलित सामाजिक समाज मे सभक योगदान छैक – सभक प्रति स्वीकार्यताक भाव सब व्यक्ति मे जरूरी

कोन मैथिली लेखक-साहित्यकार कतेक पढल जाइत छथि – एक छोट सर्वे

१७ मई २०२१ – मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषाक साहित्य आ एकर इतिहास सुदृढ आ सम्पन्न रहितो वर्तमान पीढी धरि अबैत-अबैत एकर पठनीयता पर बड पैघ संकट अछि। विद्यालय, महाविद्यालय आ उच्च शिक्षा धरि मैथिली स्थापित रहितो कतेक लोकक पसीन या प्राथमिकता मे मैथिली अध्ययन पड़ैत अछि ताहि पर सेहो दुविधाजनक स्थिति कहय-सुनय लेल भेटि जाइत कोन मैथिली लेखक-साहित्यकार कतेक पढल जाइत छथि – एक छोट सर्वे

संतोष पर संस्कृत केर प्रेरणादायी श्लोक मैथिली भावार्थ सहित

स्वाध्याय आलेख – प्रवीण नारायण चौधरी हमरा सभक समय मे प्राथमिक कक्षा मे संस्कृत केर पढाई उपलब्ध छल। संस्कृतक श्लोक सभक अर्थ सदिखन नीक आ प्रेरणादायी शिक्षा देल करय। नीतिश्लोकाः, सुभाषितानि, अन्य धार्मिक शास्त्र-पुराण आदिक चर्चा सब सँ जे श्लोक सभ प्राप्त हुए ताहि सब मे अपन जीवन मे अनुकरण योग्य सीख भेटि जाइत छल। संतोष पर संस्कृत केर प्रेरणादायी श्लोक मैथिली भावार्थ सहित

भगवती तुलसीक कथा (शिवपुराण मे वर्णित कथाक सार)

स्वाध्याय आलेख – तुलसीक कथा – अनुवादकः प्रवीण नारायण चौधरी हम मिथिलावासी हिन्दू समुदाय अपन आंगन मे तुलसी चौरा निश्चित रखैत छी। तुलसी भगवती छथि। तुलसीक बहुल्य उपयोग कर्मकाण्ड मे सेहो वर्णित अछि, यथा – भगवानक पूजा मे तुलसीपत्र केर हविष्य, प्रसाद आदि मे तुलसीपत्र देबाक महत्व, लोकक अन्तिम यात्राक समय मुख मे तुलसी आ भगवती तुलसीक कथा (शिवपुराण मे वर्णित कथाक सार)

मैथिली साहित्य अभियान विराटनगरक १३म् मासिक कवि गोष्ठी वेबिनार प्रारूप मे सम्पन्न

विराटनगर, १६ मई २०२१ – मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली साहित्य अभियान विराटनगर द्वारा १३म् मासिक कवि गोष्ठीक आयोजन वेबिनार प्रारूप मे काल्हि १५ मई शनि दिन सम्पन्न भेल। अभियान संयोजक कर्ण संजय एवं अध्यक्षता शिव नारायण पंडित सिंगल कयलनि, संचालन प्रवीण नारायण चौधरी कएने छलाह। कविक रूप मे कुमारी श्रेया, शान्ता कर्ण, कैलाश यादव, कुमार पृथु, मैथिली साहित्य अभियान विराटनगरक १३म् मासिक कवि गोष्ठी वेबिनार प्रारूप मे सम्पन्न

स्वयं बचाउ आ राज्य पर दबाव बनाउ – ई अहाँक अधिकार थिक

मैथिली – प्रवीण नारायण चौधरी   हम-अहाँ मैथिलीभाषी छी। जतेक मूल मिथिलावासी छी सभक भाषा मैथिली छी। मैथिली जेकर कतेको रास बोली छैक।   एक शब्दक अनेक पर्याय सहितक ई भाषा एतेक मीठ अछि जे विश्व भरिक कइएक भाषा मध्य एकर अपन खासियत केँ गानल जाइत छैक। एकर बहुत रास कारणो छैक। अपने सब हर्स्व स्वयं बचाउ आ राज्य पर दबाव बनाउ – ई अहाँक अधिकार थिक

मिथिला समाज मे लैंगिक विभेदक निन्दनीय अवस्थाः कि एखनहुँ बदलि सकल अछि समाज?

विचार – श्वेता चौधरी अपन समाज मे लोक सब केँ बजैत-कहैत देखल जाइत अछि – “बेटी बोझ होई छै”, “बेटी पराया धन होई छै”, “हे जल्दी बियाह क लियऽ, बेटी के बोझ हटाउ, बेटी जातेक जल्दी अपन घर चलि जाय ओतबे नीक” – एतय सवाल उठैत छैक जे एतेक दिन तक बेटी दोसर घर में मिथिला समाज मे लैंगिक विभेदक निन्दनीय अवस्थाः कि एखनहुँ बदलि सकल अछि समाज?

सरकारी नौकरी आ प्राइवेट नौकरी बीच तुलनात्मक समीक्षा

दहेज मुक्त मिथिला आ सरकारी नौकरी   (सरकारी नौकरी आ प्राइवेट नौकरी – एक तुलनात्मक अध्ययन) – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिला मे दहेज प्रथा   हम सब एकटा जनजागरण अभियान मे छी, एकर नाम थिकैक ‘दहेज मुक्त मिथिला’। हमरा लोकनिक दावी अछि जे एहि समूह द्वारा बिना कोनो माँग के दुइ पक्ष आपस मे विवाह सरकारी नौकरी आ प्राइवेट नौकरी बीच तुलनात्मक समीक्षा